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Lakhimpur Kheri News: स्वाद में तीखी, पर कमाई में मिठास घोल रही मिर्च की खेती
Fri, 16 Jan 2026 11:05 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 16 Jan 2026 11:05 PM IST
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अपने शिमला मिर्च के खेत में मौजूद सलामुद्दीन। संवाद
सिकंदराबाद। तीखे स्वाद वाली मिर्च की खेती क्षेत्र के कुछ किसानों की कमाई बढ़ाकर उनकी जिंदगी में आर्थिक मिठास घोलने का काम कर रही है। चीनी का कटोरा कहे जाने वाली जिले की धरती पर अब किसान परंपरागत गन्ने की खेती से हटकर इसका उत्पादन कर रहे हैं।
सिकंदराबाद के निकट ग्राम सेहरुआ निवासी सलामुद्दीन पिछले कई वर्षों से ठेके पर जमीन लेकर शिमला और पतली मिर्च उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अक्तूबर में लगाई गई शिमला मिर्च से कम से कम पांच तुड़ाई मिलती हैं। एक बीघा में चार से पांच क्विंटल तक पैदावार होती है, जिसका वर्तमान बाजार भाव करीब पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल है।
सलामुद्दीन के अनुसार, एक एकड़ में मिर्च की खेती पर लगभग 70 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि आमदनी लाखों में है। सबसे बड़ी बात यह है कि फसल का भुगतान खेत पर ही तुरंत मिल जाता है। गन्ने की खेती में न तो लाभ बचता है और न ही समय पर भुगतान मिलता है। इसी कारण वे करीब 70 बीघा जमीन ठेके पर लेकर मिर्च की खेती कर रहे हैं। वे सीमित मात्रा में आलू और टमाटर भी उगा रहे हैं।
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ग्राम सेहरुआ के मुन्ना, आरिफ, मसरूर और जियाउद्दीन जैसे किसान भी पतली मिर्च की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि मिर्च की खेती से ही उनके परिवार का पूरा खर्च चलता है और यह फसल उनके लिए आर्थिक संबल बन चुकी है।
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सिकंदराबाद के निकट ग्राम सेहरुआ निवासी सलामुद्दीन पिछले कई वर्षों से ठेके पर जमीन लेकर शिमला और पतली मिर्च उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अक्तूबर में लगाई गई शिमला मिर्च से कम से कम पांच तुड़ाई मिलती हैं। एक बीघा में चार से पांच क्विंटल तक पैदावार होती है, जिसका वर्तमान बाजार भाव करीब पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल है।
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सलामुद्दीन के अनुसार, एक एकड़ में मिर्च की खेती पर लगभग 70 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि आमदनी लाखों में है। सबसे बड़ी बात यह है कि फसल का भुगतान खेत पर ही तुरंत मिल जाता है। गन्ने की खेती में न तो लाभ बचता है और न ही समय पर भुगतान मिलता है। इसी कारण वे करीब 70 बीघा जमीन ठेके पर लेकर मिर्च की खेती कर रहे हैं। वे सीमित मात्रा में आलू और टमाटर भी उगा रहे हैं।
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ग्राम सेहरुआ के मुन्ना, आरिफ, मसरूर और जियाउद्दीन जैसे किसान भी पतली मिर्च की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि मिर्च की खेती से ही उनके परिवार का पूरा खर्च चलता है और यह फसल उनके लिए आर्थिक संबल बन चुकी है।

अपने शिमला मिर्च के खेत में मौजूद सलामुद्दीन। संवाद