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Lakhimpur Kheri News: गौरी के नाम से जानी जाएगी बिजनौर से आई नन्ही हथिनी
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नन्हीं हथिनी गौरी को बोतल से दूध पिलाते वन कर्मी
लखीमपुर खीरी। बिजनौर के नजीबाबाद से दुधवा टाइगर रिजर्व लाई गई नन्ही हथिनी का नामकरण कर दिया गया है। नवरात्र से दो दिन पहले दुधवा आने के कारण फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने इस नन्ही हथिनी का नाम गौरी रखा है। गौरी को बोतल से पाइप के जरिये दूध पिलाया जा रहा है।
अपनी मां से बिछड़कर बिजनौर जिले के नजीबाबाद जंगल में भूखी-प्यासी भटकती मिली दो माह की हथिनी को वन विभाग ने रेस्क्यू कर नजीबाबाद रेंज कार्यालय पर रखा था। वहां प्रशिक्षित महावत न होने के कारण इसकी अच्छे ढंग से देखभाल नहीं हो पा रही थी। इसलिए इसे दुधवा टाइगर रिजर्व भेजने का निर्णय लिया गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक की अनुमति मिलने के बाद दुधवा से दो सदस्यीय टीम इसे लेने के लिए बुधवार को बिजनौर गई थी। यह टीम एक विशेष वाहन से नन्ही हथिनी को लेकर शुक्रवार रात करीब दो बजे दुधवा पहुंची।
दुधवा टाइगर रिजर्व ने इस नन्ही हथिनी को गोद लिया है। इसे दुधवा के सलूकापुर बेस कैंप में रखा गया है। शनिवार को फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा और उपनिदेशक डॉ. रंगाराजू टी. सलूकापुर पहुंचे और उसे दुलारा।
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शारदीय नवरात्र के दो दिन पहले गोद ली गई नन्हीं हथिनी के दुधवा पहुंचने के कारण दुधवा के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने इसका नामकरण करते हुए इसे गौरी नाम दिया। नामकरण के मौके पर दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डॉ. रंगाराजू टी, पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर, सोनारीपुर के रेंजर आरपी सिह, डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार और महावत इरशाद आदि वनकर्मी शामिल थे। नन्ही हथिनी का नामकरण होते ही जंगल तालियों की गड़गड़हाट से गूंज उठा। पांच साल पहले बिजनौर के अमानगढ़ से लाई गई नन्ही हथिनी को नवरात्र में लाए जाने के कारण उसे दुर्गा नाम दिया गया था।
नजीबाबाद से लाई गई नन्ही हथिनी को गौरी नाम दिया गया है। सलूकापुर बेस कैंप में रखकर उसकी अच्छे ढंग से देखभाल की जा रही है। उसे बोतल से दूध पिलाया जा रहा है। गौरी के स्वास्थ्य की भी नियमित जांच कराई जा रही है।
ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व
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अपनी मां से बिछड़कर बिजनौर जिले के नजीबाबाद जंगल में भूखी-प्यासी भटकती मिली दो माह की हथिनी को वन विभाग ने रेस्क्यू कर नजीबाबाद रेंज कार्यालय पर रखा था। वहां प्रशिक्षित महावत न होने के कारण इसकी अच्छे ढंग से देखभाल नहीं हो पा रही थी। इसलिए इसे दुधवा टाइगर रिजर्व भेजने का निर्णय लिया गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक की अनुमति मिलने के बाद दुधवा से दो सदस्यीय टीम इसे लेने के लिए बुधवार को बिजनौर गई थी। यह टीम एक विशेष वाहन से नन्ही हथिनी को लेकर शुक्रवार रात करीब दो बजे दुधवा पहुंची।
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दुधवा टाइगर रिजर्व ने इस नन्ही हथिनी को गोद लिया है। इसे दुधवा के सलूकापुर बेस कैंप में रखा गया है। शनिवार को फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा और उपनिदेशक डॉ. रंगाराजू टी. सलूकापुर पहुंचे और उसे दुलारा।
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शारदीय नवरात्र के दो दिन पहले गोद ली गई नन्हीं हथिनी के दुधवा पहुंचने के कारण दुधवा के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने इसका नामकरण करते हुए इसे गौरी नाम दिया। नामकरण के मौके पर दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डॉ. रंगाराजू टी, पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर, सोनारीपुर के रेंजर आरपी सिह, डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार और महावत इरशाद आदि वनकर्मी शामिल थे। नन्ही हथिनी का नामकरण होते ही जंगल तालियों की गड़गड़हाट से गूंज उठा। पांच साल पहले बिजनौर के अमानगढ़ से लाई गई नन्ही हथिनी को नवरात्र में लाए जाने के कारण उसे दुर्गा नाम दिया गया था।
नजीबाबाद से लाई गई नन्ही हथिनी को गौरी नाम दिया गया है। सलूकापुर बेस कैंप में रखकर उसकी अच्छे ढंग से देखभाल की जा रही है। उसे बोतल से दूध पिलाया जा रहा है। गौरी के स्वास्थ्य की भी नियमित जांच कराई जा रही है।
ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व