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शिक्षकों के पद खाली, छात्र कैसे बनेंगे मेधावी
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Teachers' posts are vacant, how will students become meritorious
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388 के सापेक्ष बालक एवं बालिका स्कूलों में 197 शिक्षक हैं तैनात
जिले में 51 विद्यालय, 27 छात्रों के और 24 छात्राओं के लिए
विद्यालयों में कुल 8,788 छात्र-छात्राओं का है नामांकन
लखीमपुर खीरी। राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई की स्थिति बेहद चिंता जनक है। इन स्कूलों में पढ़ने के लिए छात्र-छात्राएं तो हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षकों का अभाव है। जिले के राजकीय स्कूलों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष करीब 50 प्रतिशत पद खाली हैं। ऐेसे में छात्रों को मेधावी बनाने की बात दूर उन्हें बेहतर शिक्षा दे पाना ही शिक्षकों के सामने चुनौती है।
जिले में 51 राजकीय विद्यालय हैं। इसमें 27 छात्रों के लिए और 24 छात्राओं के लिए। इन दोनों प्रकार के विद्यालयों में अब तक 8,788 छात्र-छात्राओं का ही नामांकन है। इन छात्रों को पढ़ाने के लिए विद्यालयों में 388 शिक्षक-शिक्षिकाओं के पद स्वीकृत हैं। मगर, तैनाती सिर्फ 197 की है। 191 पद रिक्त पड़े हैं। ये हालात तब हैं जब प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा अभियान चला रहा है।
बता दें कि छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए जिले में राजकीय हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेज खोले गए। बताते हैं कि शुरुआती दौर में पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था थी, लेकिन बाद में कुछ का स्थानांतण होने और कुछ के रिटायर होने से स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई।
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- राजकीय इंटर कॉलेज में पंजीकृत छात्र-छात्राएं - 5,236
- राजकीय हाईस्कूल में नौ व दस में पंजीकृत छात्र छात्राएं - 3,552
राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों अवगत कराया जाता है। पिछले दिनों में कुछ शिक्षक मिले भी हैं। सीमित संसाधनों में शिक्षक बेहतर परिणाम दे भी रहे हैं। इसका प्रयास आगे भी जारी रहेगा, जिसका प्रमाण अगले साल के रिजल्ट में देखने को मिलेगा।
- डॉ. अमरकांत सिंह, डीआईओएस
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जिले में 51 विद्यालय, 27 छात्रों के और 24 छात्राओं के लिए
विद्यालयों में कुल 8,788 छात्र-छात्राओं का है नामांकन
लखीमपुर खीरी। राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई की स्थिति बेहद चिंता जनक है। इन स्कूलों में पढ़ने के लिए छात्र-छात्राएं तो हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षकों का अभाव है। जिले के राजकीय स्कूलों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष करीब 50 प्रतिशत पद खाली हैं। ऐेसे में छात्रों को मेधावी बनाने की बात दूर उन्हें बेहतर शिक्षा दे पाना ही शिक्षकों के सामने चुनौती है।
जिले में 51 राजकीय विद्यालय हैं। इसमें 27 छात्रों के लिए और 24 छात्राओं के लिए। इन दोनों प्रकार के विद्यालयों में अब तक 8,788 छात्र-छात्राओं का ही नामांकन है। इन छात्रों को पढ़ाने के लिए विद्यालयों में 388 शिक्षक-शिक्षिकाओं के पद स्वीकृत हैं। मगर, तैनाती सिर्फ 197 की है। 191 पद रिक्त पड़े हैं। ये हालात तब हैं जब प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा अभियान चला रहा है।
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बता दें कि छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए जिले में राजकीय हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेज खोले गए। बताते हैं कि शुरुआती दौर में पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था थी, लेकिन बाद में कुछ का स्थानांतण होने और कुछ के रिटायर होने से स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई।
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- राजकीय इंटर कॉलेज में पंजीकृत छात्र-छात्राएं - 5,236
- राजकीय हाईस्कूल में नौ व दस में पंजीकृत छात्र छात्राएं - 3,552
राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों अवगत कराया जाता है। पिछले दिनों में कुछ शिक्षक मिले भी हैं। सीमित संसाधनों में शिक्षक बेहतर परिणाम दे भी रहे हैं। इसका प्रयास आगे भी जारी रहेगा, जिसका प्रमाण अगले साल के रिजल्ट में देखने को मिलेगा।
- डॉ. अमरकांत सिंह, डीआईओएस