Uttarkashi Tunnel: सुरंग में फंसी मां की जान... बेटे के इंतजार में दिन-रात बेचैन; आंखों से छलक रहे आंसू
उत्तरकाशी में सुरंग के अंदर जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे 41 मजदूरों में लखीमपुर खीरी के गांव भैरमपुर निवासी 25 वर्षीय मंजीत भी शामिल है। सुरंग से बाहर निकालने में हो रही देरी से उसके परिवार वाले बेहद दुखी हैं। उसकी चिंता में मां को रात में नींद नहीं आ रही है।
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लखीमपुर खीरी के गांव भैरमपुर के मंजीत के परिजन दोहरी मुसीबत में है। एक तो परिवार का भरण-पोषण करने वाला मंजीत यहां से कोसों दूर उत्तरकाशी की एक सुरंग में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर परिवार का आर्थिक संकट बढ़ रहा है। घर में जो कुछ भी है, उससे बनने वाले खाने का निवाला उनके गले के नीचे नहीं उतर रहा है। मंजीत की कुशलता की खबर तो उन्हें मिल रही है लेकिन उसकी चिंता में मां को रात में नींद नहीं आ रही है।
बेलराया से पांच किलोमीटर की दूरी पर जंगल के किनारे बसे गांव भैरमपुर में मंजीत का परिवार रहता है। जहां उसकी मां, दो बहनें और बूढे दादा हैं। इन्हीं के भरण पोषण के लिए मंजीत उत्तरकाशी मजदूरी करने गया था। मां चौधराइन ने कहा था कि दिवाली पर चले आना, लेकिन वह मजबूरी वश नहीं आ सका। घटना के दूसरे दिन मंजीत के पिता चौधरी उत्तरकाशी रवाना हो गए थे। उनके पास मोबाइल भी नहीं है। दूसरों से मोबाइल लेकर बात करते हैं। परिवार वालों ने बताया कि शनिवार को उनका फोन आया था। बताया कि बेटा मंजीत ठीक है। एक-दो दिन में निकल आएंगे।
परिजनों ने बताया कि 13 दिन बीत गए हैं। उम्मीद टूटने लगी है। बचाव कार्य में लगी मशीनें जब रुक जाती हैं, तो ऐसा लगता है कि जिंदगी रुक गई है। सारी उम्मीद अब मशीनों से रह गई है। यही प्रार्थना है कि मशीन चले तो रुके नहीं। उधर, बाबा बिंद्रा प्रसाद बताते हैं क्या करें, हम लोग कहां जाएं। एसडीएम साहब रात आठ बजे आए थे। राशन और आश्वासन दे गए हैं।
'आखिर कब सुरंग से निकलेगा बेटा'
शुक्रवार रात एसडीएम अश्विनी कुमार सिंह मंजीत के घर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया। इस दौरान मंजीत की मां ने पूछा कि आखिर कब सुरंग से उनका बेटा निकाला जाएगा। मंजीत की मां चौधराइन मोबाइल पर बेटे की फोटो देख कर संतोष कर रही हैं। मनजीत के पिता उत्तरकाशी में घटनास्थल पर ही मौजूद हैं। मंजीत के परिवार को गांव के कोटेदार वीरेंद्र के जरिये राशन उपलब्ध कराया गया है।
एसडीएम अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि मंजीत के परिवार का हाल-चाल जानने के लिए शुक्रवार रात करीब आठ बजे वह गए थे। परिवार को राशन समेत अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। आश्वासन दिया है कि वह लोग किसी प्रकार की फिक्र न करें।
इस बीच मोबाइल पर अपने बेटे के फोटो देखने में मशगूल मंजीत की मां चौधराइन ने कहा कि साहब अब बर्दाश्त के बाहर है। एक-एक दिन इंतजार कराया जा रहा है। क्या सरकार के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि उनके बेटे सहित फंसे सभी मजदूरों को बाहर निकाला जा सके।