{"_id":"577bee304f1c1b9d2f7f9ab7","slug":"sickle-cell-anemia-will-be-the-identification-of-tharuon","type":"story","status":"publish","title_hn":"थारूओं में सिकिल सेल एनिमिया की कराई जाएगी पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
थारूओं में सिकिल सेल एनिमिया की कराई जाएगी पहचान
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 05 Jul 2016 11:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- एकलव्य माडल सौनहा में इसी माह लगेगा कैंप
- जबलपुर स्थित एनआईआरटीएच से आएंगे विशेषज्ञ
- आदिवासियों में पाई जाने वाली बीमारी है अनुवांशिक
आदिवासियों और अनुसूचित जनजाति के लोगों में पाए गए सिकिल सेल एनिमिया को चिह्नित करने के लिए पहली बार इस जिले मेें निदेशालय ने जांच कराने का निर्णय लिया है। थारू बाहुल्य क्षेत्र में स्थित एकलव्य माडल आवासीय विद्यालय सौनहा के प्रधानाचार्य यूके सिंह की मांग पर निदेशालय जनजाति विकास ने एक आदेश जारी कर कैंप लगाने की तारीखें तय कर दी हैं, जिसके मुताबिक 16 और 17 जुलाई 2016 को दो दिवसीय कैंप सौनहा में लगाया जाएगा। इसमें जांच के लिए मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित एनआईआरटीएच से विशेषज्ञ आएंगे।
जिले की 25 ग्राम पंचायतें थारू बाहुल्य हैैं, जो रिजर्व फारेस्ट या उसके पास स्थित हैं। थारूओं को अनुसूचित जनजाति में रखा गया है। वर्तमान में जिले में रहने वाले थारूओं की आबादी करीब 51 हजार है। प्रधानाचार्य यूके सिंह ने बताया कि जंगल या उसके आसपास के तराई इलाकों में रहने वाले आदिवासियों (अनुसूचित जनजाति) की ब्लड सेल (रक्त कणिकाएं) हसियाकार हो जाती हैं, जिससे ब्लड में आक्सीजन की सप्लाई बाधित होने लगती है। इससे शारीरिक विकास रुक जाता है या फिर इसके प्रभाव से अन्य बीमारियां पैर पसारने लगती हैं। अनुवांशिक बीमारी होने के चलते इसकी रोकथाम जरूरी हैै। अन्य प्रदेशों में निवासरत आदिवासियों में सिकिल सेल एनिमिया के लक्षण पाए जा चुके हैं। अभी उत्तर प्रदेश में रहने वाले थारू जनजाति के लोगों में इसकी जांच नहीं कराई गई है। लिहाजा अब निदेशालय जनजाति विकास उत्तर प्रदेश की सहायक निदेशक प्रियंका वर्मा ने इस बीमारी का पता लगाने के लिए एकलव्य माडल विद्यालय सौनहा में दो दिवसीय कैंप लगाकर थारू छात्र-छात्राओं की स्क्रीनिंग कराने के आदेश जारी किए हैं।
थारू विद्यालयों के नर्स और कंपाउंडर को करेंगे ट्रेंड
जबलपुर से आने वाली विशेषज्ञों की टीम एकलव्य माडल विद्यालय सौनहा के सभी बच्चों की स्क्रीनिंग करेगी। इसके अलावा दो दिवसीय कैंप में अन्य सात अनुसूचित जाति के विद्यालयों से दो-दो छात्र-छात्राओं और नर्स एवं कंपाउंडर को बुलाया गया है, जिन्हें सिकिल सेल एनिमिया की जांच करने के लिए ट्रेंड करते हुए मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा।
विज्ञापन
दो दिवसीय कैंप में सिकिल सेल एनिमिया की जांच की जाएगी। साथ ही मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जो बाद में पूरे थारू क्षेत्र में अभियान चलाकर जांच करने में सहयोग करेंगे।
- यूके सिंह, प्रधानाचार्य, एकलव्य माडल सौैनहा
विज्ञापन
- जबलपुर स्थित एनआईआरटीएच से आएंगे विशेषज्ञ
- आदिवासियों में पाई जाने वाली बीमारी है अनुवांशिक
आदिवासियों और अनुसूचित जनजाति के लोगों में पाए गए सिकिल सेल एनिमिया को चिह्नित करने के लिए पहली बार इस जिले मेें निदेशालय ने जांच कराने का निर्णय लिया है। थारू बाहुल्य क्षेत्र में स्थित एकलव्य माडल आवासीय विद्यालय सौनहा के प्रधानाचार्य यूके सिंह की मांग पर निदेशालय जनजाति विकास ने एक आदेश जारी कर कैंप लगाने की तारीखें तय कर दी हैं, जिसके मुताबिक 16 और 17 जुलाई 2016 को दो दिवसीय कैंप सौनहा में लगाया जाएगा। इसमें जांच के लिए मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित एनआईआरटीएच से विशेषज्ञ आएंगे।
जिले की 25 ग्राम पंचायतें थारू बाहुल्य हैैं, जो रिजर्व फारेस्ट या उसके पास स्थित हैं। थारूओं को अनुसूचित जनजाति में रखा गया है। वर्तमान में जिले में रहने वाले थारूओं की आबादी करीब 51 हजार है। प्रधानाचार्य यूके सिंह ने बताया कि जंगल या उसके आसपास के तराई इलाकों में रहने वाले आदिवासियों (अनुसूचित जनजाति) की ब्लड सेल (रक्त कणिकाएं) हसियाकार हो जाती हैं, जिससे ब्लड में आक्सीजन की सप्लाई बाधित होने लगती है। इससे शारीरिक विकास रुक जाता है या फिर इसके प्रभाव से अन्य बीमारियां पैर पसारने लगती हैं। अनुवांशिक बीमारी होने के चलते इसकी रोकथाम जरूरी हैै। अन्य प्रदेशों में निवासरत आदिवासियों में सिकिल सेल एनिमिया के लक्षण पाए जा चुके हैं। अभी उत्तर प्रदेश में रहने वाले थारू जनजाति के लोगों में इसकी जांच नहीं कराई गई है। लिहाजा अब निदेशालय जनजाति विकास उत्तर प्रदेश की सहायक निदेशक प्रियंका वर्मा ने इस बीमारी का पता लगाने के लिए एकलव्य माडल विद्यालय सौनहा में दो दिवसीय कैंप लगाकर थारू छात्र-छात्राओं की स्क्रीनिंग कराने के आदेश जारी किए हैं।
विज्ञापन
थारू विद्यालयों के नर्स और कंपाउंडर को करेंगे ट्रेंड
जबलपुर से आने वाली विशेषज्ञों की टीम एकलव्य माडल विद्यालय सौनहा के सभी बच्चों की स्क्रीनिंग करेगी। इसके अलावा दो दिवसीय कैंप में अन्य सात अनुसूचित जाति के विद्यालयों से दो-दो छात्र-छात्राओं और नर्स एवं कंपाउंडर को बुलाया गया है, जिन्हें सिकिल सेल एनिमिया की जांच करने के लिए ट्रेंड करते हुए मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा।
विज्ञापन
दो दिवसीय कैंप में सिकिल सेल एनिमिया की जांच की जाएगी। साथ ही मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जो बाद में पूरे थारू क्षेत्र में अभियान चलाकर जांच करने में सहयोग करेंगे।
- यूके सिंह, प्रधानाचार्य, एकलव्य माडल सौैनहा