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‘ये मुल्क शहीदों की चिताओं पर टिका है’
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 27 Oct 2016 11:05 PM IST
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kavi
- फोटो : amar ujala
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- दशहरा मेला में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
एतिहासिक दशहरा मेला के सांस्कृतिक मंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें देश भर से आए जाने माने कवियों ने अपनी रचनाओं से काव्य की रसधार बहाई। कवि सम्मेलन में यूं तो सभी रसों की रचनाएं पढ़ी गईं, लेकिन इस बार वीर रस की प्रधानता रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद अजय मिश्र टेनी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गजेंद्र गजानन की अध्यक्षता में हुए इस कवि सम्मेलन का संचालन अशोक सुंदरानी ने किया।
कवि सम्मेलन की शुरुआत पदमिनी शर्मा ने वाणी वंदना पेश कर की। इसके बाद युवा कवि प्रख्यात मिश्र ने कहा ‘बजरंगी ने दानव के दल का फिर से संहार किया, तुमने अठारह मारे थे हमने अड़तीस को मार दिया’ गौरव चौहान ने गर्जना करते हुए कहा-‘ना ही किसी मजहब के खुदाओं पे टिका है, ये मुल्क शहीदों की चिताओं पर टिका है’ भारत मां की जय बोलने वाले का विरोध करने वालों को जवाब देते हुए अशोक सुंदरानी ने कहा ‘भारत माता की जय सिर्फ वही लोग नहीं बोलते, जिनके मां बाप का कोई ठिकाना नहीं होता।’
पद्मिनी शर्मा ने पढ़ा ‘हंसते हुए बचपन का नगर छोड़ के आई, तेरे लिए मां बाप का नगर छोड़ के आई।’ अंशु प्रिया ने खीरी जिले के श्रोताओं को सराहा ‘ता उम्र इसे रखूंगी दिल में सजाकर, जो प्यार आपकी महफिल में मिला है।’ सदाबहार गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना अपने गीतों से श्रोताओं के दिलों पर दस्तक दी ‘आपके नाम ने ही बंद हिचकियां कर दीं, धूप के हाथ पर पानी की बदलियां रख दीं।’ ओज के कवि वेदव्रत बाजपेयी ने केंद्रीय नेतृत्व को भी सलाह दी ‘सावधान रहना शरीफ की टेढ़ी मेढ़ी चालों से, उससे भी ज्यादा खतरा है घर के देश दलालों से। फूल चढ़ाने चले न जाना फिर जिन्ना के चरणों में, एक मिनट में गिर जाओगे एक अरब की नजरों से।’
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इनके अलावा फारूक सरल, अनिल अमल, गजेंद्र गजानन, कुलदीप समर, जयकुमार रुसवा, पदम अलबेला, रमेश रंजन और पीयूष नागाइच ने भी काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, ईओ अवनींद्र कुमार, राज कुमार त्रिवेदी, डॉ. अजय पांडेय, अशोक तोलानी, जोगेंदर सिंह चावला, डॉ. सर्वेश त्रिपाठी, तुलसी राम भार्गव, सत्येंद्र द्विवेदी, शाश्वत अभिषेक, डॉ. आलोक, ज्ञानेंद्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी, राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक आदि मौजूद रहे।
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एतिहासिक दशहरा मेला के सांस्कृतिक मंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें देश भर से आए जाने माने कवियों ने अपनी रचनाओं से काव्य की रसधार बहाई। कवि सम्मेलन में यूं तो सभी रसों की रचनाएं पढ़ी गईं, लेकिन इस बार वीर रस की प्रधानता रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद अजय मिश्र टेनी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गजेंद्र गजानन की अध्यक्षता में हुए इस कवि सम्मेलन का संचालन अशोक सुंदरानी ने किया।
कवि सम्मेलन की शुरुआत पदमिनी शर्मा ने वाणी वंदना पेश कर की। इसके बाद युवा कवि प्रख्यात मिश्र ने कहा ‘बजरंगी ने दानव के दल का फिर से संहार किया, तुमने अठारह मारे थे हमने अड़तीस को मार दिया’ गौरव चौहान ने गर्जना करते हुए कहा-‘ना ही किसी मजहब के खुदाओं पे टिका है, ये मुल्क शहीदों की चिताओं पर टिका है’ भारत मां की जय बोलने वाले का विरोध करने वालों को जवाब देते हुए अशोक सुंदरानी ने कहा ‘भारत माता की जय सिर्फ वही लोग नहीं बोलते, जिनके मां बाप का कोई ठिकाना नहीं होता।’
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पद्मिनी शर्मा ने पढ़ा ‘हंसते हुए बचपन का नगर छोड़ के आई, तेरे लिए मां बाप का नगर छोड़ के आई।’ अंशु प्रिया ने खीरी जिले के श्रोताओं को सराहा ‘ता उम्र इसे रखूंगी दिल में सजाकर, जो प्यार आपकी महफिल में मिला है।’ सदाबहार गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना अपने गीतों से श्रोताओं के दिलों पर दस्तक दी ‘आपके नाम ने ही बंद हिचकियां कर दीं, धूप के हाथ पर पानी की बदलियां रख दीं।’ ओज के कवि वेदव्रत बाजपेयी ने केंद्रीय नेतृत्व को भी सलाह दी ‘सावधान रहना शरीफ की टेढ़ी मेढ़ी चालों से, उससे भी ज्यादा खतरा है घर के देश दलालों से। फूल चढ़ाने चले न जाना फिर जिन्ना के चरणों में, एक मिनट में गिर जाओगे एक अरब की नजरों से।’
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इनके अलावा फारूक सरल, अनिल अमल, गजेंद्र गजानन, कुलदीप समर, जयकुमार रुसवा, पदम अलबेला, रमेश रंजन और पीयूष नागाइच ने भी काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, ईओ अवनींद्र कुमार, राज कुमार त्रिवेदी, डॉ. अजय पांडेय, अशोक तोलानी, जोगेंदर सिंह चावला, डॉ. सर्वेश त्रिपाठी, तुलसी राम भार्गव, सत्येंद्र द्विवेदी, शाश्वत अभिषेक, डॉ. आलोक, ज्ञानेंद्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी, राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक आदि मौजूद रहे।