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बीमारियों का शिकंजा, बच्चा वार्ड फुल
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 02 Sep 2015 06:36 PM IST
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जिले में तेज बुखार, गले में सूजन और संक्रमित बीमारियों से हाहाकार है। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में अब तक 100 से अधिक मरीज भर्ती हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में करीब 40 मरीज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। अन्य मरीज या तो लखनऊ रेफर कर दिए गए या फिर तीमारदार उन्हें निजी अस्पतालों में लेकर चले गए। जिले में बीमारियों से हाहाकार मचा है, जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड फुल हो गया है। उधर जिले के उपनगर गोला गोकणनाथ नगर से सटे गांव द्वारिकागंज में तेज बुखार से एक और मासूम की जान चली गई। यह गांव ब्लाक बांकेगंज की ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट में आता है। इससे पहले भी यहां दो बच्चों की मौत हो गई थी। तब स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी और दो दिन टीकाकरण और दवाई वितरित कर स्थिति सामान्य बताकर पल्ला झाड़ लिया था।
तेज बुखार से एक और मासूम की मौत
10 दिन पहले दो बच्चों को निगल चुकी बीमारी
गोला गोकर्णनाथ खीरी। अलीगंज रोड स्थित गांव द्वारिकागंज निवासी सतीश कुमार के साढ़े तीन वर्षीय पुत्र जितिन की बुधवार की सुबह तेज बुखार से जान चली गई। दो सप्ताह पहले जितिन को बुखार के साथ गले में गांठ और खांसी की शिकायत थी। सतीश ने बच्चे को सीएचसी गोला से लेकर लखीमपुर और लखनऊ के निजी अस्पताल में दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ और जितिन की मौत हो गई। गांव के लोग इस बीमारी का कारण गांव में फैली गंदगी मानकर शासन प्रशासन को कोस रहे हैं। लोगों ने कहा कि गांव में सफाई कर्मी नहीं आता है। सड़कें और नाली न होने से जगह-जगह कूड़े के ढेर और कीचड़ भरा हुआ है, जिससे यह संक्रमण जनित जानलेवा बीमारियां पैदा हो रही हैं और मासूमों की जान जा रही है।
तेज बुखार और डायरिया से भर्ती हो रहे बच्चे
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में तेज बुखार और डायरिया से पीड़ित बच्चे रोजाना भर्ती हो रहे हैं। तमाम बच्चे रेफर कर दिए जाते हैं। यहां तैनात स्टाफ की माने तो गंभीर हालत वाले बच्चे रेफर किए जाते हैं, जबकि हकीकत ये है कि डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें समुचित इलाज नहीं दिया जा पा रहा है, जिससे तमाम तीमारदार ही मरीज को लेकर यहां से भाग लेते हैं, जबकि कमजोर तबके के लोग मरीजों को लिए पड़े रहते हैं। आलम यह है कि मरीजों के तीमारदार बताते हैं कि डॉक्टर देखने तक नहीं आए, वार्ड ब्वाय और अन्य स्टाफ ही दवाएं दे रहा है। बुधवार को चिल्ड्रेन वार्ड में करीब 40 मरीज भर्ती थे, जिसमें से 26 तेज बुखार से, जबकि 14 डायरिया से पीड़ित मिले।
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बच्चा वार्ड में ये बच्चे मिले भर्ती
1. लक्ष्मी (8) पुत्री अरुण कश्यप
2. अजय (9) पुत्र रामपाल
3. ध्रुव (12) पुत्र शमेश्वर सिंह
4. शैलेंद्र (13) पुत्र श्रीकृष्ण
5. बर्षा (6) पुत्र अखिलेश
6. गौरी (3) पुत्री राकेश
7. पारा (5) पुत्र अशोक
8. अरुण कुमार (9) पुत्र पप्पू
9. लल्ली (10) पुत्री दुलारे
10. नैंसी (6) पुत्री प्रमोद
पहले इन बच्चों गई जान
23 अगस्त : गोला की ग्राम पंचायत लाल्हापुर के मोहल्ला हफीजपुर में नजर अली का 11 वर्षीय पुत्र मोहम्मद अफजल की मौत
23 अगस्त : गोला के ही लाल्हापुर के मोहल्ला हफीजपुर के नाजिर अली की 10 वर्षीय पुत्री सोनी की मौत
गांव में है गंदगी का साम्राज्य
