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Lakhimpur Kheri News: समयावधि निकली, शुरू नहीं हो सका वृहद गो-आश्रय केंद्र
Sun, 16 Nov 2025 10:56 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 16 Nov 2025 10:56 PM IST
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औरंगाबाद का वृहद गो-आश्रय केंद्र। संवाद
लखीमपुर खीरी/मैगलगंज। पसगवां ब्लॉक की औरंगाबाद ग्राम पंचायत में 1.62 करोड़ की लागत से बनाई जा रही वृहद गोशाला का समयावधि के बाद भी शुरू नहीं हो सकी, जबकि इसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।
औरंगाबाद की ग्राम पंचायत की जमीन पर बनाई जा रही गोशाला की क्षमता 450 से अधिक पशुओं को संरक्षित करने की है। अगर यह गोशाला शुरू हो जाए तो क्षेत्र के किसानों व राहगीरों को काफी राहत मिलेगी। डेढ़ साल पहले इस गोशाला का निर्माण शुरू हुआ था, जो जून 2025 तक पूरा होना था।
विभागीय अफसरों ने निर्माण तो पूरा करा लिया है, लेकिन फिनिशिंग का काम जारी है। इधर, ईसानगर ब्लाक क्षेत्र में समैसा गांव में भी वृहद गो-आश्रय केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए बजट इसी वर्ष मिला था। अब तक इसका 50 प्रतिशत काम हो सका है।
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अफसरों ने बताया कि वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले ही इसका काम पूरा कराने के साथ ही इसे शुरू करा दिया जाएगा। इस गोशाला की लागत और क्षमता औरंगाबाद वाली गोशाला के बराबर ही है।
सीवीओ डॉ. दिनेश कुमार सचान ने बताया कि औरंगाबाद का निर्माण लगभग पूरा है। समैसा में अभी थोड़ा समय लगेगा।
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जिले में 144 छोटी-बड़ी गोशालाएं
-जनपद में 144 छोटी-बड़ी गोशालाएं हैं, जिसमें 34,968 से अधिक पशु संरक्षित हैं। वहीं, 13302 से अधिक पशु सुपुर्दी में दिए गए हैं। औरंगाबाद व समैसा गांव की गोशाला शुरू होने से संरक्षित होने वाले पशुओं की संख्या बढ़ जाएगी।
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औरंगाबाद की ग्राम पंचायत की जमीन पर बनाई जा रही गोशाला की क्षमता 450 से अधिक पशुओं को संरक्षित करने की है। अगर यह गोशाला शुरू हो जाए तो क्षेत्र के किसानों व राहगीरों को काफी राहत मिलेगी। डेढ़ साल पहले इस गोशाला का निर्माण शुरू हुआ था, जो जून 2025 तक पूरा होना था।
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विभागीय अफसरों ने निर्माण तो पूरा करा लिया है, लेकिन फिनिशिंग का काम जारी है। इधर, ईसानगर ब्लाक क्षेत्र में समैसा गांव में भी वृहद गो-आश्रय केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए बजट इसी वर्ष मिला था। अब तक इसका 50 प्रतिशत काम हो सका है।
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अफसरों ने बताया कि वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले ही इसका काम पूरा कराने के साथ ही इसे शुरू करा दिया जाएगा। इस गोशाला की लागत और क्षमता औरंगाबाद वाली गोशाला के बराबर ही है।
सीवीओ डॉ. दिनेश कुमार सचान ने बताया कि औरंगाबाद का निर्माण लगभग पूरा है। समैसा में अभी थोड़ा समय लगेगा।
जिले में 144 छोटी-बड़ी गोशालाएं
-जनपद में 144 छोटी-बड़ी गोशालाएं हैं, जिसमें 34,968 से अधिक पशु संरक्षित हैं। वहीं, 13302 से अधिक पशु सुपुर्दी में दिए गए हैं। औरंगाबाद व समैसा गांव की गोशाला शुरू होने से संरक्षित होने वाले पशुओं की संख्या बढ़ जाएगी।