{"_id":"65380592a64d0d02300a07a0","slug":"the-growing-clan-of-tigers-is-gaining-prestige-in-the-fields-and-population-lakhimpur-news-c-120-1-sbly1018-8212-2023-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: बाघों का बढ़ता कुनबा जमा रहा खेतों-आबादी में रुतबा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: बाघों का बढ़ता कुनबा जमा रहा खेतों-आबादी में रुतबा
विज्ञापन
दुधवा टाईगर रिजर्व में बाघ स्रोत :वन विभाग
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में बाघों के बढ़ते कुनबे से जहां वन विभाग खुश है, वहीं लगातार खेतों और आबादी क्षेत्र में आने से वन विभाग की चुनौतियां बढ़ती जा रहीं हैं। फिलहाल, वन विभाग बढ़ती मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने या कम करने में नाकाम दिख रहा है।
भारत-नेपाल सीमा पर 2200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या इस समय 153 है। यह संख्या वर्ष 2021 में हुई गणना में सामने आई थी। दो वर्षों में इनकी संख्या में निश्चित रूप से और बढ़ोतरी हुई होगी। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि एक बाघ को अपनी टेरीटरी बनाने के लिए 15 से 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की जरूरत होती है। जंगल में बाघों के लिए भोजन पानी की उपलब्धता के घनत्व के अनुसार क्षेत्रफल में बढ़ोतरी या घटोतरी हो सकती है। मादा बाघ अपनी टेरीटरी नहीं बनाती। 153 में से यदि 100 बाघ नर हैं तो उन्हें अपनी टेरीटरी बनाने के लिए कम से कम 2000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल चाहिए, जबकि 2200 वर्ग किलोमीटर में कुछ हिस्सा बाघ के प्राकृतवास के लायक नहीं है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के कुल क्षेत्रफल में से करीब 90 वर्ग किलोमीटर पर अवैध अतिक्रमण हैं। बफर जोन ही नहीं कोर जोन में आबादी का दबाव है, ऐसे में बाघों की बढ़ती संख्या के लिहाज से जंगल छोटा पड़ने लगा है। उधर, जंगल के बाहर हो रही गन्ने की खेती बाघों के लिए काफी मुफीद साबित हो रही है। गन्ने के खेतों में बाघों को जंगल का माहौल मिल रहा है, इसलिए भी बाघ जंगल से निकलकर खेतों में अपना ठिकाना ही नहीं टेरीटरी भी बनाने लगे हैं।
विज्ञापन
करीब चार साल पहले ग्लोबल टाइगर फोरम ने तराई में मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं रोकने के लिए एक सर्वे किया था। सर्वे में फोरम ने यह बताया था कि बाघों को दूसरी जगह शिफ्ट करना मुमकिन नहीं है, लेकिन जंगल के आसपास बसे लोगों को जागरूक कर काफी हद तक मानव-बाघ संघर्ष कम किया जा सकता है, लेकिन अब वन विभाग बाघों को उन स्थानों पर शिफ्ट करने पर भी विचार कर रहा है, जहां बाघों की संख्या कम है। हालांकि अब तक इस पर सैद्धांतिक सहमति नहीं बन पाई है। इसके साथ ही बाघों के प्राकृतवास में सुधार और जंगल में भोजन पानी की उपलब्धता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
महत्वपूर्ण तथ्य
-2200 वर्ग किलोमीटर है दुधवा टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल
-900 वर्ग किलोमीटर है बफर जोन
-90 वर्ग किलोमीटर वनभूमि है अतिक्रमण का शिकार
-153 बाघ हैं दुधवा टाइगर रिजर्व में
-15 से 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल चाहिए बाघ को टेरीटरी बनाने के लिए
दुधवा टाइगर रिजर्व के आसपास आबादी का दबाव बढ़ रहा है। जंगल में बाघों की संख्या भी बढ़ रही है। इससे मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं आए दिन हो रही हैं। जंगल में बाघों के प्राकृतवास में सुधार और उनके लिए भोजन पानी की उपलब्धता बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है।
- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
भारत-नेपाल सीमा पर 2200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या इस समय 153 है। यह संख्या वर्ष 2021 में हुई गणना में सामने आई थी। दो वर्षों में इनकी संख्या में निश्चित रूप से और बढ़ोतरी हुई होगी। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि एक बाघ को अपनी टेरीटरी बनाने के लिए 15 से 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की जरूरत होती है। जंगल में बाघों के लिए भोजन पानी की उपलब्धता के घनत्व के अनुसार क्षेत्रफल में बढ़ोतरी या घटोतरी हो सकती है। मादा बाघ अपनी टेरीटरी नहीं बनाती। 153 में से यदि 100 बाघ नर हैं तो उन्हें अपनी टेरीटरी बनाने के लिए कम से कम 2000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल चाहिए, जबकि 2200 वर्ग किलोमीटर में कुछ हिस्सा बाघ के प्राकृतवास के लायक नहीं है।
विज्ञापन
दुधवा टाइगर रिजर्व के कुल क्षेत्रफल में से करीब 90 वर्ग किलोमीटर पर अवैध अतिक्रमण हैं। बफर जोन ही नहीं कोर जोन में आबादी का दबाव है, ऐसे में बाघों की बढ़ती संख्या के लिहाज से जंगल छोटा पड़ने लगा है। उधर, जंगल के बाहर हो रही गन्ने की खेती बाघों के लिए काफी मुफीद साबित हो रही है। गन्ने के खेतों में बाघों को जंगल का माहौल मिल रहा है, इसलिए भी बाघ जंगल से निकलकर खेतों में अपना ठिकाना ही नहीं टेरीटरी भी बनाने लगे हैं।
विज्ञापन
करीब चार साल पहले ग्लोबल टाइगर फोरम ने तराई में मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं रोकने के लिए एक सर्वे किया था। सर्वे में फोरम ने यह बताया था कि बाघों को दूसरी जगह शिफ्ट करना मुमकिन नहीं है, लेकिन जंगल के आसपास बसे लोगों को जागरूक कर काफी हद तक मानव-बाघ संघर्ष कम किया जा सकता है, लेकिन अब वन विभाग बाघों को उन स्थानों पर शिफ्ट करने पर भी विचार कर रहा है, जहां बाघों की संख्या कम है। हालांकि अब तक इस पर सैद्धांतिक सहमति नहीं बन पाई है। इसके साथ ही बाघों के प्राकृतवास में सुधार और जंगल में भोजन पानी की उपलब्धता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
महत्वपूर्ण तथ्य
-2200 वर्ग किलोमीटर है दुधवा टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल
-900 वर्ग किलोमीटर है बफर जोन
-90 वर्ग किलोमीटर वनभूमि है अतिक्रमण का शिकार
-153 बाघ हैं दुधवा टाइगर रिजर्व में
-15 से 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल चाहिए बाघ को टेरीटरी बनाने के लिए
दुधवा टाइगर रिजर्व के आसपास आबादी का दबाव बढ़ रहा है। जंगल में बाघों की संख्या भी बढ़ रही है। इससे मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं आए दिन हो रही हैं। जंगल में बाघों के प्राकृतवास में सुधार और उनके लिए भोजन पानी की उपलब्धता बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है।
- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व