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पशुओं में दूध की मात्रा घटा रहा ‘थनैला’ रोग
बांकेगंज।
Updated Sat, 07 Mar 2015 11:58 PM IST
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दुधारू पशुओं में थनैला रोग तेजी से बढ़ रहा है। इस रोग से पीड़ित पशु दूध देना कम कर देता है। स्तनधारी पशुओं में यह रोग मुख्यत: साफ-सफाई में कमी की वजह से होता है। गंदगी के विषाणु दुधारू पशुओं में थनैला रोग पैदा करते हैं।
बांकेगंज पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक रविकांत वर्मा का कहना है कि तराई क्षेत्र के पशुपालकों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। उन्हें देखना होगा कि कहीं पशु का दूध कम तो नहीं हो रहा है। जानकार लोगों की माने तो जिले में करीब 15 फीसदी दुधारू पशु थनैला रोग के शिकार हैं। यह रोग दुधारू पशुओं में कई किस्म के विषाणुओं से होता है। सामान्यत: दूध देने देने वाले पशु के बांधने के स्थान पर गंदगी रहने से यह रोग होता है। गंदगी में बैठने के कारण थनों के माध्यम से विषाणु पशु के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। गंदे हाथों से दुहन करने से भी संक्रमण होता है।
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थनैला रोग के लक्षण
इस रोग से प्रभावित दुधारू पशु के दूध में खून आने लगता है। थनों में गांठ और सूजन के साथ ही उसके दूध उत्पादन में कमी हो जाती है। दूध पतला और फटा हुआ निकलता है। पीड़ित पशु को बुखार भी हो सकता है।
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ऐसे करें रोकथाम
इस रोग की रोकथाम के लिए पशुओं को साफ-सुथरी जगह पर बांधे। दूध निकालने से पहले हाथों को साबुन से धोएं। दूध निकालने के बाद पशुओं को आधे घंटे तक बैठने नहीं देना चाहिए।
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दुधारू पशु मनुष्य को स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में दूध देता है। पशु पालक को परिवार के सदस्य की तरह उसकी देखभाल करनी चाहिए। उसके बैठने का स्थान साफ-सुथरा हो। इससे उन्हें रोगों से बचाया जा सकता है। थनैला रोग दुधारू पशुओं की बड़ी समस्या है। रोग होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
-डॉ. रविकांत वर्मा, पशु चिकित्सा अधिकारी, बांकेगंज
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बांकेगंज पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक रविकांत वर्मा का कहना है कि तराई क्षेत्र के पशुपालकों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। उन्हें देखना होगा कि कहीं पशु का दूध कम तो नहीं हो रहा है। जानकार लोगों की माने तो जिले में करीब 15 फीसदी दुधारू पशु थनैला रोग के शिकार हैं। यह रोग दुधारू पशुओं में कई किस्म के विषाणुओं से होता है। सामान्यत: दूध देने देने वाले पशु के बांधने के स्थान पर गंदगी रहने से यह रोग होता है। गंदगी में बैठने के कारण थनों के माध्यम से विषाणु पशु के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। गंदे हाथों से दुहन करने से भी संक्रमण होता है।
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थनैला रोग के लक्षण
इस रोग से प्रभावित दुधारू पशु के दूध में खून आने लगता है। थनों में गांठ और सूजन के साथ ही उसके दूध उत्पादन में कमी हो जाती है। दूध पतला और फटा हुआ निकलता है। पीड़ित पशु को बुखार भी हो सकता है।
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ऐसे करें रोकथाम
इस रोग की रोकथाम के लिए पशुओं को साफ-सुथरी जगह पर बांधे। दूध निकालने से पहले हाथों को साबुन से धोएं। दूध निकालने के बाद पशुओं को आधे घंटे तक बैठने नहीं देना चाहिए।
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दुधारू पशु मनुष्य को स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में दूध देता है। पशु पालक को परिवार के सदस्य की तरह उसकी देखभाल करनी चाहिए। उसके बैठने का स्थान साफ-सुथरा हो। इससे उन्हें रोगों से बचाया जा सकता है। थनैला रोग दुधारू पशुओं की बड़ी समस्या है। रोग होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
-डॉ. रविकांत वर्मा, पशु चिकित्सा अधिकारी, बांकेगंज