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अधिकांश पीएचसी का हाल बेहाल, दवाएं हैं न स्टाफ

Wed, 22 Sep 2021 01:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 22 Sep 2021 01:17 AM IST
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The condition of most of the PHCs is poor, there are no medicines and no staff
जिला अस्पताल में ओपीडी का पर्चा बनवाते मरीज। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

मजबूरी में लोग इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल का कर रहे रुख

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लखीमपुर खीरी। जिले में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप जारी है। बावजूद इसके अधिकांश पीएचसी पर न तो डॉक्टरों की तैनाती और न ही अन्य स्टाफ की। दवाएं भी नहीं हैं। मजबूरी में लोग इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल का रुख कर रहे हैं। हालांकि वहां की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है। लोग बाहर की दवाएं लेने को मजबूर हैं।
गोला गोकर्णनाथ। कुंभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन ब्लॉक में पांच अतिरिक्त पीएचसी हैं। साथ ही नगर में अर्बन पीएचसी एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी है। जहां बरसों से चिकित्सकों और संसाधनों की कमी है। इससे यह अस्पताल मरहम पट्टी सर्दी जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों का ही इलाज हो पाता है, साथ ही यह अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं।
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मझगईं। पीएचसी अधीक्षक डॉ. लक्ष्मीचंद शर्मा ने बताया कि लैब टेक्नीशियन, बेसिक हेल्थ वर्कर फीमेल का पद रिक्त है। बजट न मिलने के कारण गंदगी और जलभराव है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। बजट मिलते ही जलभराव की समस्या दूर करा दी जाएगी।
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निघासन। सीएचसी तिकुनिया क्षेत्र में छेदुईपतिया, मूड़ाबुजुर्ग सहित पांच पीएचसी हैं। इन पीएचसी पर एक-एक डॉक्टर है, जबकि अन्य स्टाफ न होने से मरीजों को समस्या होती है। उधर, दवाओं का भी अभाव है। इस कारण डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखते हैं। इससे मरीजों को महंगी दवाइयां लेनी पड़ती हैं।

सिर्फ फार्मासिस्ट के सहारे चल रहीं दो पीएचसी

मितौली। सीएचसी के अंतर्गत पीएचसी संडीलवा, ककरहा, कल्लुआमोती व चुरईपुरवा सहित चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आते हैं। कहने को तो चार-चार पीएचसी सेंटर हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं नाम मात्र की ही हैं। पीएचसी कल्लुअमोती में दो डॉक्टरों सहित सात का स्टाफ है, जिसमें से एक महिला डॉक्टर चाइल्ड केयर लीव पर है, वहीं दूसरे डॉक्टर की मितौली सीएचसी पर तैनाती है। ऐसे में तीन माह से पीएचसी फार्मासिस्ट के सहारे चल रही है। इसी वजह से मरीजों को प्रशिक्षित का सहारा लेना पड़ रहा है। उधर, पीएचसी चुरईपुरवा में एक डॉक्टर सहित पांच का स्टाफ है। बताते हैं कि पीएचसी पर तैनात डॉक्टर संजय वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। इसी वजह से पीएचसी पर कोई डॉक्टर नहीं है। सिर्फ फार्मासिस्ट पीएचसी चला रहे हैं। यहां भी लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। पीएचसी ककरहा पर दो डॉक्टर सहित पांच का स्टाफ है। पीएचसी संडीलवा पर एक डॉक्टर सहित छह लोग हैं। सीएचसी अधीक्षक मितौली डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि सीएचसी व पीएचसी पर डॉक्टरों की कमी है। सीएमओ साहब से दो डॉक्टर सीएचसी मितौली एवं एक की कल्लुअमोती पीएचसी व एक डॉक्टर चुरईपुरवा पीएचसी के लिए मांग की है। जल्द ही पीएचसी पर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया जाएगा।

