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तो गरीबों की थाली में भी पहुंच रहा असुरक्षित अनाज
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 14 Aug 2015 07:29 PM IST
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मिड-डेमील में प्रयोग किए जा रहे गेहूं-चावल के नमूने असुरक्षित पाए जाने के बाद सस्ते राशन की दुकानों (कोटा) पर गरीबों को बेचे जा रहे अनाज की गुणवत्त्ता पर भी सवालिया निशान लग गया है। इसके पीछे वजह भी मजबूत है, क्योंकि सस्ते राशन की दुकानों और मिडडेमील के लिए स्कूलों में गेहूं-चावल की सप्लाई राज्य खाद्य आवश्यक वस्तु निगम (एसएफसी) करता है। खास बात यह है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने अब तक सस्ते राशन की दुकानों से अनाज के नमूने नहीं लिए हैं, जिससे गरीबों की थाली में घटिया अनाज के पहुंचने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
एफएसडीए टीम ने अप्रैल 2015 में फूलबेंहड़ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कुंवरापुर और कुंभी ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय छितौनिया से क्रमश: चावल और गेहूं का सर्विलांस नमूना भरा था, जिसके नमूने लैब जांच में फेल हो चुके हैं। लैब रिपोर्ट में गेहूं-चावल असुरक्षित पाया गया, जिसमें लार्र्वा और कीड़े भी पाए गए हैं। इन नमूनों की रिपोर्ट के बाद संबंधित एजेंसी के खिलाफ कोई लीगल कार्रवाई नहीं की गई है, बल्कि डीएम और बीएसए को सूचना दी गई है। अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सस्ते राशन की दुकानों पर गरीबों को वितरित किए जाने वाले अनाज की गुणवत्ता संदेह के दायरे में आ गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के प्रावधानों के तहत कोटे की दुकानों का पंजीकरण/लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जा चुका है, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है। वहीं एफएसडीए ने अभी तक कोटे की दुकानों से अनाज के एक भी नमूने नहीं भरे हैं। इस बात की पुष्टि स्वयं विभाग के आला अधिकारियों ने की है।
अभिहित अधिकारी, एफएसडीए डॉ अमर सिंह वर्मा ने बताया कि स्कूलों और कोटे की दुकानों पर अनाज (गेहूं-चावल) की सप्लाई एसएफसी द्वारा की जाती है। स्कूलों में मिडडेमील के लिए रखे अनाज के नमूने असुरक्षित पाए जाने के बाद कोटे की दुकानों पर वितरित किए जाने वाले अनाज की गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए जल्द ही अभियान चलाकर नमूने भरे जाएंगेे।
फैक्ट फाइल=
कोटे की दुकानें (शहरी) 149
कोटे की दुकानें (ग्रामीण) 1229
बीपीएल/अंत्योदय कार्डधारक 2,80,390
एपीएल कार्डधारक 5,76,266
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एफएसडीए टीम ने अप्रैल 2015 में फूलबेंहड़ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कुंवरापुर और कुंभी ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय छितौनिया से क्रमश: चावल और गेहूं का सर्विलांस नमूना भरा था, जिसके नमूने लैब जांच में फेल हो चुके हैं। लैब रिपोर्ट में गेहूं-चावल असुरक्षित पाया गया, जिसमें लार्र्वा और कीड़े भी पाए गए हैं। इन नमूनों की रिपोर्ट के बाद संबंधित एजेंसी के खिलाफ कोई लीगल कार्रवाई नहीं की गई है, बल्कि डीएम और बीएसए को सूचना दी गई है। अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सस्ते राशन की दुकानों पर गरीबों को वितरित किए जाने वाले अनाज की गुणवत्ता संदेह के दायरे में आ गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के प्रावधानों के तहत कोटे की दुकानों का पंजीकरण/लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जा चुका है, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है। वहीं एफएसडीए ने अभी तक कोटे की दुकानों से अनाज के एक भी नमूने नहीं भरे हैं। इस बात की पुष्टि स्वयं विभाग के आला अधिकारियों ने की है।
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अभिहित अधिकारी, एफएसडीए डॉ अमर सिंह वर्मा ने बताया कि स्कूलों और कोटे की दुकानों पर अनाज (गेहूं-चावल) की सप्लाई एसएफसी द्वारा की जाती है। स्कूलों में मिडडेमील के लिए रखे अनाज के नमूने असुरक्षित पाए जाने के बाद कोटे की दुकानों पर वितरित किए जाने वाले अनाज की गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए जल्द ही अभियान चलाकर नमूने भरे जाएंगेे।
फैक्ट फाइल=
कोटे की दुकानें (शहरी) 149
कोटे की दुकानें (ग्रामीण) 1229
बीपीएल/अंत्योदय कार्डधारक 2,80,390
एपीएल कार्डधारक 5,76,266