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Lakhimpur Kheri News: चुपचाप बेच दी अरनीखाना गन्ना समिति की जमीन... मामले ने तो अब तूल पकड़ा
Tue, 19 Aug 2025 10:46 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 19 Aug 2025 10:46 PM IST
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खीरी मार्ग स्थित अरनीखाना समिति का भवन। संवाद
लखीमपुर खीरी। खीरी रोड पर सौजन्या चौक के निकट अरनीखाना गन्ना समिति की भूमि बेचने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पिछले 64 वर्षों से जिस जगह पर निर्मित भवन में समिति संचालित हो रही है, वह लीज पर ली गई थी। अब इस पर मालिकाना हक का दावा करने वाले चंदेल परिवार ने इसकी बिक्री कर दी है। इसके बाद से ही यह मामला गर्माया हुआ है।
किसानों का कहना है कि जानबूझकर गन्ना विभाग और समिति के सचिव ने वर्ष 2021 में खत्म हुई लीज नहीं बढ़वाई। हालांकि अब समिति की ओर से मामले को लेकर कोर्ट में अपील की गई है। इस बीच आरोप-प्रत्यारोप के दौर भी शुरू हो गया।
कारण यह है कि समिति के अस्तित्व पर पिछले चार साल से संकट के बादल मंडरा रहे थे, मगर इसे बचाने के लिए इतने समय में कोई प्रयास नहीं किया गया। न कोई दूसरा इंतजाम किया गया।
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जिस भूमि पर बने भवन में अरनीखाना समिति का कार्यालय संचालित है, उसे नौरंगाबाद के चंदेल परिवार से वर्ष 1961 में लीज पर लिया गया था। तब 30 साल के लिए चंदेल परिवार की ललिता देवी ने पट्टा किया था। इसके बाद 1991 में इसी परिवार के अनिल चंदेल ने पट्टा (लीज) का नवीनीकरण किया। इसमें यह शर्त भी रखी गई कि वर्ष 2021 में लीज की अवधि समाप्त होने पर समिति भूमि व भवन खाली कर देगी।
दूसरी लीज की अवधि समाप्त होने के बाद जब समिति ने भूमि खाली नहीं की तो चंदेल परिवार कोर्ट चला गया, जहां उनके हक में फैसला हुआ और उसके बाद उन्होंने भूमि की बिक्री कर दी।
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किसानों का कहना है कि जानबूझकर गन्ना विभाग और समिति के सचिव ने वर्ष 2021 में खत्म हुई लीज नहीं बढ़वाई। हालांकि अब समिति की ओर से मामले को लेकर कोर्ट में अपील की गई है। इस बीच आरोप-प्रत्यारोप के दौर भी शुरू हो गया।
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कारण यह है कि समिति के अस्तित्व पर पिछले चार साल से संकट के बादल मंडरा रहे थे, मगर इसे बचाने के लिए इतने समय में कोई प्रयास नहीं किया गया। न कोई दूसरा इंतजाम किया गया।
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जिस भूमि पर बने भवन में अरनीखाना समिति का कार्यालय संचालित है, उसे नौरंगाबाद के चंदेल परिवार से वर्ष 1961 में लीज पर लिया गया था। तब 30 साल के लिए चंदेल परिवार की ललिता देवी ने पट्टा किया था। इसके बाद 1991 में इसी परिवार के अनिल चंदेल ने पट्टा (लीज) का नवीनीकरण किया। इसमें यह शर्त भी रखी गई कि वर्ष 2021 में लीज की अवधि समाप्त होने पर समिति भूमि व भवन खाली कर देगी।
दूसरी लीज की अवधि समाप्त होने के बाद जब समिति ने भूमि खाली नहीं की तो चंदेल परिवार कोर्ट चला गया, जहां उनके हक में फैसला हुआ और उसके बाद उन्होंने भूमि की बिक्री कर दी।