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शारदा में समा गया पूरा गांव जंगल नंबर तीन
अमर उजाला ब्यूरो/धौरहरा (खीरी)
Updated Thu, 21 Jul 2016 11:26 PM IST
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गंगा के जलस्तर में गिरावट का सिलसिला जारी
- फोटो : अमर उजाला
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गांव में 24 झोपड़ियां थीं, अंतिम घर भी समाया
तहसील की ग्राम पंचायत चहमलपुर के मजरा गांव जंगल नंबर 3 में पिछले साल कटान शुरू हुआ था। यह गांव शारदा नदी के पेटे में बसा था। अधिकतर हिस्सा कटता देख लोग नदी के पेटे से पलायन कर ऊंचाई पर झोपड़ियां डाल ली थीं। गुरुवार को अंतिम घर भी शारदा नदी की बाढ़ में समा गया। लोग बताते हैं कि इसमें 85 झोपड़ियां थीं, लेकिन प्रभारी बाढ़/एडीएम एसपी सिंह ने 24 झोपड़ियों के नदी में समाने की पुष्टि की है।
मालूम हो कि शारदा ने इस गांव में जून से ही कटान शुरू कर दिया और जुलाई समाप्त होने से पहले ही पूरा गांव शारदा में समा गया। शारदा नदी ने बुधवार रात रामनरेश, चंदभाल, बांके, जगदीश के घर काटे तो गुरुवार सुबह होते ही गांव के आखिरी बचे घर रामनरेश और हरिकिशुन के घरों को काट पूरे गांव का वजूद मिटा दिया। प्रशासन ने अब तक अहेतुक सहायता के रूप में मात्र अस्सी परिवारों को तिरपाल और प्लास्टिक जरीकेन ही दी है। कटान पीड़ित खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। सहायता न मिलने से भुखमरी की कगार पर हैं
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भुरजिनपुरवा स्कूल शारदा में समाया
धौरहरा। ग्राम पंचायत समरदा बदाल के मजरा भुरजिनपुरवा का प्राथमिक स्कूल गुरुवार दोपहर पूरा का पूरा शारदा नदी में समा गया, जिसकी सूचना वहां के शिक्षक जमुना प्रसाद ने बीएसए को दी। बीओ रमेश मौर्य नें यहां पढ़ने वाले बच्चों को समरदा बदाल के स्कूल में भेजने के आदेश दिए हैं।
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कोट...
गांव जंगल नंबर तीन में 24 झोपड़ियां थीं। चारों ओर शारदा नदी होने के कारण यहां के लोगों को पहले ही निकाल दिया गया था। कटान में गांव का वजूद मिटने से पहले ही परिवारों को सूचीबद्ध किया गया है। उन्हें जल्द ही बसाया जाएगा। इसके अलावा पीड़ितों को अहेतुक सहायता और गृह अनुदान दिया जाएगा।
-एसपी सिंह, प्रभारी बाढ़/एडीएम।
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तहसील की ग्राम पंचायत चहमलपुर के मजरा गांव जंगल नंबर 3 में पिछले साल कटान शुरू हुआ था। यह गांव शारदा नदी के पेटे में बसा था। अधिकतर हिस्सा कटता देख लोग नदी के पेटे से पलायन कर ऊंचाई पर झोपड़ियां डाल ली थीं। गुरुवार को अंतिम घर भी शारदा नदी की बाढ़ में समा गया। लोग बताते हैं कि इसमें 85 झोपड़ियां थीं, लेकिन प्रभारी बाढ़/एडीएम एसपी सिंह ने 24 झोपड़ियों के नदी में समाने की पुष्टि की है।
मालूम हो कि शारदा ने इस गांव में जून से ही कटान शुरू कर दिया और जुलाई समाप्त होने से पहले ही पूरा गांव शारदा में समा गया। शारदा नदी ने बुधवार रात रामनरेश, चंदभाल, बांके, जगदीश के घर काटे तो गुरुवार सुबह होते ही गांव के आखिरी बचे घर रामनरेश और हरिकिशुन के घरों को काट पूरे गांव का वजूद मिटा दिया। प्रशासन ने अब तक अहेतुक सहायता के रूप में मात्र अस्सी परिवारों को तिरपाल और प्लास्टिक जरीकेन ही दी है। कटान पीड़ित खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। सहायता न मिलने से भुखमरी की कगार पर हैं
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भुरजिनपुरवा स्कूल शारदा में समाया
धौरहरा। ग्राम पंचायत समरदा बदाल के मजरा भुरजिनपुरवा का प्राथमिक स्कूल गुरुवार दोपहर पूरा का पूरा शारदा नदी में समा गया, जिसकी सूचना वहां के शिक्षक जमुना प्रसाद ने बीएसए को दी। बीओ रमेश मौर्य नें यहां पढ़ने वाले बच्चों को समरदा बदाल के स्कूल में भेजने के आदेश दिए हैं।
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कोट...
गांव जंगल नंबर तीन में 24 झोपड़ियां थीं। चारों ओर शारदा नदी होने के कारण यहां के लोगों को पहले ही निकाल दिया गया था। कटान में गांव का वजूद मिटने से पहले ही परिवारों को सूचीबद्ध किया गया है। उन्हें जल्द ही बसाया जाएगा। इसके अलावा पीड़ितों को अहेतुक सहायता और गृह अनुदान दिया जाएगा।
-एसपी सिंह, प्रभारी बाढ़/एडीएम।