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जंगल के किनारे खेत में मिला मादा तेंदुए का शव

Tue, 09 Mar 2021 12:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 09 Mar 2021 12:53 AM IST
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The body of a female leopard found in a farm on the edge of a forest
लखीमपुर के धौरहरा में जंगल किनारे खेत मे मिला तेंदुआ शावक का शव। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

वन कर्मियों ने किया हिंसक वन्यजीव के हमले से मादा तेंदुए की मौत का दावा
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लगातार वन्य जीवों के मिल रहे शव से कटघरे में आया वन विभाग

धौरहरा। दुधवा टाइगर रिजर्व की मटेरा बीट के समीप एक मादा तेंदुए का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंचे वन कर्मियों ने हिंसक वन्यजीव के हमले से मादा तेंदुए की मौत का दावा किया है।
सोमवार को वन रेंज धौरहरा के हौकना मटेरा के किनारे स्थित जंगल से 50 मीटर की दूरी पर पट्टू गोसाई निवासी गोसायिनपुरवा मजरा कफारा के खेत मेें ग्रामीणों ने अपराह्न में मादा तेंदुआ का शव पड़ा देखा। शव देखकर दहशत में आए ग्रामीणों ने वन विभाग को मामले की जानकारी दी। मौके पर पहुंचे रेंजर निघासन राममिलन, वन दारोगा सत्यप्रकाश, लकी सिंह, वन रक्षक ब्रजेश शुक्ला और वॉचर कन्हैया आदि ने शव को अपने कब्जे में ले लिया। मौके पर मौजूद वन दरोगा ऋषभ प्रताप सिंह ने दावा किया कि हिंसक वन्यजीवों के आपसी संघर्ष के चलते मौत होने की आशंका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का पता चल पाएगा। फिलहाल क्षेत्र में गश्त तेज कर प्रत्येक पहलू पर जांच की जा रही है।
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सोमवार को करीब दोपहर तीन बजे मादा तेंदुआ का शव मिलने की सूचना मिलने पर वनकर्मियों की टीम मौके पर भेजी गई थी। प्रथम दृष्टया तेंदुए की मृत्यु किसी अन्य हिंसक वन्यजीव से आपसी संघर्ष के कारण हुई प्रतीत होती है। मृत तेंदुए का आईवीआरआई बरेली में पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। - डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन

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बाघ की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई नहीं, अब तेंदुए का शव मिला

धौरहरा। दुधवा टाइगर वन प्रभाग की धौरहरा वन रेंज में सोमवार को मादा तेंदुआ का शव मिलने से जहां ग्रामीण दहशत में है, वहीं वन अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे वन अधिकारियों ने शव देख कर, प्रथम दृष्टया तेंदुआ की मौत भले ही आपसी संघर्ष में होने का दावा किया हो, लेकिन लगातार वन्यजीवों के मिल रहे शव की घटनाओं ने वन विभाग को कटघरे लाकर जरूर खड़ा कर दिया है।
पिछले कई माह से जंगल से निकल कर परौरी क्षेत्र में पहुंचे हिंसक तेंदुआ द्वारा कई मवेशियों का शिकार करने के कारण विगत दो माह से क्षेत्र में दहशत का माहौल था। जंगल से वन्य जीवों का ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ रुख करने का शिकारियों द्वारा फायदा उठाना भी बीती घटना से साफ हो चुका है। वन अधिकारी तेंदुए की मौत को दो हिंसक वन्य जीवों के आपसी संघर्ष को बता रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में गश्त तेज कर अन्य पहलुओं की जांच की बात हिंसक वन्यजीवों के संघर्ष की बात को धुंधली कर रही है। अब तेंदुए की मौत के पीछे कहीं किसी शिकारी की साजिश है अथवा उसकी सामान्य मौत हुई है, यह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चल पाएगा। लेकिन, मटेरा क्षेत्र के लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं।

दो मार्च को खीरी जिले के मोहम्मदी वन रेंज के डोकरपुर गांव के समीप बाघ और सुअर की मौत मामले में शिकारियों के जाल की पुष्टि होने और मामले में कई लोगों पर कार्रवाई होने पर मटेरा क्षेत्र के लोगों में भी दहशत का माहौल है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि, एक हफ्ता बीतने के बाद बाघ की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक नहीं आई है, जबकि उससे पहले ही एक और तेंदुए का शव मिल गया है। ऐसे में वन विभाग की कार्यशैली सवालों से घिरती नजर आ रही है।
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