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क्रांतिकारियों के मिट रहे हैं बाकी निशां
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 14 Aug 2017 11:18 PM IST
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इनका बाकी निशां होगा
- फोटो : अमर उजाला
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उपेक्षा के शिकार हो रहे शहीदों, क्रांतिकारियों के स्मारक
किसी कवि ने लिखा था शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, यही इनका बाकी निशां होगा। तब शायद इन पंक्तियों को लिखने वाले कवि ने यह सोचा भी नहीं होगा कि आजादी मिलने के बाद ही शहीदों को इस तरह भुला दिया जाएगा। आजादी मिलने के कुछ वर्षों बाद ही लोग आजादी की जंग लड़ने वाले क्रांतिकारियों के शौर्य को भुलाने लगे। आजादी के बाद शहीदों और क्रांतिकारियों के जो स्मारक बनाए गए थे वे देखरेख के अभाव में जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। कुछ तो अपना वजूद खोने की कगार पर हैं।
स्वतंत्रता समर में अपने प्राणों की अंतिम आहुति देने वाले शहीद राजनरायन का जिला मुख्यालय पर स्थित स्मारक तो सुरक्षित है। लेकिन उनके पैतृक गांव भीखमपुर में लगी प्रतिमा आज भी उपेक्षित है। इस प्रतिमा के सिर को अभी तक छत भी नसीब नहीं हो पाई है। प्रतिमा के आसपास कूड़े के ढेर और गंदगी शहीद की प्रतिमा की उपेक्षा दर्शाती है। राष्ट्रीय पर्वों पर भी लोग शहीद की प्रतिमा पर फूल चढ़ाना तक याद नहीं रखते। जिला मुख्यालय पर बने राजनरायन स्मारक में सीतापुर आंख अस्पताल की शाखा चल रही है। स्मारक के प्रांगण में शहीद राजनरायन मिश्र की प्रतिमा स्थापित है। चार साल पहले निवर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने प्रतिमा के ऊपर छत बनाकर इसे सुरक्षित किया। अब तो इस स्मारक के ट्रस्ट का भी अता पता नहीं रहा। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक राजा लोने सिंह, इंद्र विक्रम सिंह का स्मारक तो दूर उनकी एक अदद तस्वीर तक जिले में उपलब्ध नहीं है।
आजादी के बाद सभी ब्लॉक कार्यालयों में क्रांति स्तंभ स्थापित किए थे। इन पर ब्लॉक क्षेत्र के शहीदों और स्वाधीनता सेनानियों के नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित किए गए थे। इन पर पुष्पांजलि अर्पित करने की परंपरा थी। समय के साथ यह परंपरा लुप्त हो गई। अब तो लोग राष्ट्रीय पर्वों पर भी इन पर फूल चढ़ाने की जरूरत नहीं समझते। कई स्तंभों की हालत तो इतनी जर्जर है कि उन पर लिखे क्रांतिकारियों के नाम तक मिट गए हैं।
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सांसद अजय मिश्र टैनी का कहना है कि क्रांतिक्रारियों से आने वाले पीढ़ियों को संघर्ष की प्रेरणा मिलती है। इनके स्मारक प्रेरणा के पुंज होते हैं। स्मारकों की उपेक्षा गंभीर विषय है। क्रांतिकारियों के स्मारकों के निर्माण और रखरखाव का मुद्दा हमने लोकसभा में उठाया है। अपने स्तर से भी इस दिशा में काम करूंगा।
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किसी कवि ने लिखा था शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, यही इनका बाकी निशां होगा। तब शायद इन पंक्तियों को लिखने वाले कवि ने यह सोचा भी नहीं होगा कि आजादी मिलने के बाद ही शहीदों को इस तरह भुला दिया जाएगा। आजादी मिलने के कुछ वर्षों बाद ही लोग आजादी की जंग लड़ने वाले क्रांतिकारियों के शौर्य को भुलाने लगे। आजादी के बाद शहीदों और क्रांतिकारियों के जो स्मारक बनाए गए थे वे देखरेख के अभाव में जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। कुछ तो अपना वजूद खोने की कगार पर हैं।
स्वतंत्रता समर में अपने प्राणों की अंतिम आहुति देने वाले शहीद राजनरायन का जिला मुख्यालय पर स्थित स्मारक तो सुरक्षित है। लेकिन उनके पैतृक गांव भीखमपुर में लगी प्रतिमा आज भी उपेक्षित है। इस प्रतिमा के सिर को अभी तक छत भी नसीब नहीं हो पाई है। प्रतिमा के आसपास कूड़े के ढेर और गंदगी शहीद की प्रतिमा की उपेक्षा दर्शाती है। राष्ट्रीय पर्वों पर भी लोग शहीद की प्रतिमा पर फूल चढ़ाना तक याद नहीं रखते। जिला मुख्यालय पर बने राजनरायन स्मारक में सीतापुर आंख अस्पताल की शाखा चल रही है। स्मारक के प्रांगण में शहीद राजनरायन मिश्र की प्रतिमा स्थापित है। चार साल पहले निवर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने प्रतिमा के ऊपर छत बनाकर इसे सुरक्षित किया। अब तो इस स्मारक के ट्रस्ट का भी अता पता नहीं रहा। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक राजा लोने सिंह, इंद्र विक्रम सिंह का स्मारक तो दूर उनकी एक अदद तस्वीर तक जिले में उपलब्ध नहीं है।
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आजादी के बाद सभी ब्लॉक कार्यालयों में क्रांति स्तंभ स्थापित किए थे। इन पर ब्लॉक क्षेत्र के शहीदों और स्वाधीनता सेनानियों के नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित किए गए थे। इन पर पुष्पांजलि अर्पित करने की परंपरा थी। समय के साथ यह परंपरा लुप्त हो गई। अब तो लोग राष्ट्रीय पर्वों पर भी इन पर फूल चढ़ाने की जरूरत नहीं समझते। कई स्तंभों की हालत तो इतनी जर्जर है कि उन पर लिखे क्रांतिकारियों के नाम तक मिट गए हैं।
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सांसद अजय मिश्र टैनी का कहना है कि क्रांतिक्रारियों से आने वाले पीढ़ियों को संघर्ष की प्रेरणा मिलती है। इनके स्मारक प्रेरणा के पुंज होते हैं। स्मारकों की उपेक्षा गंभीर विषय है। क्रांतिकारियों के स्मारकों के निर्माण और रखरखाव का मुद्दा हमने लोकसभा में उठाया है। अपने स्तर से भी इस दिशा में काम करूंगा।