The Elephant Whispers: ऑस्कर विजेता फिल्म के रघु हाथी जैसी है दुधवा की 'दुर्गा' की कहानी, इरशाद ने की देखभाल
पालतू हाथियों की देखभाल करने वाले इरशाद नाम के महावत ने दुर्गा की देखरेख और पालन-पोषण किया। दुर्गा जिस समय दुधवा लाई गई थी, उसकी आयु एक माह से भी कम थी। आज वह सबकी चहेती है।
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डॉक्यूमेंट्री फिल्म द एलिफेंट व्हिस्परर्स को ऑस्कर अवार्ड मिलने के बाद लखीमपुर खीरी के दुधवा पार्क की हथिनी दुर्गा की चर्चा भी जोरों पर है। 'द एलिफेंट व्हिस्परर्स' के रघु हाथी जैसी ही दुधवा की दुर्गा की कहानी भी है। दुर्गा बिजनौर के अमानगढ़ जंगल में मां से बिछड़ गई थी। उसे वर्ष 2018 में दुधवा लाया गया था। इन हाथियों के बच्चे को कैसे महावतों ने परिपक्व बनाया, महावतों और हाथियों के बीच के रिश्ते की कहानी है 'द एलिफेंट व्हिस्पर्स' फिल्म।
दुर्गा नौ अक्तूबर 2018 के शारदीय नवरात्र में बिजनौर जिले के अमानगढ़ जंगल में मिली थी। भूखी-प्यासी मात्र एक माह की नन्ही 'दुर्गा' को वनाधिकारियों और वन कर्मियों ने देखा तो उसे अपने साथ ले आए। अमानगढ़ जंगल में उसके पालन-पोषण का कोई समुचित प्रबंध न होने के कारण वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दुर्गा को दुधवा भेज दिया। शारदीय नवरात्र में आने के कारण वनाधिकारियों ने इस नन्ही हथिनी का नाम दुर्गा रखा।
इरशाद ने की 'दुर्गा' की देखभाल
दक्षिण सोनरीपुर रेंज में पालतू हाथियों की देखभाल करने वाले इरशाद नाम के महावत को दुर्गा की देखरेख और पालन-पोषण की जिम्मेदारी सौंपी गई। दुर्गा जिस समय दुधवा लाई गई थी, उसकी आयु एक माह से भी कम थी। इसे दुधवा के पालतू मादा हाथियों के बीच रखा गया।
दुधवा के पालतू हाथियों ने भी दुर्गा को न केवल अपनाया बल्कि मां जैसा प्यार और दुलार भी दिया। लाड़-प्यार में पली दुर्गा की शरारतें सबको भाने लगी। दुधवा आने वाले सैलानियों का जब दुर्गा के बारे में पता चलता तो उसे देखने और मिलने से खुद को नहीं रोक पाते। बच्चों के साथ तो यह दुर्गा इस तरह घुलमिल जाती है कि जैसे बच्चे उसके दोस्त हों।
'दुर्गा' को दुधवा में रहते हुए पांच साल
दुर्गा हथिनी को दुधवा में रहते हुए पांच साल हो गए हैं। आठ फरवरी 2022 को दुर्गा दुधवा से दक्षिण सोनारीपुर रेंज के सलूकापुर बेस कैंप में भेजी गई। मौजूदा समय में उसे दुधवा टाइगर रिजर्व के सलूकापुर बेस कैंप में रखा गया है। डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार बताते हैं कि दुधवा भ्रमण के लिए आने वाले सैलानी खासकर बच्चे दुर्गा से मिले बिना नहीं रह पाते। कम उम्र होने के कारण दुर्गा से कोई काम नहीं लिया जाता है, बल्कि उसे प्रशिक्षण दिया जा रहा है।