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48 घंटे बाद भी एसएसबी जवान की आत्महत्या के कारणों का नहीं पता चला
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मृतक के पैतृक घर में रोते-बिलखते परिजन व साथ में खड़ा मृतक जवान का पुत्र।
- फोटो : LAKHIMPUR
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संपूर्णानगर-पलिया। संपूर्णानगर की मिर्चिया समवाय कंपनी में तैनात एसएसबी जवान सुरेंद्र यादव की खुदकुशी की गुत्थी घटना के 48 घंटे बाद भी नहीं सुलझ सकी है। बृहस्पतिवार देर शाम एसएसबी जवान सुरेंद्र यादव ने शौचालय में गला रेतकर खुदकुशी कर ली थी। घटना के बाद पहुंचे डीआईजी एसएसबी की मौजूदगी के बावजूद अब तक जवान की खुदकुशी के कारणों का पता नहीं चला है। उधर, शनिवार को मृतक जवान का शव उनके पैतृक गांव बैथल, थाना रेनवाल, तहसील फुलेरा जिला जयपुर (राजस्थान) पहुंचा, जहां उनका गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
गांव बैथल निवासी 34 वर्षीय सुरेंद्र कुमार यादव पुत्र भंवर लाल 39वीं वाहिनी की मिर्चिया समवाय में मेस कमांडर के सहायक के रूप में कार्यरत थे। बीती बृहस्पतिवार को कंपनी के शौचालय में जाकर जवान ने अपना गला चाकू से रेतकर आत्महत्या कर ली थी। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम के बाद पैतृक गांव भेज दिया था। जहां शनिवार को गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए ससम्मान शव का दोपहर बाद अंतिम संस्कार किया गया।
इसमें एसएसबी के साथी जवानों के साथ ही ग्रामीणों ने श्रद्धांजलि दी। मृतक जवान के परिजन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। उधर, आत्महत्या का कारण जानने के लिए एसएसबी के पीलीभीत डीआईजी अजय कुमार, एसएसबी कमांडेंट मुन्ना सिंह समेत बड़े अधिकारियों की टीम लगी हुई है, लेकिन अभी तक आत्महत्या की गुत्थी सुलझाई नहीं जा सकी है।
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तीन दिन पहले ही जवान ने की थी वॉल पेंटिंग
मौत के तीन दिन पूर्व ही मृतक एसएसबी जवान सुरेंद्र द्वारा बीओपी गेट पर बटालियन की साफ-सफाई करने के बाद वॉल पेंटिंग भी की थी। साथी जवानों ने बताया कि साफ-सफाई, खाना बनाने व आर्ट का रंगरोगन करने में मृतक जवान सुरेंद्र काफी निपुण थे।
अधिकारियों के फोन स्विच ऑफ
आत्महत्या को 48 घंटे का समय बीत चुका है। डीआईजी समेत आला अधिकारी एसएसबी के लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक आत्महत्या की गुत्थी को सुलझा नहीं पाए हैं। एसएसबी के सभी अधिकारी फोन स्विच ऑफ किए हुए हैं। सूत्रों की मानें तो एसएसबी गदनियां मुख्यालय पर एसएसबी अधिकारियों का डेरा लगा हुआ है और गुत्थी को हल करने में अधिकारी लगे हुए हैं।
बीओपी में शनिवार को पसरा रहा सन्नाटा
मृतक जवान सुरेंद्र मिर्चिया बीओपी में तैनात थे। इसके चलते शनिवार को बीओपी में सन्नाटा पसरा रहा। साथी जवान अभी भी सुरेंद्र की मौत से स्तब्ध हैं और हंसमुख व मिलनसार साथी सुरेंद्र की मौत हो जाने से शोक में हैं।
छुट्टी के लिए भी जवान रहते हैं परेशान
39वीं वाहिनी एसएसबी के जवानों ने दबी जुबान से बताया कि एक साल में 60 दिन का अवकाश मिलने का प्रावधान है। वर्ष में दो बार 30-30 दिन का अवकाश मिल सकता है। जवान अपने घरों से काफी दूर रहकर जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन छुट्टी लेने के लिए बटालियन के चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन मृतक जवान सुरेंद्र तो दिसंबर में ही घर गया था और 13 जनवरी को अवकाश पूरा कर वापस आ गया था। फिर इतना बड़ा कदम आखिर क्यों उठाया यह रहस्य बना हुआ है।
शौंचालय को एसएसबी ने कराया सील
एसएसबी अधिकारियों ने मृतक जवान सुरेंद्र द्वारा जिस शौचालय में आत्महत्या की गई थी। उसे सील करा दिया है। यहां तक की मीडिया को भी शौचालय दिखाने से मना किया गया है।
पुलिस ने जवान के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। इसके बाद मौत भी गला काटने से होने स्पष्ट हुई है। शौचालय का गेट अंदर से बंद था, जिसको तोड़ा गया है। इससे आत्महत्या करना जाहिर होता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि हुई है। अब आत्महत्या किन कारणों से की गई है, इसकी जांच एसएसबी की विभागीय जांच में ही सामने निकलकर आ सकती है।
-संजय नाथ तिवारी, सीओ पलिया।
