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शहर वालों ने बचाई बिजली विभाग की लाज
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 03 Apr 2015 05:09 PM IST
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बिजली विभाग के राजस्व वसूली अभियान में अधिकारियों ने लक्ष्य की प्राप्ति तो कर ली है, लेकिन इस बार शहरी और ग्रामीण उपभाक्ताओं की आर्थिक स्थिति में काफी अंतर दिखाई दिया है। एक तरफ शहर वालों ने कुल साढ़े आठ करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष साढ़े छह करोड़ बकाया जमा कर विभाग की लाज बचा ली तो वहीं करीब 70 फीसदी ग्रामीण उपभोक्ता आर्थिक कमजोरी के चलते एकमुश्त समाधान योजना का भी फायदा नहीं उठा पाए।
वर्ष 2014 के मार्च महीने में बिजली विभाग को राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा करने के लिए पूरी तरह शहरवालों के भरोसे रहना पड़ा। एक अधिकारी का कहना है कि डिवीजन के दो ग्रामीण सर्किलों को डेढ़-डेढ़ करोड़ बकाया वसूली का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन 100 से अधिक जगहों पर लगाए गए कैंपों के बावजूद दोनों सर्किलों से महज पौने दो करोड़ रुपये ही वसूली हो सकी। इसके मुकाबले शहर में एक माह में लगाए गए कैंपों में साढ़े छह करोड़ रुपये की बकाया वसूली की गई। बिजली अधिकारियों के मुताबिक गांवों में किसानों के पास पैसा नहीं है। हर किसान गन्ने का बकाया भुगतान न मिलने और आम खर्चों का हवाला देकर बिजली बिल अदा करने में कोताही बरत रहा है। यही कारण है कि इस बार ग्रामीण उपभोक्ता सौ फीसदी ब्याज दर में छूट योजना का भी फायदा नहीं उठा पाए। इससे विभाग का बकाया भी नहीं मिल पाया और किसान भी बकाएदार हो गए हैं।
एसडीओ आरबी सिंह ने बताया कि गांवों में राजस्व वसूली के लिए लगाए गए कैंपों में ज्यादा वसूली नहीं हो पाई है। कुल कनेक्शनों के मुकाबले महज 30 फीसदी ही बिल जमा हो पाए हैं। शहर वालों ने ज्यादा पैसा जमा किया, इससे विभाग का लक्ष्य आसानी से पूरा हो गया है। उम्मीद है कि गांवों से भी जल्द बकाया राजस्व मिलने लगेगा।
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वर्ष 2014 के मार्च महीने में बिजली विभाग को राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा करने के लिए पूरी तरह शहरवालों के भरोसे रहना पड़ा। एक अधिकारी का कहना है कि डिवीजन के दो ग्रामीण सर्किलों को डेढ़-डेढ़ करोड़ बकाया वसूली का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन 100 से अधिक जगहों पर लगाए गए कैंपों के बावजूद दोनों सर्किलों से महज पौने दो करोड़ रुपये ही वसूली हो सकी। इसके मुकाबले शहर में एक माह में लगाए गए कैंपों में साढ़े छह करोड़ रुपये की बकाया वसूली की गई। बिजली अधिकारियों के मुताबिक गांवों में किसानों के पास पैसा नहीं है। हर किसान गन्ने का बकाया भुगतान न मिलने और आम खर्चों का हवाला देकर बिजली बिल अदा करने में कोताही बरत रहा है। यही कारण है कि इस बार ग्रामीण उपभोक्ता सौ फीसदी ब्याज दर में छूट योजना का भी फायदा नहीं उठा पाए। इससे विभाग का बकाया भी नहीं मिल पाया और किसान भी बकाएदार हो गए हैं।
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एसडीओ आरबी सिंह ने बताया कि गांवों में राजस्व वसूली के लिए लगाए गए कैंपों में ज्यादा वसूली नहीं हो पाई है। कुल कनेक्शनों के मुकाबले महज 30 फीसदी ही बिल जमा हो पाए हैं। शहर वालों ने ज्यादा पैसा जमा किया, इससे विभाग का लक्ष्य आसानी से पूरा हो गया है। उम्मीद है कि गांवों से भी जल्द बकाया राजस्व मिलने लगेगा।
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