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जिले में बढ़ा काले हिरन का कुनबा
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 13 May 2015 06:10 PM IST
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जिले में काले हिरन का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। आमतौर से शुष्क जलवायु में पाए जाने वाले काले हिरनों को खीरी जिले की नम जलवायु रास आने लगी है। दस साल पहले यहां इक्का-दुक्का दिखने वाले काले हिरनों की संख्या अब बढ़कर करीब 500 पहुंच गई है।
जिले के ऊचौलिया क्षेत्र में जहां लखीमपुर खीरी जिले की सीमा हरदोई और शाहजहांपुर से मिलती है वहां सहजना, पनाहपुर और रंजीतपुर गांवों के आसपास 70-80 काले हिरनों के कई झुंड इन दिनों आसानी से देखे जा सकते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि यहां काले हिरनों की आबादी पिछले दस साल में काफी बढ़ी है।
डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया मंगलवार को ऊचौलिया क्षेत्र में भ्रमण के दौरान उन्हें अलग-अलग जगहों पर काले हिरन के दो झुंड दिखाई दिए। दोनों झुंडों में 70-80 तक हिरन थे। ग्रामीणों के मुताबिक इतने ही बड़े यहां करीब पांच झुंड हैं। उन्होंने बताया कि खीरी कस्बे और लगुचा के आसपास भी काले हिरन अक्सर मिल जाते हैं लेकिन यहां इनकी संख्या कम है।
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ग्रामीणों ने डीएफओ को बताया खीरी जिले की सीमा पर हरदोई जिले के एक किसान ने करीब दस साल पहले हिरनों का एक जोड़ा पाल रखा था। उससे करीब आधा दर्जन बच्चे हुए जिन्हें किसान ने खुला छोड़ दिया। उनसे यहां काले हिरनों की आबादी बढ़ना शुरू हुई। अनुकूल प्राकृतिक जलवायु, आवास, भोजन मिलने से अब तक इनकी आबादी बढ़कर करीब 500 हो गई है।
किशनपुर सेंक्चुअरी में सांभर की आबादी बढ़ी
किशनपुर में हिरन की सांभर प्रजाति की संख्या में भी इजाफा दर्ज किया गया है। पिछले दिनों प्रदेश के वनमंत्री महफूज किदवई को किशनपुर सेंक्चुअरी में भ्रमण के दौरान बड़ी संख्या में सांभर दिखाई दिए। दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक वीके सिंह ने भी सांभर की आबादी बढ़ने की पुष्टि की है। सांभर बाघ का पसंदीदा भोजन है। वयस्क सांभर का वजन करीब ढाई सौ किलो होता है। वर्ष 2013 में हुई गणना में किशनपुर में 184 सांभर मिले थे। मौजूदा समय में इनकी आबादी 300 तक पहुंचने की उम्मीद है।
डीएफओ साउथ खीरी नीरज कुमार ने बताया कि काला हिरन (ब्लैक बक) शेड्यूल-एक का प्राणी है। यह जंगलों के बजाय मैदानों और शुष्क जलवायु में रहना पसंद करता है। दक्षिण खीरी वन प्रभाग में इनकी आबादी में उत्साहजनक बढ़ोतरी हुई है। वन विभाग ने इनकी सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी है।
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जिले के ऊचौलिया क्षेत्र में जहां लखीमपुर खीरी जिले की सीमा हरदोई और शाहजहांपुर से मिलती है वहां सहजना, पनाहपुर और रंजीतपुर गांवों के आसपास 70-80 काले हिरनों के कई झुंड इन दिनों आसानी से देखे जा सकते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि यहां काले हिरनों की आबादी पिछले दस साल में काफी बढ़ी है।
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डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया मंगलवार को ऊचौलिया क्षेत्र में भ्रमण के दौरान उन्हें अलग-अलग जगहों पर काले हिरन के दो झुंड दिखाई दिए। दोनों झुंडों में 70-80 तक हिरन थे। ग्रामीणों के मुताबिक इतने ही बड़े यहां करीब पांच झुंड हैं। उन्होंने बताया कि खीरी कस्बे और लगुचा के आसपास भी काले हिरन अक्सर मिल जाते हैं लेकिन यहां इनकी संख्या कम है।
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ग्रामीणों ने डीएफओ को बताया खीरी जिले की सीमा पर हरदोई जिले के एक किसान ने करीब दस साल पहले हिरनों का एक जोड़ा पाल रखा था। उससे करीब आधा दर्जन बच्चे हुए जिन्हें किसान ने खुला छोड़ दिया। उनसे यहां काले हिरनों की आबादी बढ़ना शुरू हुई। अनुकूल प्राकृतिक जलवायु, आवास, भोजन मिलने से अब तक इनकी आबादी बढ़कर करीब 500 हो गई है।
किशनपुर सेंक्चुअरी में सांभर की आबादी बढ़ी
किशनपुर में हिरन की सांभर प्रजाति की संख्या में भी इजाफा दर्ज किया गया है। पिछले दिनों प्रदेश के वनमंत्री महफूज किदवई को किशनपुर सेंक्चुअरी में भ्रमण के दौरान बड़ी संख्या में सांभर दिखाई दिए। दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक वीके सिंह ने भी सांभर की आबादी बढ़ने की पुष्टि की है। सांभर बाघ का पसंदीदा भोजन है। वयस्क सांभर का वजन करीब ढाई सौ किलो होता है। वर्ष 2013 में हुई गणना में किशनपुर में 184 सांभर मिले थे। मौजूदा समय में इनकी आबादी 300 तक पहुंचने की उम्मीद है।
डीएफओ साउथ खीरी नीरज कुमार ने बताया कि काला हिरन (ब्लैक बक) शेड्यूल-एक का प्राणी है। यह जंगलों के बजाय मैदानों और शुष्क जलवायु में रहना पसंद करता है। दक्षिण खीरी वन प्रभाग में इनकी आबादी में उत्साहजनक बढ़ोतरी हुई है। वन विभाग ने इनकी सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी है।