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शारदा का कहर: लखीमपुर खीरी के ग्रंट 12 में 10 घर और नदी में समाए, अब गांव का अस्तित्व भी खतरे में

Thu, 18 Sep 2025 07:20 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 18 Sep 2025 07:20 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से ग्रंट नंबर 12 गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। गांव के 91 मकान नदी में समा गए हैं। कटान से बेघर हुए परिवार सड़कों पर गुजर बसर कर रहे हैं।  

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Sharda River erosion swept away 10 more houses in Grant 12 village of lakhimpur kheri
कटान से शारदा नदी में गिरा मकान - फोटो : संवाद

विस्तार

लखीमपुर खीरी के निघासन क्षेत्र में शारदा नदी ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। बृहस्पतिवार को ग्रंट नंबर 12 गांव में 10 और मकान पलक झपकते ही नदी की धारा में समा गए। शारदा नदी के कटान ने अब तक गांव के 91 से ज्यादा मकान लील लिए हैं।

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गांव के प्रेमचंद, हरीराम, संजय कुमार, लीला देवी, गोल्डी देवी, काजल, कृपाराम, शैलेंद्र, रामलखन और पंचम के मकान बृहस्पतिवार को नदी की तेज धार में समा गए। कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि ग्रामीण अब आवासीय जमीन और सुरक्षित जगह तलाशने पर विवश हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन कई बार आश्वासन दे चुका है कि जलस्तर घटने पर बचाव कार्य शुरू होंगे। अब जबकि नदी का जलस्तर नीचे आ चुका है, फिर भी राहत कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। बचाव कार्य की जगह शारदा नदी बने बनाए आशियाने उजाड़ रही है। इन दिनों गांव का वजूद मिटने की प्रबल संभावनाएं बनी है। 

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सड़कों पर तिरपाल डालकर गुजारनी पड़ रही रातें
गांव का बड़ा हिस्सा उजड़ जाने के बाद कटान पीड़ित खुले आसमान के नीचे जीवन काटने को मजबूर हैं। सड़क किनारे तिरपाल डालकर परिवार रह रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे संक्रमणजनित बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। कटान में खंभे बह जाने से अंधेरे में रहना पड़ रहा है। रातभर जंगली जानवरों का भय सोने नहीं देता।

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साहब ... जंगली जानवरों का भय रात भर सोने नहीं देता
सड़कों पर रह रहे ग्रामीणों का दर्द जुबां से छलक ही पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि जो कभी सोचा भी नहीं था वैसी जिंदगी जीने को विवश हैं। वहीं शारदा नदी पक्के गांव का वजूद संकट में अब तक तीन इंटरलॉक सड़कें और दो प्राचीन मंदिर भी शारदा नदी में समा चुके हैं। ग्रामीणों को डर है कि आने वाले दिनों में पूरा गांव नक्शे से मिट सकता है।

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