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Lakhimpur Kheri News: हाथों की जलन से ज्यादा चुभे नियम, परीक्षा से वंचित छात्रा
Wed, 18 Feb 2026 11:56 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 18 Feb 2026 11:56 PM IST
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छात्रा प्रियांशी।
मैगलगंज (खीरी)। यूपी बोर्ड में इंटरमीडिएट की परीक्षा की तैयारी में जुटी छात्रा प्रियांशी ने शायद ही सोचा होगा कि एक हादसा उसके सपनों पर ही विराम लगा देगा। एक फरवरी को आग से झुलसने के कारण उसके हाथ बुरी तरह घायल हो गए। दर्द के बावजूद उसने परीक्षा देने की इच्छा जताई, लेकिन सॉल्वर (लेखक) की अनुमति न मिलने से वह परीक्षा कक्ष तक नहीं पहुंच सकी।
भारतीय इंटर कॉलेज की छात्रा प्रियांशी के परिजनों ने बताया कि हादसे के बाद वह स्वयं लिखने की स्थिति में नहीं थी। ऐसे में परिवार ने जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) से सॉल्वर की अनुमति के लिए गुहार लगाई। मेडिकल रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, लेकिन कथित रूप से कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक व केंद्र व्यवस्थापक राजेश पांडे ने बताया कि विद्यालय की ओर से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दी गई थीं। डीआईओएस की ओर से मौखिक रूप से परीक्षा दिलाने की बात कही गई, लेकिन लिखित आदेश के अभाव में छात्रा को परीक्षा में शामिल कराना संभव नहीं था। सॉल्वर की अनुमति के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत अंकों की शर्त भी सामने रखी गई।
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छात्रा के पिता राजेंद्र राठौर का कहना है कि वे अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन आदेश नहीं मिला। उन्होंने कहा कि बेटी ने पूरे साल मेहनत की थी। वह परीक्षा देने को तैयार थी, पर नियमों की वजह से उसका साल खराब हो गया।
अब प्रियांशी न्याय की आस लगाए बैठी है। परिजनों ने मांग की है कि मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए विशेष अनुमति या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि एक दुर्घटना उसके भविष्य पर स्थायी असर न डाल सके।
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छात्रा को परीक्षा में बैठाने और सहायक देने का आदेश केंद्र व्यवस्थापक को दिया गया है। अगर इस काम में कोई कोताही बरती गई है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
-विनोद मिश्रा, डीआईओएस
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भारतीय इंटर कॉलेज की छात्रा प्रियांशी के परिजनों ने बताया कि हादसे के बाद वह स्वयं लिखने की स्थिति में नहीं थी। ऐसे में परिवार ने जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) से सॉल्वर की अनुमति के लिए गुहार लगाई। मेडिकल रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, लेकिन कथित रूप से कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ।
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विद्यालय के प्रधानाध्यापक व केंद्र व्यवस्थापक राजेश पांडे ने बताया कि विद्यालय की ओर से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दी गई थीं। डीआईओएस की ओर से मौखिक रूप से परीक्षा दिलाने की बात कही गई, लेकिन लिखित आदेश के अभाव में छात्रा को परीक्षा में शामिल कराना संभव नहीं था। सॉल्वर की अनुमति के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत अंकों की शर्त भी सामने रखी गई।
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छात्रा के पिता राजेंद्र राठौर का कहना है कि वे अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन आदेश नहीं मिला। उन्होंने कहा कि बेटी ने पूरे साल मेहनत की थी। वह परीक्षा देने को तैयार थी, पर नियमों की वजह से उसका साल खराब हो गया।
अब प्रियांशी न्याय की आस लगाए बैठी है। परिजनों ने मांग की है कि मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए विशेष अनुमति या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि एक दुर्घटना उसके भविष्य पर स्थायी असर न डाल सके।
छात्रा को परीक्षा में बैठाने और सहायक देने का आदेश केंद्र व्यवस्थापक को दिया गया है। अगर इस काम में कोई कोताही बरती गई है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
-विनोद मिश्रा, डीआईओएस

छात्रा प्रियांशी।