गोला गोकर्णनाथ। अमर उजाला ने 26 अगस्त को गांव में चिकित्सा शिविर और टीकाकरण बंद करने और रहस्यमयी बीमारी डिफ्थीरिया होने पर समाचार प्रकाशित किया था। इसके बावजूद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नहीं चेते। गांव में जहां एक ओर गंदगी के कारण मासूमों की जान जा रही है वहीं गांव में लगे कूड़े के ढेर और कीचड़ में बजबजाते कीड़े जानलेवा बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं। गांव में साफ सफाई न होने से सड़कों और लगे नलों के किनारे गंदगी फैली रहती है। सरकार की स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजना भी यहां बेअसर साबित हुई है। कहने को इस गांव को सांसद रविप्रकाश वर्मा ने गोद लिया है किंतु तीन मासूमों की मौत होने के बाद वह और कोई आला अफसर अब तक गांव नहीं पहुंचा है।
ये हैं लक्षण
बच्चे को भूख लगना बंद हो जाती है। गले में दर्द होता है। बाद में बुखार आ जाता है और फिर गले में गिल्टियां प्रतीत होती हैं। सांस लेने में दिक्कत और उल्टियां आती हैं।
तो कागजों में हो गया टीकाकरण
जिला अस्पताल में तेज बुखार के पीड़ित किसी भी मरीज का टीकाकरण नहीं हुआ है, जबकि जिला अस्पताल में वैक्सीन का स्टाक फुल है। इतना ही नहीं दावा है कि सभी सीएचसी में प्रचुर मात्रा में जेई और टाइफाइड के टीके मौजूद हैं। इतना ही नहीं सीएमओ का दावा है कि टीकाकरण में वह अव्वल हैं, जबकि गांवों में हकीकत विपरीत है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कागजों में ही टीकाकरण करा दिया गया।
कसबा बांकेगंज निवासी अरुण कश्यप की आठ वर्षीय पुत्री लक्ष्मी हो, ब्लाक फूलबेहड़ के गांव बड़ागांव मेंहदी निवासी रामपाल का आठ वर्षीय पुत्र अजय, धौरहरा के गांव कंधरापुर निवासी श्रीकृष्ण का 13 वर्षीय पुत्र शैलेंद्र हो या फिर पलिया के गांव बसंतापुर निवासी अखिलेश की छह वर्षीय पुत्री बर्षा किसी भी बच्चे का टीकाकरण नहीं हुआ। इतना ही नहीं बच्चा वार्ड में एक भी तीमारदार ऐसा नहीं मिला, जिसने यह बताया हो कि उनके गांव में टीकाकरण किया गया है, जबकि सीएमओ डॉ वीके साहू कहते हैं कि टीकाकरण में हम आगे हैं। जिला मुख्यालय से लेकर सीएचसी में प्रचुर मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। ऐसे में एक ही सवाल सामने आता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने कागजों में ही टीकाकरण की वैक्सीन खफा डाली। फिलहाल यह मामला उच्चस्तरीय जांच का हो सकता है। यहां अब तेज बुखार का प्रकोप फैला तो सेहत महकमे के अधिकारी और डॉक्टर हलकान नजर आ रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ वीके साहू ने बताया कि तेज बुखार और डायरिया का प्रकोप फैला है। इसके लिए जिला अस्पताल में सभी सुविधाएं मौजूद हैं। सभी मरीजों का इलाज हो रहा है। टीकाकरण में भी हम आगे हैं। कहीं कोई लापरवाही नहीं है।
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तेज बुखार से एक और मासूम की मौत
10 दिन पहले दो बच्चों को निगल चुकी बीमारी
गोला गोकर्णनाथ खीरी। अलीगंज रोड स्थित गांव द्वारिकागंज निवासी सतीश कुमार के साढ़े तीन वर्षीय पुत्र जितिन की बुधवार की सुबह तेज बुखार से जान चली गई। दो सप्ताह पहले जितिन को बुखार के साथ गले में गांठ और खांसी की शिकायत थी। सतीश ने बच्चे को सीएचसी गोला से लेकर लखीमपुर और लखनऊ के निजी अस्पताल में दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ और जितिन की मौत हो गई। गांव के लोग इस बीमारी का कारण गांव में फैली गंदगी मानकर शासन प्रशासन को कोस रहे हैं। लोगों ने कहा कि गांव में सफाई कर्मी नहीं आता है। सड़कें और नाली न होने से जगह-जगह कूड़े के ढेर और कीचड़ भरा हुआ है, जिससे यह संक्रमण जनित जानलेवा बीमारियां पैदा हो रही हैं और मासूमों की जान जा रही है।
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तेज बुखार और डायरिया से भर्ती हो रहे बच्चे
