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सुहेली नदी की धार मोड़ने में की गई खानापूर्ति
निघासन
Updated Mon, 12 Jan 2015 06:19 PM IST
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जंगल को बाढ़ से बचाने के लिए सुहेली बैराज के दक्षिण नदी की धार मोड़ने का कार्य एक करोड़ की लागत से किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अब तक 30 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन हालत जस की तस हैं। सिंचाई खंड प्रथम के अधिशाषी अभियंता का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है जांच करा कर कार्रवाई की जाएगी।
करीब छह माह पहले वन राज्यमंत्री सईद महफूज किदवई दुधवा भ्रमण पर आए थे। सुहेली बैराज से दक्षिण तरफ बह रही नदी का रुख जंगल की तरफ होने के कारण वनमंत्री ने नदी की धारा को मोड़ने के लिए करीब 70 लाख और सिंचाई विभाग ने करीब 30 लाख रुपये मंजूरी दी थी। इसमें जंगल की सफाई, जीओ बैग आदि लगाकर नदी की धारा को मोड़ने का काम होना था।
ग्राम बौधियाकलां निवासी जगदीश, मनोहर और तुलसी राम आदि का आरोप है कि चार दिनों तक जेसीबी मशीन से नदी की खुदाई की गई उसके बाद कार्य बंद कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस धनराशि से सुहेली नदी में जमा 15 मीटर दूरी तक जमा सिल्ट साफ करने के बाद कार्य बंद कर दिया गया है।
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अधिषाशी अभियंता सिंचाई खंड प्रथम आरपी यादव ने बताया कि कार्य चल रहा था। सही ढंग से कार्य न होने की सूचना मिली थी। बाहर होने के कारण मौके पर पहुंच नहीं पाया। मामले की जांचकर गलत हुए कार्य को दुबारा कराया जाएगा।
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करीब छह माह पहले वन राज्यमंत्री सईद महफूज किदवई दुधवा भ्रमण पर आए थे। सुहेली बैराज से दक्षिण तरफ बह रही नदी का रुख जंगल की तरफ होने के कारण वनमंत्री ने नदी की धारा को मोड़ने के लिए करीब 70 लाख और सिंचाई विभाग ने करीब 30 लाख रुपये मंजूरी दी थी। इसमें जंगल की सफाई, जीओ बैग आदि लगाकर नदी की धारा को मोड़ने का काम होना था।
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ग्राम बौधियाकलां निवासी जगदीश, मनोहर और तुलसी राम आदि का आरोप है कि चार दिनों तक जेसीबी मशीन से नदी की खुदाई की गई उसके बाद कार्य बंद कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस धनराशि से सुहेली नदी में जमा 15 मीटर दूरी तक जमा सिल्ट साफ करने के बाद कार्य बंद कर दिया गया है।
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अधिषाशी अभियंता सिंचाई खंड प्रथम आरपी यादव ने बताया कि कार्य चल रहा था। सही ढंग से कार्य न होने की सूचना मिली थी। बाहर होने के कारण मौके पर पहुंच नहीं पाया। मामले की जांचकर गलत हुए कार्य को दुबारा कराया जाएगा।