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Lakhimpur Kheri News: बिगड़ी जीवनशैली से महिलाओं में बढ़ रही रसौली की समस्या
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लखीमपुर खीरी। महिलाओं के गर्भाश्य की रसौली (फाइब्राॅइड) के मामले बढ़ रहे हैं। सरकारी अस्पताल में पहुंचने वाली पांच प्रतिशत महिलाओं में यह समस्या देखने को मिल रही है। निजी अस्पतालों में भी फाइब्राॅइड के मामले सामने आए हैं। यह समस्या न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहरा नुकसान पहुंचाती है।
महिलाओं के गर्भाश्य की रसौली (फाइब्राॅइड) की समस्या कई कारणों से होती है। हार्मोनल असंतुलन मुख्य कारण है। इसके अलावा अनुचित खानपान जैसे जंक फूड, तले-भुने पकवान खाने और फाइबर की कमी वाले आहार से खतरा बढ़ जाता है। अगर परिवार में पहले किसी महिला को ये समस्या है तो आशंका और बढ़ जाती है। शारीरिक सक्रियता की कमी, तनाव और मानसिक दबाव होने से से हार्मोनल बदलाव होते है, जो रसौली के खतरे को बढ़ा सकते है।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. ज्योति मेहरोत्रा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कराने से समस्या का पता चलता है। करीब पांच से सात प्रतिशत महिलाओं में इस तरह की समस्या सामने आती है। नियमित इलाज से दो से चार माह मे यह समस्या ठीक हो जाती है। जागरूकता और बचाव के उपायों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
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लक्षण
मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्ततस्राव और दर्द होना।
पेट के निचले हिस्से में सूजन या भारीपन का होना।
पेशाब में परेशानी या बार-बार पेशाब आना।
कमर दर्द और थकान का होना।
प्रजनन संबंधी समस्याएं, जैसे बांझपन।
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बचाव
संतुलित आहार, व्यायाम व वजन नियंत्रण से समाधान
रोजाना कम से कम 30 मिनट नियमित व्यायाम करें
ध्यान, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद से तनाव कम करें।
वजन नियंत्रित रखने से हार्मोनल संतुलन बेहतर होता है।
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महिलाओं के गर्भाश्य की रसौली (फाइब्राॅइड) की समस्या कई कारणों से होती है। हार्मोनल असंतुलन मुख्य कारण है। इसके अलावा अनुचित खानपान जैसे जंक फूड, तले-भुने पकवान खाने और फाइबर की कमी वाले आहार से खतरा बढ़ जाता है। अगर परिवार में पहले किसी महिला को ये समस्या है तो आशंका और बढ़ जाती है। शारीरिक सक्रियता की कमी, तनाव और मानसिक दबाव होने से से हार्मोनल बदलाव होते है, जो रसौली के खतरे को बढ़ा सकते है।
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जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. ज्योति मेहरोत्रा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कराने से समस्या का पता चलता है। करीब पांच से सात प्रतिशत महिलाओं में इस तरह की समस्या सामने आती है। नियमित इलाज से दो से चार माह मे यह समस्या ठीक हो जाती है। जागरूकता और बचाव के उपायों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
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लक्षण
मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्ततस्राव और दर्द होना।
पेट के निचले हिस्से में सूजन या भारीपन का होना।
पेशाब में परेशानी या बार-बार पेशाब आना।
कमर दर्द और थकान का होना।
प्रजनन संबंधी समस्याएं, जैसे बांझपन।
बचाव
संतुलित आहार, व्यायाम व वजन नियंत्रण से समाधान
रोजाना कम से कम 30 मिनट नियमित व्यायाम करें
ध्यान, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद से तनाव कम करें।
वजन नियंत्रित रखने से हार्मोनल संतुलन बेहतर होता है।