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Lakhimpur Kheri News: जंगल से गुजरे रास्ते और रेल लाइन बनीं वन्यजीवों का काल

Tue, 01 Jul 2025 11:57 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Tue, 01 Jul 2025 11:57 PM IST
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The roads and railway lines passing through the forest became the end of wildlife
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के कोर जोन से गुजरती रेल लाइन और जंगल की सड़कों पर तेज रफ्तार से फर्राटा भरते वाहन हर साल वन्यजीवों की जान ले रहे हैं। कहीं शिकार का खतरा तो कहीं मानव-वन्यजीव संघर्ष में बाघ समेत दुर्लभ प्राणियों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। सोमवार रात भीरा रेंज जंगल से गुजरी सड़क पर तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर एक तेंदुए की मौत हो गई।
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दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल के अंदर से कई प्रमुख रास्ते गुजरते हैं। इन पर छोटे से लेकर भारी वाहनों का भी आवागमन होता है। मैलानी-भीरा, पलिया-गौरीफंटा, पलिया-चंदनचौकी ऐसी सड़कें हैं, जो डीटीआर के कोर जोन जंगल से होकर निकली हैं। इसके अलावा बफरजोन में गोला-खुटार, भीरा-कुकरा, कुकरा-गोला रोड जैसी व्यस्त सड़कें हैं।
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वन विभाग ने जंगल के इन रास्तों पर चलने वाले वाहनों की अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित कर रखी है, जबकि वाहन चालक इस गति सीमा का उल्लंघन करते हुए फर्राटा भरते हैं। रात के समय इन रास्तों पर आवागमन प्रतिबंधित है। फिर भी पूरी रात इन सड़कों पर आवागमन रहता है। इससे वन्यजीवों के लिए हर समय खतरा मंडराता रहता है।
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-अब तक बाघ-तेंदुओ समेत कई वन्यजीव हो चुके हादसों का शिकार
जंगल के रास्तों पर तेज रफ्तार में चलते वाहनों की चपेट में आकर पिछले 10 साल के अंदर सात बाघ और दो तेंदुआ काल के गाल में समा चुके हैं। साथ ही बड़ी संख्या में हिरन, बंदर भी दुर्घटनाओं में मारे गए।

वन्यजीवों के मरने की प्रमुख घटनाएं--
1997-किशनपुर सेंक्चुरी में सड़क पार करते समय वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत।
2011- पुवायां रेंज में सड़क हादसे में बाघ की मौत।
2011- भीरा-पलिया रोड पर सड़क हादसे में बाघ की मौत, शव कई दिनों बाद मिला।
2011- भीरा-खुटार रोड पर वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत।
2012- मैलानी रेंज के महुरेना जंगल में सड़क हादसे में बाघ की मौत, शव कई दिनों बाद मिला।
2012- किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी- भीरा रोड पर जुलाई में टाटा 407 की टक्कर से बाघिन की मौत।
18 जनवरी 2015- किशनपुर सेंक्चुरी में मैलानी-भीरा रोड पर कुरियानी गांव के पास वाहन की चपेट में आकर नर तेंदुए की मौत।
18 अगस्त 2017 कतर्निया घाट में गोंडा-मैलानी रेल लाइन पर ट्रेन की चपेट में आकर बाघिन की मौत।
24 जनवरी 2018- किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी-भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
09 मई 2018- इसी रेंज की मैलानी-भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर बंदर की मौत।
02 दिसंबर- 2018- इसी रेंज में मैलानी- भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
25 फरवरी 2020- दुधवा में वाहन की चपेट में आकर बंदर की मौत।
10 जुलाई 2020- दुधवा में वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
30 सितंबर 2020- मैलानी -भीरा रोड पर टूरिस्ट बस की चपेट में आकर बंदर की मौत।
16 नवंबर2023- मैलानी रेंज महुरेना बीट जंगल से गुजरी रेल पर ट्रेन की चपेट में आकर भालू की मौत।
5 फरवरी2024- इसी रेल ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आकर तीन मादा चीतल की मौत।
- 6 जून 2024- इसी रेल ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आकर मादा बाघ शावक घायल हुआ।

-30 जून -2025 भीरा रेंज जंगल से गुजरी सड़क पर वाहन की चपेट में आकर नर तेंदुए की मौत।
वर्जन
जंगल के रास्तों पर गुजरने वाले वाहनों की अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित है। इससे अधिक रफ्तार में वाहन चलाने पर कार्रवाई की जाती है। यदि किसी वाहन से वन्यजीव दुर्घटनाग्रस्त होता है तो उसके लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
- डाॅ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व।
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