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Lakhimpur Kheri News: संकट खाद का नहीं, उसे पहुंचाने का है

Wed, 08 Jul 2026 11:11 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 08 Jul 2026 11:11 PM IST
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The problem is not about fertilizer, but about its delivery
भ​ल्लिया बुजुर्ग समिति पर पसरा सन्नाटा। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक होने का विभाग दावा कर रहा है, लेकिन कई सहकारी समितियों तक समय पर यूरिया नहीं पहुंच रही। विभागीय आंकड़ों में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बुधवार को विभिन्न समितियों की पड़ताल में कई स्थानों पर यूरिया का स्टॉक शून्य मिला।
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सचिवों का कहना है कि डिमांड भेजने के बावजूद खाद नहीं पहुंची, जबकि विभाग शुरुआती दिनों में परिवहन व्यवस्था में दिक्कत रहने की बात स्वीकार करते हुए अब स्थिति में सुधार का दावा कर रहा है। इससे किसान समितियों के चक्कर लगाने के बाद भी कई जगह खाली हाथ लौट रहे हैं।
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पड़ताल में बस्तौली, बिजुआ, नौरंगाबाद, बहुद्देशीय, पसगवां, जसमढ़ी, धौरहरा बी-पैक्स, सुजईकुंडा, गुदरिया, चकलाखीपुर, खरवहिया, भीखमपुर, जलालपुर, जड़ौरा, सुतेहरा और पलिया गन्ना समिति में यूरिया का स्टॉक शून्य मिला। संबंधित सचिवों ने बताया कि डिमांड भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक आपूर्ति नहीं पहुंची। पसगवां के सचिव भाई लाल और जसमढ़ी के सचिव कन्हैयालाल शर्मा ने एक-दो दिन में खाद आने की उम्मीद जताई।
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उचौलिया क्षेत्र के किरियारा में 300, बालदेवता में 80 और वनकागांव में 150 बोरी यूरिया उपलब्ध है। सचिव कन्हैयालाल ने बताया कि अतिरिक्त डिमांड भेजी जा चुकी है। केशवापुर के निपनिया में केवल 40 बोरी यूरिया बची है। सचिव दीनानाथ ने बताया कि डिमांड भेजी जा चुकी है। ओदरहा के सचिव अनिल दीक्षित ने बताया कि डिमांड भेजी गई है, लेकिन अभी आपूर्ति नहीं मिली। भीखमपुर के सचिव संजय सिंह ने बताया कि आवंटन हो चुका है, लेकिन खाद अभी तक नहीं पहुंची। संवाद
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145 से अधिक समितियां, सप्लाई के लिए सिर्फ 40 वाहन
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले में खाद आपूर्ति की जिम्मेदारी पीसीएफ के माध्यम से तीन ठेकेदारों के पास है। अर्जुनलाल के पास गोला और सदर, जीवन एंड कंपनी के पास धौरहरा, पलिया और निघासन तथा आनंद ट्रांसपोर्ट के पास मोहम्मदी और मितौली क्षेत्र की जिम्मेदारी है।
जिले में 132 सहकारी, 11 गन्ना समितियों के अलावा कृभको, इफको आदि की समितियां मिलाकर 145 से अधिक समितियां हैं। इनके लिए खाद ढुलाई को करीब 40 वाहन लगाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर कई वाहनों के खराब होने की बात भी सामने आई है। समितियों के सचिवों का कहना है कि पर्याप्त वाहन उपलब्ध नहीं होने से समय पर आपूर्ति प्रभावित हो रही है। हालांकि पीसीएफ ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था में किसी कमी से इन्कार कर रहा है।
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आंकड़ों में स्टॉक, जमीन पर इंतजार
जुलाई तक के विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में यूरिया का लक्ष्य 1,18,948 मीट्रिक टन है। इसके सापेक्ष 1,02,782 मीट्रिक टन उपलब्ध हुई, जिसमें 82,862 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है और 19,920 मीट्रिक टन स्टॉक शेष है। डीएपी का 6,863, एनपीके का 13,007, एमओपी का 1,258 तथा एसएसपी का 19,415 मीट्रिक टन स्टॉक भी शेष है। यानी अधिकांश उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन कई समितियों तक समय पर आपूर्ति नहीं पहुंचने की शिकायतें बनी हुई हैं।
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अनियमितताओं के आरोप भी चर्चा में
खाद वितरण को लेकर कुछ समितियों में अनियमितता के आरोप भी सामने आए हैं। औरंगाबाद के बाद फूलबेहड़ के मुड़िया गांव में 500 बोरी यूरिया की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आया है। इसके अलावा कई अन्य समितियों की जांच भी चल रही है। करीब एक सप्ताह पहले धौरहरा क्षेत्र की लाखुन समिति के लिए आवंटित खाद सिंगहा समिति भेजे जाने का मामला सामने आया था। अधिकारियों के अनुसार जांच में ट्रांसपोर्टर स्तर पर गड़बड़ी की पुष्टि हुई थी, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं की गई है।
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जुलाई तक खाद की उपलब्धता व वितरण (मीट्रिक टन)
खाद
लक्ष्य
उपलब्ध
वितरण
शेष स्टॉक
यूरिया
1,18,948
1,02,782
82,862
19,920
डीएपी
12,781
13,297
6,434
6,863
एनपीके 12,066
21,666
8,659
13,007
एमओपी 6,588
2,456
1,198
1,258
एसएसपी
24,526
38,568
19,153
19,415
नोट : ये आंकड़े विभाग के अनुसार हैं।
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जिले में लगातार खाद आ रही है और स्टॉक पर्याप्त है। शुरुआती दौर में ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था में कुछ दिक्कतें थीं, लेकिन अब काफी सुधार हो गया है। मंगलवार को 2680 एमटी की रैक मिली थी, जिसमें 1863 एमटी का आवंटन कर दिया गया। एक-दो दिन में यह खाद सभी समितियों तक पहुंच जाएगी। वर्तमान में 3157 एमटी खाद स्टॉक में है। इसके पहुंचने के बाद उसका भी आवंटन किया जाएगा।

-प्रवीण कुमार, एआर, कोऑपरेटिव
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ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था में कोई कमी नहीं है। तीन ठेकेदार काम कर रहे हैं और पर्याप्त वाहन लगे हैं। एआर-कोऑपरेटिव से जितना आवंटन मिलता है, उसी दिन सप्लाई भेज दी जाती है। उनके पास कोई आवंटन लंबित नहीं है।
-प्रवीण चंद्र राना, जिला प्रबंधक, पीसीएफ
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