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चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी कार्यशाला शुरू
पलिया कलां
Updated Sat, 24 Jan 2015 11:43 PM IST
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बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी द्वारा दुधवा नेशनल पार्क में बंगाल फ्लोरिकन प्रोजेक्ट इंडिया एंड नेपाल की चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी कार्यशाला का आज शुभारंभ हुआ। इसमें भारत, नेपाल एवं ब्रिटेन के कई स्थानों एवं राष्ट्रीय पार्कों से आए पक्षी विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
विश्व में अत्यंत कम संख्या में पाई जाने वाली बंगाल फ्लोरिकन बर्ड को बचाने के लिए उनके जीवन की समूची दिनचर्या का अध्ययन करने के लिए सेटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर उनके व्यवहार का परीक्षण करने आदि के लिए आयोजित इस कार्यशाला को आयोजक प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ डॉ. अशद रहमानी के अलावा इंग्लैंड के पक्षी विशेषज्ञ पाल डोनाल्ड, डॉ. इयान वार्दर, नेपाल के चितवन तथा बरदिया नेशनल पार्क, शुक्लाफंाटा और कोशी टप्पू वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी नेपाल के कई वन्यजीव एवं पक्षी विशेषज्ञों सहित भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के डॉ. कमर कुरेशी ने अपने विचार रखे। द्वितीय सेशन में दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वीके सिंह, मानो टाइगर रिजर्व आसाम की उपनिदेशक सोनाली घोष, बूरा चपोरी पार्क आसाम के समरदीप ओझा, हिमाचल प्रदेश के मकसद तमांग और नमिता ब्रहमा ने विचार रखे। दुधवा उपनिदेशक सिंह ने बताया कि आधा दर्जन बंगाल फ्लोरिकन में सेटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर उनके व्यवहार का परीक्षण किया गया। उन्होंने मार्च से मई तक ये चिड़िया कहां जाती हैं इसका अध्ययन करने की जरूरत बताई। इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश की ताजुम नाम दफा, बांबे नेचुरल सोसायटी के रजत भार्गव, रोहित कुमार सहित अनेक पक्षी विशेषज्ञ एवं वन्य जंतु प्रेमी मौजूद रहे।
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विश्व में अत्यंत कम संख्या में पाई जाने वाली बंगाल फ्लोरिकन बर्ड को बचाने के लिए उनके जीवन की समूची दिनचर्या का अध्ययन करने के लिए सेटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर उनके व्यवहार का परीक्षण करने आदि के लिए आयोजित इस कार्यशाला को आयोजक प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ डॉ. अशद रहमानी के अलावा इंग्लैंड के पक्षी विशेषज्ञ पाल डोनाल्ड, डॉ. इयान वार्दर, नेपाल के चितवन तथा बरदिया नेशनल पार्क, शुक्लाफंाटा और कोशी टप्पू वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी नेपाल के कई वन्यजीव एवं पक्षी विशेषज्ञों सहित भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के डॉ. कमर कुरेशी ने अपने विचार रखे। द्वितीय सेशन में दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वीके सिंह, मानो टाइगर रिजर्व आसाम की उपनिदेशक सोनाली घोष, बूरा चपोरी पार्क आसाम के समरदीप ओझा, हिमाचल प्रदेश के मकसद तमांग और नमिता ब्रहमा ने विचार रखे। दुधवा उपनिदेशक सिंह ने बताया कि आधा दर्जन बंगाल फ्लोरिकन में सेटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर उनके व्यवहार का परीक्षण किया गया। उन्होंने मार्च से मई तक ये चिड़िया कहां जाती हैं इसका अध्ययन करने की जरूरत बताई। इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश की ताजुम नाम दफा, बांबे नेचुरल सोसायटी के रजत भार्गव, रोहित कुमार सहित अनेक पक्षी विशेषज्ञ एवं वन्य जंतु प्रेमी मौजूद रहे।
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