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सीलिंग सार्टिफिकेट जारी नहीं कर रहा है बिजली विभाग
लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 18 May 2015 06:45 PM IST
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शहर में चार-पांच महीने पहले चलाए गए अभियान में अधिकारियों ने दो हजार से अधिक घरों के बिजली मीटर बदल दिए, लेकिन अब तक एक हजार से अधिक मीटरों की कंप्यूटराइज्ड फीडिंग नहीं की गई है। जिसकी वजह से लोगों को सीलिंग सार्टिफिकेट जारी नहीं हो पा रहे हैं और उनके घरों का बिजली बिल भी बढ़कर आ रहा है। विभागीय सूत्रों की माने तो इसकी आड़ में बिजली विभाग और मीटर अनुभाग के कर्मचारी साठगांठ कर राजस्व का लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं।
मौजूदा समय में शहरी क्षेत्र के करीब 40 हजार घरेलू बिजली कनेक्शनों में चार हजार से अधिक बिजली बिल आईडीएफ हैं। एक अधिकारी के मुताबिक चार-पांच महीने पहले शहर में चलाए गए चेकिंग अभियान के दौरान लोगों के घरों के करीब दो हजार से अधिक मीटर बदले गए हैं, लेकिन बदले गए मीटरों की फीडिंग न होने के कारण लोगों को सीलिंग सार्टिफिकेट नहीं जारी हो पा रहे हैं। बताते हैं सीलिंग सार्टिफिकेट न जारी होने पर उपभोक्ताओं के घर आरडीएफ (डिफेक्टिव बिल) बिजली बिल आ रहे हैं। जिन्हें दुरुस्त कराने के लिए उपभोक्ताओं को अधिकारियों के चक्कर काटना पड़ रहा है, फिर भी उन्हें न तो सीलिंग सार्टिफिकेट दिया जा रहा है और बदले गए मीटरों की फीडिंग की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इसकी आड़ में बिजली विभाग और मीटर विभाग दोनों जगहों के कर्मचारी बिलिंग करने वाली प्राइवेट कंपनी से मिलीभगत कर राजस्व को भी चूना लगा रहे हैं।
कार्रवाई से कतरा रहे बिजली अधिकारी
अधिकारियों से शहर में मनमाने ढंग से मीटर रीडिंग कर फर्जी बिलिंग का खुलासा होने के बाद भी एसडीओ टाउन ने अभी तक प्राइवेट कंपनी की बिलिंग की जांच शुरू नहीं की है और न ही इस बाबत एसडीओ दफ्तर से कोई चिट्ठी ही जारी की गई है। जबकि मीटर रीडिंग में घपला होने का मामला कई दिन पहले उजागर हो चुका है। ऐसे में बिजली अधिकारियों पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
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एसडीओ टाउन धर्मेंद्र्र आनंद ने बताया कि उपभोक्ताओं को सीलिंग सार्टिफिकेट जारी करने और फीडिंग करने का काम मीटर अनुभाग को करना है। इससे तमाम उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। इसके लिए मीटर के जेई को निर्देश दिए गए हैं।
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मौजूदा समय में शहरी क्षेत्र के करीब 40 हजार घरेलू बिजली कनेक्शनों में चार हजार से अधिक बिजली बिल आईडीएफ हैं। एक अधिकारी के मुताबिक चार-पांच महीने पहले शहर में चलाए गए चेकिंग अभियान के दौरान लोगों के घरों के करीब दो हजार से अधिक मीटर बदले गए हैं, लेकिन बदले गए मीटरों की फीडिंग न होने के कारण लोगों को सीलिंग सार्टिफिकेट नहीं जारी हो पा रहे हैं। बताते हैं सीलिंग सार्टिफिकेट न जारी होने पर उपभोक्ताओं के घर आरडीएफ (डिफेक्टिव बिल) बिजली बिल आ रहे हैं। जिन्हें दुरुस्त कराने के लिए उपभोक्ताओं को अधिकारियों के चक्कर काटना पड़ रहा है, फिर भी उन्हें न तो सीलिंग सार्टिफिकेट दिया जा रहा है और बदले गए मीटरों की फीडिंग की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इसकी आड़ में बिजली विभाग और मीटर विभाग दोनों जगहों के कर्मचारी बिलिंग करने वाली प्राइवेट कंपनी से मिलीभगत कर राजस्व को भी चूना लगा रहे हैं।
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कार्रवाई से कतरा रहे बिजली अधिकारी
अधिकारियों से शहर में मनमाने ढंग से मीटर रीडिंग कर फर्जी बिलिंग का खुलासा होने के बाद भी एसडीओ टाउन ने अभी तक प्राइवेट कंपनी की बिलिंग की जांच शुरू नहीं की है और न ही इस बाबत एसडीओ दफ्तर से कोई चिट्ठी ही जारी की गई है। जबकि मीटर रीडिंग में घपला होने का मामला कई दिन पहले उजागर हो चुका है। ऐसे में बिजली अधिकारियों पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
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एसडीओ टाउन धर्मेंद्र्र आनंद ने बताया कि उपभोक्ताओं को सीलिंग सार्टिफिकेट जारी करने और फीडिंग करने का काम मीटर अनुभाग को करना है। इससे तमाम उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। इसके लिए मीटर के जेई को निर्देश दिए गए हैं।