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नाम बदलकर चलता मिला बंद अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 26 Oct 2016 11:43 PM IST
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एक बेड पर लेटे दो मरीज।
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गोला गोकर्णनाथ। छह महीने पहले गांव जहानपुर में फर्जी डिग्री से संचालित जिस अस्पताल को डिप्टी सीएमओ ने बंद कराया था, उसे धंधेबाजों ने नाम बदलकर फिर संचालित कर लिया। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा तो बिना डॉक्टर के कर्मचारी मरीजों का इलाज करते मिले। कुंभी पीएचसी के अधीक्षक डॉ एके चौरसिया, डॉ महेंद्र पाल के साथ टीम पहुंची तो उसी भवन में साइन बोर्ड पर लिखे एमबीबीएस डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी थी। अप्रशिक्षित कर्मचारी मरीजों का इलाज करते मिले। अस्पताल में मरीज भर्ती थे। अधिकतर को डेंगू से पीड़ित बताया गया। उनके ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। भर्ती मरीजों में भारत भूषण कॉलोनी निवासी रामसरनलाल, महमदपुर की रीता, छत्तीपुर निवासी सर्वेश कुमार, कुकरा के प्रमोद कुमार, सौंखिया से साइस्ता, किशनपुर से सुरेश कुमार, महुरेना के शैलेंद्र कुमार और फारुक आदि शामिल थे। इमरजेंसी वार्ड में मिल कॉलोनी निवासी श्यामा देवी और राजेंद्रनगर कॉलोनी की इशरत भर्ती थीं। इशरत को डेंगू बताया गया है। इशरत ने बताया कि उसके पिता अब्बास खां का भी इसी अस्पताल में इलाज चला था। 19 अक्तूबर को लखनऊ ले जाते समय रास्ते में डेंगू बुखार से उनकी मौत हो गई थी। तीन मरीजों को एक ही बेंच पर लिटाकर इलाज किया जा रहा था। इन्हें ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। ग्लूकोज कौन चढ़ा रहा है, इनमें कौन सी दवा मिलाई है? यह बताने वाला वहां कोई नहीं था। बता दें कि नगर में एक मेडिकल कॉलेज और कई ऐसे फर्जी अस्पताल चल रहे हैं, जिनमें मरीजों को भर्ती कर एलोपैथिक इलाज किया जाता है।
एक ही पैथोलॉजी से होती है जांच
अस्पताल में भर्ती मरीजों की पैथोलॉजी रिपोर्ट देखने से यह मालूम हुआ कि अस्पताल से एक ही पैथोलॉजी सेंटर पर मरीजों को जांच के लिए भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में अधिकतर मरीज डेंगू पीड़ित लिखे थे।
अस्पताल बंद करने की दी थी चेतावनी
डिप्टी सीएमओ डॉ रविंद्रनाथ ने बताया कि छह माह पूर्व जांच के बाद इलाज करने वाले डॉक्टर को डिग्री न दिखा पाने पर उन्होंने अस्पताल बंद करने की चेतावनी दी थी। डेंगू को लेकर हुई बैठक में इस अस्पताल में बिना डॉक्टर के इलाज किए जाने और डेंगू की वैक्सीन लगाने, ठेके पर इलाज करने की बात उठी थी। तब सीएमओ ने उन्हें अस्पताल की जांच कराने के निर्देश दिए थे। बताया कि यदि अस्पताल से किसी पैथोलॉजी सेंटर की मिलीभगत प्रमाणित हुई तो उसका लाइसेंस कैंसिल किया जाएगा। जांच आख्या मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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अस्पताल पर छापा मारकर मरीजों से जानकारी की गई है। जांच रिपोर्ट तैयार कर डिप्टी सीएमओ के मार्फत सीएमओ को भेजी जा रही है। - डॉ. एके चौरसिया, अधीक्षक पीएचसी कुंभी
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एक ही पैथोलॉजी से होती है जांच
अस्पताल में भर्ती मरीजों की पैथोलॉजी रिपोर्ट देखने से यह मालूम हुआ कि अस्पताल से एक ही पैथोलॉजी सेंटर पर मरीजों को जांच के लिए भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में अधिकतर मरीज डेंगू पीड़ित लिखे थे।
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अस्पताल बंद करने की दी थी चेतावनी
डिप्टी सीएमओ डॉ रविंद्रनाथ ने बताया कि छह माह पूर्व जांच के बाद इलाज करने वाले डॉक्टर को डिग्री न दिखा पाने पर उन्होंने अस्पताल बंद करने की चेतावनी दी थी। डेंगू को लेकर हुई बैठक में इस अस्पताल में बिना डॉक्टर के इलाज किए जाने और डेंगू की वैक्सीन लगाने, ठेके पर इलाज करने की बात उठी थी। तब सीएमओ ने उन्हें अस्पताल की जांच कराने के निर्देश दिए थे। बताया कि यदि अस्पताल से किसी पैथोलॉजी सेंटर की मिलीभगत प्रमाणित हुई तो उसका लाइसेंस कैंसिल किया जाएगा। जांच आख्या मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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अस्पताल पर छापा मारकर मरीजों से जानकारी की गई है। जांच रिपोर्ट तैयार कर डिप्टी सीएमओ के मार्फत सीएमओ को भेजी जा रही है। - डॉ. एके चौरसिया, अधीक्षक पीएचसी कुंभी