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Lakhimpur Kheri News: बजट से ट्रॉमा सेंटर को मिल सकती है संजीवनी
Sun, 01 Feb 2026 11:22 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:22 PM IST
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ओयल स्थित बना ट्राॅमा सेंटर। फाइल फोटो
लखीमपुर खीरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए सभी जिलों में इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर खोले जाने की भी योजना को बजट में स्थान दिया है। हालांकि, जिले के ओयल में ट्राॅमा सेंटर संचालित है लेकिन बजट के अभाव में वह बदहाली से जूझ रहा है। बजट मिलने के बाद ट्राॅमा सेंटर को संजीवनी मिलने की आस लोगों में जगी है।
करीब दो करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2018 में ओयल में 20 बेड का ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार हुआ था। करीब तीन साल तक स्टाफ व संसाधन के अभाव में यह बंद रहा। काफी दिक्कतों के बाद ट्राॅमा सेंटर को 19 फरवरी, 2021 में मरीजों के लिए चालू कराया गया था लेकिन चिकित्सकों, स्टाफ, जांच व व्यवस्थाओं की कमी के कारण इसकी हालत आज भी दयनीय है।
ट्राॅमा सेंटर में बिजली के लिए अलग से कोई लाइन नहीं है। कस्बे में आई विद्युत लाइन से ही अस्पताल को बिजली दी जाती है। लाइट जाते ही मरीजों को यहां दिक्कत झेलनी पड़ती है। जांच के लिए यहां कुछ मशीनें तो लगाई गईं लेकिन वह अब काम ही नहीं कर रही हैं। एक्स-रे, अल्ट्रासांउड, सीटी स्कैन, कंप्यूटेड रेडियोग्राफी (सीआर) सहित कई अन्य महत्वपूर्ण जांचें यहां नहीं हो पा रही हैं। यहां सिर्फ एचआईवी, मलेरिया, टायफाइड सहित किट से होने वाली सामान्य जांचें ही हो पाती हैं। जांच न होने से मरीजों को जिला अस्पताल या प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ता है।
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करीब दो करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2018 में ओयल में 20 बेड का ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार हुआ था। करीब तीन साल तक स्टाफ व संसाधन के अभाव में यह बंद रहा। काफी दिक्कतों के बाद ट्राॅमा सेंटर को 19 फरवरी, 2021 में मरीजों के लिए चालू कराया गया था लेकिन चिकित्सकों, स्टाफ, जांच व व्यवस्थाओं की कमी के कारण इसकी हालत आज भी दयनीय है।
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ट्राॅमा सेंटर में बिजली के लिए अलग से कोई लाइन नहीं है। कस्बे में आई विद्युत लाइन से ही अस्पताल को बिजली दी जाती है। लाइट जाते ही मरीजों को यहां दिक्कत झेलनी पड़ती है। जांच के लिए यहां कुछ मशीनें तो लगाई गईं लेकिन वह अब काम ही नहीं कर रही हैं। एक्स-रे, अल्ट्रासांउड, सीटी स्कैन, कंप्यूटेड रेडियोग्राफी (सीआर) सहित कई अन्य महत्वपूर्ण जांचें यहां नहीं हो पा रही हैं। यहां सिर्फ एचआईवी, मलेरिया, टायफाइड सहित किट से होने वाली सामान्य जांचें ही हो पाती हैं। जांच न होने से मरीजों को जिला अस्पताल या प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ता है।
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