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होटलों पर चाकरी कर रहे हैं मासूम, प्रशासनिक दावे फेल
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 11 Jun 2016 11:27 PM IST
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child labour
- फोटो : amar ujala
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बाल श्रम निषेध दिवस पर विशेष
बालश्रम उन्मूलन के नहीं किए जा रहे प्रयास
योजना फाइल में कैद, जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा लाभ
जिले में बाल श्रम उन्मूलन के प्रयास शायद बंद हो चुके हैं। होटल, ढाबों, खोमचों पर आज भी बच्चे चाकरी कर रहे हैं, जबकि प्रशासन का दावा है कि बाल श्रम पर पूरी तरह रोक लगाई जा चुकी है। समय-समय पर चलाए जाने वाले अभियान अब गुजरे जमाने की बात हो चुके हैं, क्योंकि जिम्मेदार विभाग अन्य कार्यों में व्यस्त है। इस वर्ष श्रम विभाग ने शहर, मैगलगंज में नौ बाल श्रमिकों को चिह्नित किए थे, जो सिर्फ फौरी कार्रवाई रही। जबकि कंडीशनल कैश ट्रांसफर स्कीम में अब तक जिले में एक भी बाल श्रमिक का चयन नहीं किया गया है।
बाल श्रम उन्मूलन के लिए कभी बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर ऐसे बच्चों को विशेष बाल श्रमिक विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाता था, लेकिन यह स्कीम 2009 से बंद की जा चुकी है। विभागीय अधिकारी का जवाब है कि सर्व शिक्षा अभियान चालू होने पर विशेष बाल श्रमिक विद्यालय बंद कर दिए गए थे, बल्कि परिषदीय विद्यालयों मेें ही दाखिले का प्रावधान किया गया है। इसके स्थान पर सरकार ने कंडीशनल कैश ट्रांसफर स्कीम लागू की, जिसके तहत चयनित बाल श्रमिक को पढ़ाई और परिवार के पालन पोषण के लिए एक साल में 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। इसमें पात्रता की शर्त है कि बाल श्रमिक अनाथ हो या माता-पिता में कोई एक अपंग हो या फिर दोनों ही अपंग हो, तो ऐसे बच्चों को तीन हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक मदद और उत्तीर्ण होने पर चार हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही 100 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति भी श्रम विभाग मुहैया कराएगा। हालांकि विडंबना ही कहें कि इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ अब तक किसी बाल श्रमिक को नहीं मिला है।
अभियान चलाकर नौ बाल श्रमिकों को चिह्नित कर मेडिकल परीक्षण कराया गया था। कंडीशनल कैश ट्रांसफर स्कीम की कैटेगरी में अभी कोई बाल श्रमिक नहीं मिला है। हमारे पास लखीमपुर के अलावा लखनऊ का भी चार्ज है।
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-डॉ एमके मिश्रा, सहायक श्रम आयुक्त
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बालश्रम उन्मूलन के नहीं किए जा रहे प्रयास
योजना फाइल में कैद, जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा लाभ
जिले में बाल श्रम उन्मूलन के प्रयास शायद बंद हो चुके हैं। होटल, ढाबों, खोमचों पर आज भी बच्चे चाकरी कर रहे हैं, जबकि प्रशासन का दावा है कि बाल श्रम पर पूरी तरह रोक लगाई जा चुकी है। समय-समय पर चलाए जाने वाले अभियान अब गुजरे जमाने की बात हो चुके हैं, क्योंकि जिम्मेदार विभाग अन्य कार्यों में व्यस्त है। इस वर्ष श्रम विभाग ने शहर, मैगलगंज में नौ बाल श्रमिकों को चिह्नित किए थे, जो सिर्फ फौरी कार्रवाई रही। जबकि कंडीशनल कैश ट्रांसफर स्कीम में अब तक जिले में एक भी बाल श्रमिक का चयन नहीं किया गया है।
बाल श्रम उन्मूलन के लिए कभी बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर ऐसे बच्चों को विशेष बाल श्रमिक विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाता था, लेकिन यह स्कीम 2009 से बंद की जा चुकी है। विभागीय अधिकारी का जवाब है कि सर्व शिक्षा अभियान चालू होने पर विशेष बाल श्रमिक विद्यालय बंद कर दिए गए थे, बल्कि परिषदीय विद्यालयों मेें ही दाखिले का प्रावधान किया गया है। इसके स्थान पर सरकार ने कंडीशनल कैश ट्रांसफर स्कीम लागू की, जिसके तहत चयनित बाल श्रमिक को पढ़ाई और परिवार के पालन पोषण के लिए एक साल में 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। इसमें पात्रता की शर्त है कि बाल श्रमिक अनाथ हो या माता-पिता में कोई एक अपंग हो या फिर दोनों ही अपंग हो, तो ऐसे बच्चों को तीन हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक मदद और उत्तीर्ण होने पर चार हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही 100 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति भी श्रम विभाग मुहैया कराएगा। हालांकि विडंबना ही कहें कि इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ अब तक किसी बाल श्रमिक को नहीं मिला है।
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अभियान चलाकर नौ बाल श्रमिकों को चिह्नित कर मेडिकल परीक्षण कराया गया था। कंडीशनल कैश ट्रांसफर स्कीम की कैटेगरी में अभी कोई बाल श्रमिक नहीं मिला है। हमारे पास लखीमपुर के अलावा लखनऊ का भी चार्ज है।
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-डॉ एमके मिश्रा, सहायक श्रम आयुक्त