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बेकाबू हुई शारदा नदी, जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर पार
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श्रीनगर गांव में घुसने लगा बाढ़ का पानी, क्रॉस पिलर नदी में डूबे
सुहेली नदी का पानी भी पलिया के डिग्री कॉलेज के पास तक पहुंचा
पलियाकलां। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और बनबसा बैराज से छोड़े जा रहे पानी के चलते शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को एक मीटर पार कर गया है। नदी की बाढ़ का पानी श्रीनगर गांव में घुसने लगा है। नदी किनारे लगे क्रॉस पिलर भी डूब गए हैं। वहीं सुहेली नदी का पानी भी पलिया के डिग्री कॉलेज के पास तक आ गया है।
करीब 12 से 20 घंटे के अंतराल में बनबसा से छूटा पानी शारदा नदी में पहुंचता है। इसके बाद से नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू होता है। मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर एक सेंटीमीटर ऊपर 155.110 सेंटीमीटर पर बह रहा है, जिससे श्रीनगर गांव में मंदिर के चबूतरे तक पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों के चेहरों पर शिकन बढ़ती जा रही है। आजादनगर, बर्बाद नगर गांव के ग्रामीण ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। उधर, सुहेली नदी का पानी पटिहन रोड स्थित डिग्री कॉलेज तक पहुंच गया और फायर बिग्रेड कार्यालय में पानी भरने से जलभराव हो गया है। निषादनगर घोला गांव अब भी जलमग्न है, जबकि पटिहन, मुंजहा, बिलहिया, मकनपुर, चंबरबोझ आदि का खेतिहर इलाका पूरा डूब गया है, जिससे किसान परेशान हैं।
मझगईं। सुहेली नदी में बाढ़ आ जाने के कारण चौखड़ा फार्म के खेतिहर इलाके में बाढ़ का पानी भर गया है। यहां से निघासन रोड तक जाने के लिए दो रास्ते हैं। एक भगवंतनगर होते हुए नौगवां तक व दूसरा रास्ता मझगईं कस्बा में निकलता है। दोनों ही रास्तों पर तीन फिट तक पानी चल रहा है। पानी के तेज बहाव से बरूही के पास एक गहरा नाला बन जाने से चौखड़ा फार्म के लोगों का संपर्क कट गया है। देर शाम तक तेज गति से पानी बढ़ रहा था।
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फूलबेहड़ क्षेत्र के एक दर्जन गांव बने टापू
महेवागंज/सुंदरवल। शारदा नदी के तटीय इलाकों में भी बाढ़ के हालात बन गए हैं। नरहर, गोपालपुरवा, बालूगंज, पांडे पुरवा, बड़ागांव, बसहा, खगई पुरवा, कुचिलहा, इच्छारामपुरवा समेत कई गांव बाढ़ से घिर गए हैं। धान और गन्ना की सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूब गई हैं। मीलपुरवा के पास रपटा पुल पर बाढ़ का पानी चल रहा है। बड़ागांव, बसहा, खांभी, भोलापुरवा गांव का संपर्क मार्ग पानी में डूबा हुआ है। आवागमन में लोगों को काफी दिक्कतें हो रही है। घर में कई-कई फुट तक पानी भरा है। सड़क और गलियारों पर नाव चल रही हैं। इससे लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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सुहेली नदी का पानी भी पलिया के डिग्री कॉलेज के पास तक पहुंचा
पलियाकलां। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और बनबसा बैराज से छोड़े जा रहे पानी के चलते शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को एक मीटर पार कर गया है। नदी की बाढ़ का पानी श्रीनगर गांव में घुसने लगा है। नदी किनारे लगे क्रॉस पिलर भी डूब गए हैं। वहीं सुहेली नदी का पानी भी पलिया के डिग्री कॉलेज के पास तक आ गया है।
करीब 12 से 20 घंटे के अंतराल में बनबसा से छूटा पानी शारदा नदी में पहुंचता है। इसके बाद से नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू होता है। मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर एक सेंटीमीटर ऊपर 155.110 सेंटीमीटर पर बह रहा है, जिससे श्रीनगर गांव में मंदिर के चबूतरे तक पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों के चेहरों पर शिकन बढ़ती जा रही है। आजादनगर, बर्बाद नगर गांव के ग्रामीण ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। उधर, सुहेली नदी का पानी पटिहन रोड स्थित डिग्री कॉलेज तक पहुंच गया और फायर बिग्रेड कार्यालय में पानी भरने से जलभराव हो गया है। निषादनगर घोला गांव अब भी जलमग्न है, जबकि पटिहन, मुंजहा, बिलहिया, मकनपुर, चंबरबोझ आदि का खेतिहर इलाका पूरा डूब गया है, जिससे किसान परेशान हैं।
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मझगईं। सुहेली नदी में बाढ़ आ जाने के कारण चौखड़ा फार्म के खेतिहर इलाके में बाढ़ का पानी भर गया है। यहां से निघासन रोड तक जाने के लिए दो रास्ते हैं। एक भगवंतनगर होते हुए नौगवां तक व दूसरा रास्ता मझगईं कस्बा में निकलता है। दोनों ही रास्तों पर तीन फिट तक पानी चल रहा है। पानी के तेज बहाव से बरूही के पास एक गहरा नाला बन जाने से चौखड़ा फार्म के लोगों का संपर्क कट गया है। देर शाम तक तेज गति से पानी बढ़ रहा था।
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महेवागंज/सुंदरवल। शारदा नदी के तटीय इलाकों में भी बाढ़ के हालात बन गए हैं। नरहर, गोपालपुरवा, बालूगंज, पांडे पुरवा, बड़ागांव, बसहा, खगई पुरवा, कुचिलहा, इच्छारामपुरवा समेत कई गांव बाढ़ से घिर गए हैं। धान और गन्ना की सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूब गई हैं। मीलपुरवा के पास रपटा पुल पर बाढ़ का पानी चल रहा है। बड़ागांव, बसहा, खांभी, भोलापुरवा गांव का संपर्क मार्ग पानी में डूबा हुआ है। आवागमन में लोगों को काफी दिक्कतें हो रही है। घर में कई-कई फुट तक पानी भरा है। सड़क और गलियारों पर नाव चल रही हैं। इससे लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।