एसएसबी जवान ने किन कारणों से आत्महत्या की है और इसका प्रमुख कारण क्या है। इसकी अधिकारी जांच कर रहे हैं। रही बात अंतिम संस्कार की तो परिजन ने शनिवार को अंतिम संस्कार किया है। ससम्मान गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम संस्कार किया गया है। जवान के बड़े आठ वर्षीय पुत्र धीरेंद्र सिंह ने मुखाग्नि दी है। -राकेश कुमार, एसएसबी इंस्पेक्टर मिर्चिया
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गांव बैथल निवासी 34 वर्षीय सुरेंद्र कुमार यादव पुत्र भंवर लाल 39वीं वाहिनी की मिर्चिया समवाय में मेस कमांडर के सहायक के रूप में कार्यरत थे। बीती बृहस्पतिवार को कंपनी के शौचालय में जाकर जवान ने अपना गला चाकू से रेतकर आत्महत्या कर ली थी। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम के बाद पैतृक गांव भेज दिया था। जहां शनिवार को गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए ससम्मान शव का दोपहर बाद अंतिम संस्कार किया गया।
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इसमें एसएसबी के साथी जवानों के साथ ही ग्रामीणों ने श्रद्धांजलि दी। मृतक जवान के परिजन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। उधर, आत्महत्या का कारण जानने के लिए एसएसबी के पीलीभीत डीआईजी अजय कुमार, एसएसबी कमांडेंट मुन्ना सिंह समेत बड़े अधिकारियों की टीम लगी हुई है, लेकिन अभी तक आत्महत्या की गुत्थी सुलझाई नहीं जा सकी है।
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तीन दिन पहले ही जवान ने की थी वॉल पेंटिंग
मौत के तीन दिन पूर्व ही मृतक एसएसबी जवान सुरेंद्र द्वारा बीओपी गेट पर बटालियन की साफ-सफाई करने के बाद वॉल पेंटिंग भी की थी। साथी जवानों ने बताया कि साफ-सफाई, खाना बनाने व आर्ट का रंगरोगन करने में मृतक जवान सुरेंद्र काफी निपुण थे।
अधिकारियों के फोन स्विच ऑफ
आत्महत्या को 48 घंटे का समय बीत चुका है। डीआईजी समेत आला अधिकारी एसएसबी के लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक आत्महत्या की गुत्थी को सुलझा नहीं पाए हैं। एसएसबी के सभी अधिकारी फोन स्विच ऑफ किए हुए हैं। सूत्रों की मानें तो एसएसबी गदनियां मुख्यालय पर एसएसबी अधिकारियों का डेरा लगा हुआ है और गुत्थी को हल करने में अधिकारी लगे हुए हैं।
बीओपी में शनिवार को पसरा रहा सन्नाटा
मृतक जवान सुरेंद्र मिर्चिया बीओपी में तैनात थे। इसके चलते शनिवार को बीओपी में सन्नाटा पसरा रहा। साथी जवान अभी भी सुरेंद्र की मौत से स्तब्ध हैं और हंसमुख व मिलनसार साथी सुरेंद्र की मौत हो जाने से शोक में हैं।
छुट्टी के लिए भी जवान रहते हैं परेशान
39वीं वाहिनी एसएसबी के जवानों ने दबी जुबान से बताया कि एक साल में 60 दिन का अवकाश मिलने का प्रावधान है। वर्ष में दो बार 30-30 दिन का अवकाश मिल सकता है। जवान अपने घरों से काफी दूर रहकर जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन छुट्टी लेने के लिए बटालियन के चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन मृतक जवान सुरेंद्र तो दिसंबर में ही घर गया था और 13 जनवरी को अवकाश पूरा कर वापस आ गया था। फिर इतना बड़ा कदम आखिर क्यों उठाया यह रहस्य बना हुआ है।
शौंचालय को एसएसबी ने कराया सील
एसएसबी अधिकारियों ने मृतक जवान सुरेंद्र द्वारा जिस शौचालय में आत्महत्या की गई थी। उसे सील करा दिया है। यहां तक की मीडिया को भी शौचालय दिखाने से मना किया गया है।
पुलिस ने जवान के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। इसके बाद मौत भी गला काटने से होने स्पष्ट हुई है। शौचालय का गेट अंदर से बंद था, जिसको तोड़ा गया है। इससे आत्महत्या करना जाहिर होता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि हुई है। अब आत्महत्या किन कारणों से की गई है, इसकी जांच एसएसबी की विभागीय जांच में ही सामने निकलकर आ सकती है।
-संजय नाथ तिवारी, सीओ पलिया।
एसएसबी जवान ने किन कारणों से आत्महत्या की है और इसका प्रमुख कारण क्या है। इसकी अधिकारी जांच कर रहे हैं। रही बात अंतिम संस्कार की तो परिजन ने शनिवार को अंतिम संस्कार किया है। ससम्मान गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम संस्कार किया गया है। जवान के बड़े आठ वर्षीय पुत्र धीरेंद्र सिंह ने मुखाग्नि दी है। -राकेश कुमार, एसएसबी इंस्पेक्टर मिर्चिया

लखीमपुर खीरी। एसएसबी जवान के पैतृक गांव में शव उठाकर ले जाते जवान। संवाद- फोटो : LAKHIMPUR