पीएचसी में रात को नहीं रुकते डॉक्टर

पलियाकलां। सीएचसी के अंतर्गत छह पीएचसी, खजुरिया, संपूर्णानगर, विशेनपुरी, मझगईं, गौरीफंटा, परसिया हैं। खजुरिया व विशेनपुरी में रात में इलाज की सुविधा नहीं है। वहीं अन्य पीएचसी पर स्टाफ नर्स व महिला चिकित्सक की कमी है। यहां तक कि क्षेत्र की लगभग सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लैब टेक्नीशियन भी नहीं है। जिसके चलते वहां की लैब भी केवल नाममात्र के लिए ही मौजूद है। दवाओं की अगर बात करें तो बुखार, खांसी, जुकाम समेत आम बीमारियों की दवाएं तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध हैं, लेकिन वह भी कम मात्रा में है।
इलाके के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को भर्ती करने के लिए वार्ड तो मौजूद हैं, लेकिन मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। मजबूरी में वह पलिया या फिर अन्य अस्पतालों के चक्कर लगाने को विवश होते हैं।
विशेनपुरी व परसिया का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बिना फार्मासिस्ट के ही चल रहा है, यहां चिकित्सक तो हैं, लेकिन वह ही केवल स्टाफ के सहारे फार्मासिस्ट का कार्य भी देखने को मजबूर है। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्थाओं के कारण ज्यादातर मरीज प्राइवेट अस्पताल या फिर जिले का रुख करने के लिए विवश होते हैं।

दो पीएचसी में फार्मासिस्ट नहीं हैं, जबकि अन्य में लैब टेक्नीशियन नहीं है। इसके लिए पत्राचार किया गया है। स्टाफ की हर जगह कमी है जिसको लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। - डॉ. हरेंद्र नाथ वरुण, अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पलिया

पीएचसी खीरी: 70 हजार की आबादी पर एक डॉक्टर

खीरी टाउन। कस्बे की 70 हजार आबादी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक डॉक्टर तैनात है। वहीं महिला डॉक्टर तक नहीं है, जबकि पीएचसी में जच्चा-बच्चा के लिए कमरा है। अव्यवस्थाओं के चलते स्टाफ से लेकर मरीजों को पाने के लिए पानी तक नहीं मिलता, क्योंकि पानी की टंकी का मोटर खराब पड़ा है। वहीं डॉक्टर की ड्यूटी अन्य जगहों पर लगाकर मरीजों की फार्मासिस्ट के सहारे छोड़ दिया जाता है। प्रभारी डॉ. ताजुद्दीन ने बताया कि गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल भेज दिया जाता है। संवाद

दो माह से गायब हैं डॉ. दीपक अग्रवाल

बिजुआ। सीएचसी पडरिया तुला में आयुष डॉ. राजेश कुमार एवं एमबीबीएस डॉ. दीपक अग्रवाल की तैनाती है। मगर, डॉ. दीपक अग्रवाल ने करीब दो माह पहले ज्वाइनिंग की थी, तब से अस्पताल नहीं लौटे हैं। संवाद

सिर्फ एक डॉक्टर के सहारे चल रही पीएचसी झाऊपुर

ममरी। करीब 20000 की आबादी और 28 मजरे वाली ग्राम पंचायत लंदनपुर ग्रंट के लोगों को चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के लिए झाऊपुर में पीएचसी है। मगर, कर्मचारियों का टोटा है। प्रधानपति आलोक जायसवाल ने बताया कि पीएचसी में सिर्फ डॉ. एके शुक्ला हैं। न तो फार्मासिस्ट है और न ही वार्ड ब्वाय और चपरासी। उन्होंने बताया कि लैब असिस्टेंट अरविंद कुमार वर्मा को सीएचसी बांकेगंज और एएसनएम को कोविड-19 सेंटर से अटैच कर रखा है। संवाद

जिले में स्थिति

  • सीएचसी-16
  • पीएचसी- 60
  • उपकेंद्र-385
  • हेल्थ वेलनेस सेंटर-105

पीएचसी से लेकर सीएचसी और जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा मिले। इसके लिए हर संभव प्रयास जारी है। दवाओं की कमी के बारे में जानकारी नहीं है और न ही किसी ने इसके बाबत किसी ने बताया ही। इसे दिखाकर जल्छ ही दवाओं की कमी दूर कराई जाएगी। - डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ

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