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Lakhimpur Kheri News: महंगाई की कैंची ने सलाद से मिठाई तक काटी जेब
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मैगलगंज की एक दुकान में बिक्री के लिए रखा प्याज। संवाद
मैगलगंज/मोहम्मदी। महंगाई की मार अब थाली से लेकर त्योहारों की रसोई तक पहुंच गई है। मैगलगंज मंडी में प्याज का थोक भाव एक महीने में दोगुने से ज्यादा होकर 42 से 45 रुपये किलो पहुंच गया है। इससे होटल-ढाबों में सलाद और सब्जियों में प्याज की मात्रा घटने लगी है।
वहीं, मोहम्मदी में चीनी का फुटकर भाव 65 रुपये किलो तक पहुंचने से त्योहारों में मिठाई, सेवईं और पकवान बनाना महंगा पड़ने की चिंता बढ़ गई है। सावन शिव आराधना और त्योहारों का महीना है। इसी दौरान रक्षाबंधन जैसे त्योहार होते हैं। भादौं में जन्माष्टमी भी मनाई जाती है। इन मौकों पर घरों में मिठाई, सेवईं और अन्य पकवान बनाए जाते हैं। दूध, चाय, मिठाई और शरबत में भी चीनी का इस्तेमाल होता है। अचानक बढ़े भाव से मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ने लगा है। लोगों ने सरकार से चीनी की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने की मांग की है।
मैगलगंज मंडी में एक महीने पहले प्याज 20 से 22 रुपये किलो बिक रहा था। शनिवार को भाव 42 से 45 रुपये किलो पहुंच गया। औसत भाव 21 से बढ़कर 43.50 रुपये किलो हुआ, यानी करीब 107 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
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प्याज महंगा होने से सब्जियों और सलाद में इसकी मात्रा कम करनी पड़ रही है। ग्राहकों को पहले की तरह प्याज देना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि इससे होटल की लागत बढ़ रही है।
-विमल सिंह, होटल व्यवसायी
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मैगलगंज मंडी में प्याज इंदौर से आ रहा है। नई प्याज की आवक शुरू होने में करीब दो महीने लग सकते हैं। कर्नाटक में नई प्याज बिक रही है, लेकिन वहां भी दाम अधिक हैं।
-मोहम्मद असलम, प्याज के थोक विक्रेता, मैगलगंज मंडी
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कुछ दिन पहले गैस महंगी होने के बाद मिलने में दिक्कत हुई। चीनी के दाम ठीक थे, लेकिन अचानक बढ़ गए। सरकार को इस पर ध्यान देकर चीनी के मूल्य कम करने चाहिए।
-रेखा यादव, गृहिणी
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चीनी के बढ़े दामों ने रसोई का स्वाद बिगाड़ दिया है। सरकार को ध्यान देना चाहिए। महंगाई बढ़ती जा रही है। चुनावी वर्ष है। सरकार को घरेलू सामान में चीनी आदि के दाम कम करने चाहिए।
-सुमन सिंह, गृहिणी
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वहीं, मोहम्मदी में चीनी का फुटकर भाव 65 रुपये किलो तक पहुंचने से त्योहारों में मिठाई, सेवईं और पकवान बनाना महंगा पड़ने की चिंता बढ़ गई है। सावन शिव आराधना और त्योहारों का महीना है। इसी दौरान रक्षाबंधन जैसे त्योहार होते हैं। भादौं में जन्माष्टमी भी मनाई जाती है। इन मौकों पर घरों में मिठाई, सेवईं और अन्य पकवान बनाए जाते हैं। दूध, चाय, मिठाई और शरबत में भी चीनी का इस्तेमाल होता है। अचानक बढ़े भाव से मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ने लगा है। लोगों ने सरकार से चीनी की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने की मांग की है।
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मैगलगंज मंडी में एक महीने पहले प्याज 20 से 22 रुपये किलो बिक रहा था। शनिवार को भाव 42 से 45 रुपये किलो पहुंच गया। औसत भाव 21 से बढ़कर 43.50 रुपये किलो हुआ, यानी करीब 107 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
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प्याज महंगा होने से सब्जियों और सलाद में इसकी मात्रा कम करनी पड़ रही है। ग्राहकों को पहले की तरह प्याज देना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि इससे होटल की लागत बढ़ रही है।
-विमल सिंह, होटल व्यवसायी
मैगलगंज मंडी में प्याज इंदौर से आ रहा है। नई प्याज की आवक शुरू होने में करीब दो महीने लग सकते हैं। कर्नाटक में नई प्याज बिक रही है, लेकिन वहां भी दाम अधिक हैं।
-मोहम्मद असलम, प्याज के थोक विक्रेता, मैगलगंज मंडी
कुछ दिन पहले गैस महंगी होने के बाद मिलने में दिक्कत हुई। चीनी के दाम ठीक थे, लेकिन अचानक बढ़ गए। सरकार को इस पर ध्यान देकर चीनी के मूल्य कम करने चाहिए।
-रेखा यादव, गृहिणी
चीनी के बढ़े दामों ने रसोई का स्वाद बिगाड़ दिया है। सरकार को ध्यान देना चाहिए। महंगाई बढ़ती जा रही है। चुनावी वर्ष है। सरकार को घरेलू सामान में चीनी आदि के दाम कम करने चाहिए।
-सुमन सिंह, गृहिणी

मैगलगंज की एक दुकान में बिक्री के लिए रखा प्याज। संवाद

मैगलगंज की एक दुकान में बिक्री के लिए रखा प्याज। संवाद

मैगलगंज की एक दुकान में बिक्री के लिए रखा प्याज। संवाद

मैगलगंज की एक दुकान में बिक्री के लिए रखा प्याज। संवाद