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विश्व बाघ दिवस पर विशेष: बाघों की बढ़ रही आबादी, खुशी के साथ चुनौतियां भी
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दुधवा के जंगल में बाघिन की गोद में बैठे शावक। (फाइल फोटो)
- फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व देश में बाघों के सबसे खूबसूरत और महफूज आशियानों में एक है। यही कारण है कि यहां बाघों की संख्या में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है। बाघ संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों के चलते डीटीआर में बाघों की संख्या में 40 से 50 फीसदी इजाफा हुआ है। वर्ष 2014 में यहां 60 बाघ थे, जबकि 2019 की गणना के जो परिणाम आए हैं उसके अनुसार 100 से 110 बाघों के होने का अनुमान है। वहीं पूरे प्रदेश में इन पांच सालों में बाघों की कुल संख्या 90 से बढ़कर 173 पहुंच गई है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी संजय पाठक कहते हैं कि बाघों के अनुकूल वातावरण, प्राकृतिक वास, पर्याप्त भोजन और सुरक्षा मिलने से डीटीआर में बाघों की आबादी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही चुनौतियां भी बढ़ रहीं हैं। अब और अधिक मुस्तैदी से बाघों की सुरक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर का कहना है कि दुधवा के जंगल में जिस तेजी से बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है, उससे अफसर और वन कर्मियों की जिम्मेदारी कई गुना अधिक बढ़ रही है। पिछले वर्षों में शिकार आदि पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ ग्रासलैंड, वेटलैंड के लिए उचित प्रबंधन किया गया है।
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शिकार और वन्यजीव अंग तस्करी एक बड़ी चुनौती
तस्कर यूं तो बाघों के रहने का पूरा पता रखते हैं लेकिन दुधवा टाइगर रिजर्व के नेपाल सीमा पर होने के कारण यह चुनौती ज्यादा बढ़ जाती है। वन्यजीव तस्करों का नेटवर्क सर्वव्यापी है और इसे कुछ सफेदपोश लोगों का समर्थन भी मिला हुआ है। जाहिर है डीटीआर के बाघों के जीवन पर भी खतरे की तलवार लटकी हुई है।
तराई में मानव-बाघ संघर्ष भी है एक बड़ी समस्या
तराई के जंगलों में बाघ और मानवों का टकराव बढ़ रहा है। केंद्र सरकार बाघों को संरक्षित करने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर चला रही है। पिछले कुछ सालों में मानव और बाघों के बीच शुरू हुआ संघर्ष बढ़ती आबादी के साथ प्राकृतिक संपदा एवं जंगलों के दोहन और नियोजित विकास बाघों को अपना साम्राज्य छोड़ने के लिए विवश कर रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी संजय पाठक कहते हैं कि बाघों के अनुकूल वातावरण, प्राकृतिक वास, पर्याप्त भोजन और सुरक्षा मिलने से डीटीआर में बाघों की आबादी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही चुनौतियां भी बढ़ रहीं हैं। अब और अधिक मुस्तैदी से बाघों की सुरक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
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दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर का कहना है कि दुधवा के जंगल में जिस तेजी से बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है, उससे अफसर और वन कर्मियों की जिम्मेदारी कई गुना अधिक बढ़ रही है। पिछले वर्षों में शिकार आदि पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ ग्रासलैंड, वेटलैंड के लिए उचित प्रबंधन किया गया है।
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शिकार और वन्यजीव अंग तस्करी एक बड़ी चुनौती
तस्कर यूं तो बाघों के रहने का पूरा पता रखते हैं लेकिन दुधवा टाइगर रिजर्व के नेपाल सीमा पर होने के कारण यह चुनौती ज्यादा बढ़ जाती है। वन्यजीव तस्करों का नेटवर्क सर्वव्यापी है और इसे कुछ सफेदपोश लोगों का समर्थन भी मिला हुआ है। जाहिर है डीटीआर के बाघों के जीवन पर भी खतरे की तलवार लटकी हुई है।
तराई में मानव-बाघ संघर्ष भी है एक बड़ी समस्या
तराई के जंगलों में बाघ और मानवों का टकराव बढ़ रहा है। केंद्र सरकार बाघों को संरक्षित करने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर चला रही है। पिछले कुछ सालों में मानव और बाघों के बीच शुरू हुआ संघर्ष बढ़ती आबादी के साथ प्राकृतिक संपदा एवं जंगलों के दोहन और नियोजित विकास बाघों को अपना साम्राज्य छोड़ने के लिए विवश कर रहा है।