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मौसम की मार से बर्बाद हो गई फसल

Sat, 11 Apr 2015 06:34 PM IST
निघासन
निघासन Updated Sat, 11 Apr 2015 06:34 PM IST
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The vagaries of weather ruined crops
तहसील क्षेत्र में शारदा नदी की तलहटी में बसे गांव बैलहा के किसान रामबिलास और छोटे की फसल बारिश और ओले गिरने से बर्बाद हो गई। इस बार अच्छी फसल देखकर उन्होंने सपना संजोया था कि गेहूं बेचकर आशियाने पर छप्पर डाल लेंगे, लेकिन उनके सपनों पर बरसात और तेज हवाओं के साथ ओलों ने पानी फेर दिया। इस बार जितना एक बीघा में गेहूं निकलता था उतना गेहूं एक एकड़ में निकला है। सर्वे के नाम पर किसी भी राजस्वकर्मी ने गांव की ओर रुख नहीं किया है। वैसे तो बैलहा ग्राम पंचायत के मजरों में रहने वाले किसानों के खेत बलुई मिट्टी के हैं। गेहूं की फसल बोने के बाद इन किसानों को दो से तीन पानी लगाना पड़ता था, लेकिन इस बार हर माह में अधिक वर्षा और तेज हवाओं ने किसान की लहलहाती फसल को बर्बाद कर दिया। पूरी खड़ी फसल तेज हवा में लेट गई, जिसके चलते फसल कमजोर पड़ गई। किसान बताते हैं कि फसल देखने से तो अच्छी लगती है, लेकिन जब उसकी मड़ाई की जाती है तो उसकी तरन न के बराबर हो रही है। महंगाई के दौर में मजदूरी देने भरको ही गेहूं हो पा रहे हैं।
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तहसीलदार सुनील कुमार झा ने बताया कि नेपाल सीमा पर बसे गांवों के किसानों की फसल का सर्वे कराया गया है। अन्य ग्राम पंचायतों में सर्वे के लिए लेखपालों से कहा गया है। शीघ्र ही सर्वे कराया जाएगा।
टूटे छप्पर में बीत रही है जिंदगी : गांव बैलहा के किसान रामबिलास और छोटे दोनों टूटे छप्पर में जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। फसल अच्छी होती तो वह इस बार इस छप्पर को डलवा लेते।
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लागत तक नहीं निकल पाई
नदी में करीब तीन एकड़ जमीन कट गई थी। तीन एकड़ शेष बची जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी। तीन एकड़ गेहूं में मात्र सातक्विंटल ही गेहूं हुआ है। लागत आदि नहीं निकल पा रही है।
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-रामबिलास, किसान, मुड़िया बैलहा
खाने के पड़ गए लाले
दो एकड़ गेहूं की फसल बोई थी। आंधी और पानी के साथ ओलों ने इस कदर कहर बरपाया कि सारी फसल बर्बाद हो गई। खेत में गेहूं की फसल गिर जाने के कारण मजदूर गेहूं काटने के लिए दोगुना गेहूं मांग रहे हैं। परिवार वालों को खाने और खिलाने तक के लाले हैं।
-दीपनरायन, मटहिया
गांव में नहीं आए राजस्वकर्मी
मैंने 15 बीघा गेहूं की फसल बोई थी। आंधी-पानी ने सारी फसल को बर्बाद कर दिया। सूचना के बाद भी कोई भी राजस्वकर्मी सर्वे करने के लिए गांव के अंदर नहीं पहुंचा है।

-मुस्तफा, गांव मुड़िया
चौपट हो गई फसल
पांच बीघा गेहूं की फसल बोई थी। पूरी फसल अधिक बरसात और आंधी के कारण चौपट हो गई। गेहूं की फसल को बेचकर बच्चों की फीस भरना और उनके लिए कोर्स की किताबें खरीदना चाहता था। बच्चों की पढ़ाई तो दूर खाने भर के लिए गेहूं नहीं हुए हैं।
-प्रहलाद, गांव ठाकुरपुरवा
डीएम के आदेश के बाद भी लेखपालों ने नहीं किया सर्वे
पूरी ग्राम पंचायत में करीब 70 फीसदी किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हुई। डीएम के आदेश के बाद भी अब तक लेखपाल सर्वे करने नहीं आए।
-अनीता यादव, ग्राम प्रधान

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