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Lakhimpur Kheri News: खून की कमी से जूझ रहा जिला अस्पताल का ब्लड बैंक
Fri, 13 Jun 2025 12:28 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 13 Jun 2025 12:28 AM IST
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की कमी है। कई ब्लड ग्रुप ऐसे हैं, जो काफी समय से यहां न के बराबर हैं। इसमें निगेटिव ब्लड ग्रुप का खून सबसे कम है।
तीमारदारों को इस ग्रुप का खून प्राइवेट ब्लड बैंक या सीतापुर से लाना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लोग रक्तदान को लेकर जागरूक नहीं है। ऐसे में दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन तकरीबन 12 सौ से 15 सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी रहती है। यहां भर्ती कई मरीजों को ब्लड की जरूरत पड़ती है। ब्लड बैंक में एबी निगेटिव का सिर्फ एक यूनिट ब्लड बचा है, जबकि एबी पॉजीटिव दो यूनिट है। अन्य ब्लड ग्रुप भी काफी कम है।
ब्लड बैंक से महिला जिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती, लावारिस मरीज, कैदी, एनिमिया के मरीजों सहित अन्य गंभीर रोगियों को रक्त दिया जाता है। वर्तमान में इन दोनों ग्रुप के ब्लड न होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ब्लड की जरूरत के लिए तीमारदारों को प्राइवेट ब्लड बैंक या पड़ोसी जनपद सीतापुर का सहारा लेना पड़ रहा है।
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जून से लेकर नवंबर तक डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रमण बीमारियां पैर पसारने लगती हैं। इससे शरीर में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। इसलिए मरीजों को प्लेटलेट्स की भी आवश्यकता होती है। ब्लड बैंक में रक्त के कम होने से प्लाज्मा तैयार होना मुश्किल हो जाता है। अभी से ब्लड बैंक में रक्त की कमी है। इसलिए आपातकाल में स्थिति भयावह हो सकती है।
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इस ब्लड के इतने बचे हैं यूनिट
ब्लड ग्रुप यूनिट
ए पॉजिटिव 8
बी पॉजिटिव 5
एबी पॉजिटिव 2
ओ पॉजिटिव 36
ए निगेटिव 2
बी निगेटिव 3
एबी निगेटिव 1
ओ निगेटिव 3
(12 जून तक कुल 60 यूनिट रक्त बचा)
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निगेटिव ब्लड ग्रुप के रक्तदाता कम ही मिल पाते हैं। इसलिए इस रक्त की कमी रहती है। हालांकि, बीच-बीच में कैंप लगवाया जाता है, जिससे ब्लड बैंक में खून की कमी न हो।
डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल
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तीमारदारों को इस ग्रुप का खून प्राइवेट ब्लड बैंक या सीतापुर से लाना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लोग रक्तदान को लेकर जागरूक नहीं है। ऐसे में दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन तकरीबन 12 सौ से 15 सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी रहती है। यहां भर्ती कई मरीजों को ब्लड की जरूरत पड़ती है। ब्लड बैंक में एबी निगेटिव का सिर्फ एक यूनिट ब्लड बचा है, जबकि एबी पॉजीटिव दो यूनिट है। अन्य ब्लड ग्रुप भी काफी कम है।
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ब्लड बैंक से महिला जिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती, लावारिस मरीज, कैदी, एनिमिया के मरीजों सहित अन्य गंभीर रोगियों को रक्त दिया जाता है। वर्तमान में इन दोनों ग्रुप के ब्लड न होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ब्लड की जरूरत के लिए तीमारदारों को प्राइवेट ब्लड बैंक या पड़ोसी जनपद सीतापुर का सहारा लेना पड़ रहा है।
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जून से लेकर नवंबर तक डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रमण बीमारियां पैर पसारने लगती हैं। इससे शरीर में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। इसलिए मरीजों को प्लेटलेट्स की भी आवश्यकता होती है। ब्लड बैंक में रक्त के कम होने से प्लाज्मा तैयार होना मुश्किल हो जाता है। अभी से ब्लड बैंक में रक्त की कमी है। इसलिए आपातकाल में स्थिति भयावह हो सकती है।
इस ब्लड के इतने बचे हैं यूनिट
ब्लड ग्रुप यूनिट
ए पॉजिटिव 8
बी पॉजिटिव 5
एबी पॉजिटिव 2
ओ पॉजिटिव 36
ए निगेटिव 2
बी निगेटिव 3
एबी निगेटिव 1
ओ निगेटिव 3
(12 जून तक कुल 60 यूनिट रक्त बचा)
निगेटिव ब्लड ग्रुप के रक्तदाता कम ही मिल पाते हैं। इसलिए इस रक्त की कमी रहती है। हालांकि, बीच-बीच में कैंप लगवाया जाता है, जिससे ब्लड बैंक में खून की कमी न हो।
डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल