{"_id":"698e10a5c868001ce207d9cf","slug":"the-forest-department-has-termed-the-viral-information-about-the-fire-in-dudhwa-as-false-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1002-168135-2026-02-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: दुधवा में आग लगने की वायरल सूचना वन विभाग ने बताई गलत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: दुधवा में आग लगने की वायरल सूचना वन विभाग ने बताई गलत
Thu, 12 Feb 2026 11:10 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 12 Feb 2026 11:10 PM IST
विज्ञापन
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में आग लगाने का एक वीडियो बुधवार की देर शाम सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। जिसे देखकर लोग तरह-तरह की आशंकाएं जता रहे थे, लेकिन दुधवा पार्क कर्मियों के मुताबिक हकीकत यह है कि यह आग कोई दुर्घटना नहीं बल्कि वन विभाग द्वारा हर साल की जाने वाली एक नियमित प्रक्रिया है। इसे तकनीकी भाषा में फूकान कहा जाता है जो शाकाहारी वन्यजीवों के लिए नई घास उगाने को बेहद जरूरी है।
दरअसल फरवरी शुरू होते ही जंगल में सूखी घास और पत्तों की अधिकता हो जाती है। यह घास इतनी कड़ी और सूखी होती है कि पार्क के अंदर रहने वाले वन्यजीव इसे खा नहीं पाते। इसी समस्या के समाधान के लिए प्रति वर्ष फरवरी में वन विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में इस घास को नियंत्रित तरीके से जलाया जाता है। कर्मियों ने बताया कि आग जलाने के बाद कर्मचारी मौके पर ही तैनात रहते हैं और उसे सुरक्षित तरीके से बुझा देते हैं। आग बुझाने के बाद अगले दिन चिन्हित स्थान पर निशान लगाकर जुताई कर दी जाती है।
जुताई के बाद जल्द ही वहां नई और मुलायम घास तैयार हो जाती है, जिसे खाकर वन्यजीव अपना पेट भरते हैं। यह प्रक्रिया दुधवा की सभी रेंजों में चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह वन्यजीव प्रबंधन का एक हिस्सा है और इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं है। इस मामले में विस्तृत जानकारी के लिए जब दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर जगदीश आर से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो पता चला कि वह विभागीय कार्य से हाईकोर्ट गए हुए हैं और काल रिसीव नहीं हो सकी।
विज्ञापन
दरअसल फरवरी शुरू होते ही जंगल में सूखी घास और पत्तों की अधिकता हो जाती है। यह घास इतनी कड़ी और सूखी होती है कि पार्क के अंदर रहने वाले वन्यजीव इसे खा नहीं पाते। इसी समस्या के समाधान के लिए प्रति वर्ष फरवरी में वन विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में इस घास को नियंत्रित तरीके से जलाया जाता है। कर्मियों ने बताया कि आग जलाने के बाद कर्मचारी मौके पर ही तैनात रहते हैं और उसे सुरक्षित तरीके से बुझा देते हैं। आग बुझाने के बाद अगले दिन चिन्हित स्थान पर निशान लगाकर जुताई कर दी जाती है।
विज्ञापन
जुताई के बाद जल्द ही वहां नई और मुलायम घास तैयार हो जाती है, जिसे खाकर वन्यजीव अपना पेट भरते हैं। यह प्रक्रिया दुधवा की सभी रेंजों में चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह वन्यजीव प्रबंधन का एक हिस्सा है और इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं है। इस मामले में विस्तृत जानकारी के लिए जब दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर जगदीश आर से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो पता चला कि वह विभागीय कार्य से हाईकोर्ट गए हुए हैं और काल रिसीव नहीं हो सकी।