फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   So why are less migratory birds

...तो इसलिए कम हो रहे प्रवासी परिंदे

Wed, 31 Dec 2014 05:39 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Wed, 31 Dec 2014 05:39 PM IST
विज्ञापन
प्रवासी पक्षियों के लिए तराई की धरती अब पहले जैसी नहीं रही है। घटते वेटलैंड से पक्षियों के प्राकृतिक आवास विकृत हो रहे हैं और यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में हर साल कमी आ रही है। कई प्रजातियों के पक्षियों ने तो यहां आना ही बंद कर दिया है। ठंडे देशों से हजारों प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर तराई में आते हैं। तीन माह बाद फरवरी में अपने वतन लौट जाते हैं।
विज्ञापन

सर्दी के मौसम में यूरोपीय और मध्य एशियाई देशों से बड़ी संख्या में ब्राह्मनी डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, कांब डक, ग्रीव और पिलिकन आदि तराई के जलाशयों में आते रहे हैं। पिछले बीस साल से इनकी आमद नाममात्र की रह गई है। साइबेरियन क्रेन तो पिछले बीस वर्ष से यहां नहीं दिखे हैं।
विज्ञापन

वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि पिछले बीस साल में तराई के वेटलैंड एरिया में तीस से चालीस प्रतिशत की कमी आई है। आबादी के दबाव में तालाबों और झीलों पर अतिक्रमण कर खेती की जाने लगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

परिंदों के आवास प्रभावित करने वाले कारक
- फसलों में कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग
- वेटलैंड पर बढ़ता अतिक्रमण और इंसानी गतिविधियां
- तालाबों में मछली पालन और सिंघाड़े की खेती
- प्राकृतिक तालाबों का बदलता स्वरूप
- मोबाइल टावर से बढ़ता रेडिएशन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed