UP News: पुलिस मुठभेड़ में मारे गए आजम की कहानी, 18 साल की उम्र में ही करने लगा था अपराध; गांव में था खौफ
लखीमपुर खीरी के फरधान थाना क्षेत्र में छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म करने का मुख्य आरोपी तालिब उर्फ आजम 18 साल की उम्र से ही अपराध करने लगा था। उसके खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। सोमवार सुबह लखीमपुर खीरी और सुल्तानपुर पुलिस की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मुठभेड़ में उसे मार गिराया था।
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सुल्तानपुर जिले में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी तालिब उर्फ आजम खां (26 वर्ष) ने युवा अवस्था में आते ही अपराध की दुनिया से नाता जोड़ लिया था। साल 2018 में चोरी के मामले में लखीमपुर खीरी के फरधान थाने में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी, तब उसकी उम्र 18 वर्ष थी। अपराध में संलिप्तता बढ़ने के चलते पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। ताबिल का गांव गौरिया के लोगों में इतना खौफ है कि उसके मरने के बाद भी कोई भी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।
फरधान थाना क्षेत्र में कोचिंग जा रही छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद तालिब कई दिन गांव में ही रहा। फिर भी पुलिस की नजरों से बचता रहा। ग्रामीणों के मुताबिक, तालिब ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था। हत्या, लूट, गोवध अधिनियम, गैंगस्टर, धोखाधड़ी, आर्म्स एक्ट, चोरी जैसी घटनाओं में तालिब उर्फ आजम कई बार जेल भी गया। जमानत पर छूटने के बाद भी वह नहीं सुधरा, बल्कि अपराध करने के नए-नए तरीके तलाशता रहा। शातिर तालिब अलग-अलग थाना क्षेत्रों में घटनाओं को अंजाम देकर पुलिस की नजर से ओझल हो जाता। तालिब की तलाश में पुलिस लगातार दबिश देती रही लेकिन पुलिस की कार्यशैली से रूबरू तालिब हर बार चकमा देकर भाग जाता।
तालिब पर फरधान थाने में छह, थाना खीरी में चार, नीमगांव-सदर कोतवाली में एक-एक, गोला कोतवाली में चार और एक मुकदमा मितौली थाने में दर्ज है। ग्रामीणों के मुताबिक, घटना को अंजाम देने के बाद कुछ दिन तो तालिब लापता हो जाता था लेकिन मामला शांत होते ही वह घर आ जाता था। इसकी भनक ग्रामीणों को होती थी, लेकिन दहशत के चलते कोई भी कुछ बताता नहीं था। पुलिस भी तालिब की सही लोकेशन नहीं पता लगा पाती थी।
शुरुआत से ही दबंगई करता रहता था तालिब
अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद तालिब एक के बाद एक वारदात को अंजाम देता रहा। इसके बाद वह घर और अंजान जगहों पर रहकर अगली घटना की साजिश रचता था। सूत्र बताते हैं कि पुलिस भी तालिब के शातिर दिमाग को नहीं भांप पा रही थी। तालिब पुलिस से बचने के लिए ज्यादातर समय की-पैड वाले मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था। छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के दौरान वह स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहा था। इसके चलते पुलिस ने ट्रेस कर उसे मुठभेड़ में मार गिराया।
अंतिम संस्कार में कुछ ही लोग पहुंचे
ग्रामीणों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम के बाद तालिब का शव सोमवार देर रात गांव पहुंचा था। घर में उसके कुछ परिजन ही मौजूद थे, जबकि गांव के ज्यादातर लोग मृतक तालिब की कार्यशैली से नाराज थे। मंगलवार को सुबह करीब दस बजे से पहले ही पुलिस की मौजूदगी में तालिब के शव को सुपुर्दे खाक किया गया। सीओ रमेश कुमार तिवाही ने बताया कि वह गांव गए थे। सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच तालिब का शव सुपुर्दे खाक करा दिया गया। गांव में शांति व्यवस्था कायम है।