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समाधान बाहर नहीं, हमारे भीतर है : ट्रेनर
Sun, 23 Aug 2026 11:37 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 23 Aug 2026 11:37 PM IST
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ध्यान प्रकाश समागम में संबोधित करते हुए मास्टर्स। संवाद
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लखीमपुर खीरी। पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट के आह्वान पर लखीमपुर मेडिटेशन ग्रुप की ओर से रविवार को ध्यान प्रकाश समागम आयोजित किया गया। इसमें लखनऊ से आए सीनियर पिरामिड मास्टर्स ने ध्यान के जरिए आंतरिक शक्ति पहचानने और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया।
मास्टर पूनम आर्य ने कहा कि आज हर व्यक्ति किसी न किसी परेशानी से जूझ रहा है। अक्सर लोग समस्याओं का समाधान बाहर तलाशते हैं, जबकि समाधान उनके भीतर ही होता है। ध्यान से समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी उम्र के बराबर मिनट ध्यान जरूर करना चाहिए।
मास्टर डॉ. संगीता गुप्ता ने कहा कि केवल ध्यान करना पर्याप्त नहीं, सोच और व्यवहार में भी सकारात्मकता लाना जरूरी है। गलतफहमी होने पर खुलकर बात कर भ्रम दूर करना चाहिए।
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मास्टर प्रशंसा सिंह ने सांसों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सांस जन्म से जीवनभर साथ रहती है। ध्यान की शुरुआत में कई विचार आते हैं, लेकिन नियमित अभ्यास से इनकी संख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है। उन्होंने लोगों को 30 मिनट का ध्यान कराया।
मास्टर विपिन कुमार चौधरी ने कहा कि अच्छी सोच का प्रभाव व्यक्ति के साथ उसके आसपास के लोगों पर भी पड़ता है। जीवन की किसी एक अच्छी शिक्षा को भी व्यवहार में उतारने से सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
मास्टर चंद्रजीत वर्मा ने कहा कि नियमित ध्यान से मन में आने वाले भ्रम और विचार धीरे-धीरे कम होते हैं और मन शांत होता है। ध्यान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़कर जीवन में संतुलन और शांति प्राप्त की जा सकती है। अंत में आयोजक सुरजीत वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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मास्टर पूनम आर्य ने कहा कि आज हर व्यक्ति किसी न किसी परेशानी से जूझ रहा है। अक्सर लोग समस्याओं का समाधान बाहर तलाशते हैं, जबकि समाधान उनके भीतर ही होता है। ध्यान से समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी उम्र के बराबर मिनट ध्यान जरूर करना चाहिए।
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मास्टर डॉ. संगीता गुप्ता ने कहा कि केवल ध्यान करना पर्याप्त नहीं, सोच और व्यवहार में भी सकारात्मकता लाना जरूरी है। गलतफहमी होने पर खुलकर बात कर भ्रम दूर करना चाहिए।
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मास्टर प्रशंसा सिंह ने सांसों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सांस जन्म से जीवनभर साथ रहती है। ध्यान की शुरुआत में कई विचार आते हैं, लेकिन नियमित अभ्यास से इनकी संख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है। उन्होंने लोगों को 30 मिनट का ध्यान कराया।
मास्टर विपिन कुमार चौधरी ने कहा कि अच्छी सोच का प्रभाव व्यक्ति के साथ उसके आसपास के लोगों पर भी पड़ता है। जीवन की किसी एक अच्छी शिक्षा को भी व्यवहार में उतारने से सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
मास्टर चंद्रजीत वर्मा ने कहा कि नियमित ध्यान से मन में आने वाले भ्रम और विचार धीरे-धीरे कम होते हैं और मन शांत होता है। ध्यान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़कर जीवन में संतुलन और शांति प्राप्त की जा सकती है। अंत में आयोजक सुरजीत वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।