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Lakhimpur Kheri News: खिलाफत आंदोलन की अमूल्य धरोहर है शहीद नसीरुद्दीन स्मारक भवन

Mon, 11 Aug 2025 11:34 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Mon, 11 Aug 2025 11:34 PM IST
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Shaheed Naseeruddin Memorial Building is a priceless heritage of the Khilafat Movement
शहर का शहीद नसीरुद्दीन मेमोरियल भवन। संवाद
लखीमपुर खीरी। शहर का विलोबी मेमोरियल भवन, जिसे अब नसीरुद्दीन मौजी स्मारक भवन के नाम से जाना जाता है। यह खिलाफत आंदोलन की अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है।
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वर्ष 1924 में अंग्रेजी हुकूमत ने इसे ब्रिटिश डिप्टी कमिश्नर सर रॉबर्ट विलियम डगलस विलोबी की याद में बनवाया था, जिसकी 26 अगस्त 1920 को क्रांतिकारियों नसीरुद्दीन मौजी, बशीरुद्दीन और मासूम अली ने हत्या कर दी थी। यह हत्या खिलाफत आंदोलन से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध था।

नसीरुद्दीन जो कलक्टर के आवास पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। बताया जाता है कि इन आजादी के मतवालों ने बकरीद के दो सप्ताह पहले जिलाधीश और कप्तान आदि अफसरों की हत्या करने की योजना बना ली थी। 26 अगस्त, 1920 को बकरीद के दिन क्रांतिकारी नसीरुद्दीन मौजी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर तत्कालीन अंग्रेज कलेक्टर विलोबी की हत्या उसके घर में घुसकर कर दी।
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शहीद नसीरुद्दीन के पोते थरवरन गंज निवासी अजहर हुसैन बताते हैं कि वे उनके दादा (बाबा) मोहम्मद हुसैन के छोटे भाई थे, उनकी शादी नहीं हुई थी, पहले ही वह फांसी के फंदे पर झूल गए। नसीरुद्दीन का असली नाम नसीर हुसैन था जो बाद में नसीरुद्दीन मौजी पड़ गया। उन्होंने बताया कि विलोबी की हत्या करने के बाद तीनों साथी फरार हो गए थे। ब्रिटिश हुकूमत ने परिवार पर भी बहुत जुल्म किए। उसी कलक्टर विलोबी की याद में यह भवन ब्रिटिश शासन ने बनवाया था। संवाद
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प्रशासन ने बदला था भवन का नाम

स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती वर्ष 1997 में भवन का नाम बदलकर शहीद नसीरुद्दीन स्मारक भवन किया गया। हालांकि, इसे अभी तक संवैधानिक दर्जा नहीं मिला। यह भवन जहां क्रांतिकारियों ने आजादी का जश्न मनाया था। आज भी ब्रिटिशकालीन वस्तुओं और ऐतिहासिक लाइब्रेरी के साथ अपनी गौरवशाली कहानी बयां करता है।

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वर्तमान स्थिति और सांस्कृतिक महत्व

यह मेमोरियल हॉल और इसका आसपास का मैदान विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र है। यहां श्री राम कथा जैसे धार्मिक आयोजन, तिरंगा यात्रा और अन्य सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इसके अलावा यह मैदान कांग्रेस के पहले जिला स्तरीय अधिवेशन का भी गवाह रहा है, जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सभापतित्व किया था। मेमोरियल हॉल में ब्रिटिश काल की वस्तुएं और एक ऐतिहासिक लाइब्रेरी भी मौजूद है, जो इसे एक महत्वपूर्ण बनाती है।
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खीरी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा

वाईडी डिग्री कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर व विलोबी ट्रस्ट के सचिव डॉ. अजय आगा ने बताया कि विलोबी मेमोरियल मैदान लखीमपुर खीरी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो ब्रिटिश शासन और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानियों को अपने में समेटे हुए है। 1924 में निर्मित यह स्थल आज भी न केवल ऐतिहासिक धरोहर के रूप में बल्कि सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। 1935 में गांधी बालोद्यान, 1948 में राजनारण मिश्र स्मारक आई हॉस्पिटल और 1982 में मूक बधिर बच्चों के स्कूल के लिए इसी ट्रस्ट से जगह दान दी गई।

शहर का शहीद नसीरुद्दीन मेमोरियल भवन। संवाद

शहर का शहीद नसीरुद्दीन मेमोरियल भवन। संवाद

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