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में तेज बुखार और डायरिया से पीड़ित बच्चे रोजाना भर्ती हो रहे हैं। तमाम बच्चे रेफर कर दिए जाते हैं। यहां तैनात स्टाफ की माने तो गंभीर हालत वाले बच्चे रेफर किए जाते हैं, जबकि हकीकत ये है कि डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें समुचित इलाज नहीं दिया जा पा रहा है, जिससे तमाम तीमारदार ही मरीज को लेकर यहां से भाग लेते हैं, जबकि कमजोर तबके के लोग मरीजों को लिए पड़े रहते हैं। आलम यह है कि मरीजों के तीमारदार बताते हैं कि डॉक्टर देखने तक नहीं आए, वार्ड ब्वाय और अन्य स्टाफ ही दवाएं दे रहा है। बुधवार को चिल्ड्रेन वार्ड में करीब 40 मरीज भर्ती थे, जिसमें से 26 तेज बुखार से, जबकि 14 डायरिया से पीड़ित मिले।
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बच्चा वार्ड में ये बच्चे मिले भर्ती
1. लक्ष्मी (8) पुत्री अरुण कश्यप
2. अजय (9) पुत्र रामपाल
3. ध्रुव (12) पुत्र शमेश्वर सिंह
4. शैलेंद्र (13) पुत्र श्रीकृष्ण
5. बर्षा (6) पुत्र अखिलेश
6. गौरी (3) पुत्री राकेश
7. पारा (5) पुत्र अशोक
8. अरुण कुमार (9) पुत्र पप्पू
9. लल्ली (10) पुत्री दुलारे
10. नैंसी (6) पुत्री प्रमोद
पहले इन बच्चों गई जान
23 अगस्त : गोला की ग्राम पंचायत लाल्हापुर के मोहल्ला हफीजपुर में नजर अली का 11 वर्षीय पुत्र मोहम्मद अफजल की मौत
23 अगस्त : गोला के ही लाल्हापुर के मोहल्ला हफीजपुर के नाजिर अली की 10 वर्षीय पुत्री सोनी की मौत
गांव में है गंदगी का साम्राज्य
गोला गोकर्णनाथ। अमर उजाला ने 26 अगस्त को गांव में चिकित्सा शिविर और टीकाकरण बंद करने और रहस्यमयी बीमारी डिफ्थीरिया होने पर समाचार प्रकाशित किया था। इसके बावजूद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नहीं चेते। गांव में जहां एक ओर गंदगी के कारण मासूमों की जान जा रही है वहीं गांव में लगे कूड़े के ढेर और कीचड़ में बजबजाते कीड़े जानलेवा बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं। गांव में साफ सफाई न होने से सड़कों और लगे नलों के किनारे गंदगी फैली रहती है। सरकार की स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजना भी यहां बेअसर साबित हुई है। कहने को इस गांव को सांसद रविप्रकाश वर्मा ने गोद लिया है किंतु तीन मासूमों की मौत होने के बाद वह और कोई आला अफसर अब तक गांव नहीं पहुंचा है।
ये हैं लक्षण
बच्चे को भूख लगना बंद हो जाती है। गले में दर्द होता है। बाद में बुखार आ जाता है और फिर गले में गिल्टियां प्रतीत होती हैं। सांस लेने में दिक्कत और उल्टियां आती हैं।
तो कागजों में हो गया टीकाकरण
जिला अस्पताल में तेज बुखार के पीड़ित किसी भी मरीज का टीकाकरण नहीं हुआ है, जबकि जिला अस्पताल में वैक्सीन का स्टाक फुल है। इतना ही नहीं दावा है कि सभी सीएचसी में प्रचुर मात्रा में जेई और टाइफाइड के टीके मौजूद हैं। इतना ही नहीं सीएमओ का दावा है कि टीकाकरण में वह अव्वल हैं, जबकि गांवों में हकीकत विपरीत है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कागजों में ही टीकाकरण करा दिया गया।
कसबा बांकेगंज निवासी अरुण कश्यप की आठ वर्षीय पुत्री लक्ष्मी हो, ब्लाक फूलबेहड़ के गांव बड़ागांव मेंहदी निवासी रामपाल का आठ वर्षीय पुत्र अजय, धौरहरा के गांव कंधरापुर निवासी श्रीकृष्ण का 13 वर्षीय पुत्र शैलेंद्र हो या फिर पलिया के गांव बसंतापुर निवासी अखिलेश की छह वर्षीय पुत्री बर्षा किसी भी बच्चे का टीकाकरण नहीं हुआ। इतना ही नहीं बच्चा वार्ड में एक भी तीमारदार ऐसा नहीं मिला, जिसने यह बताया हो कि उनके गांव में टीकाकरण किया गया है, जबकि सीएमओ डॉ वीके साहू कहते हैं कि टीकाकरण में हम आगे हैं। जिला मुख्यालय से लेकर सीएचसी में प्रचुर मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। ऐसे में एक ही सवाल सामने आता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने कागजों में ही टीकाकरण की वैक्सीन खफा डाली। फिलहाल यह मामला उच्चस्तरीय जांच का हो सकता है। यहां अब तेज बुखार का प्रकोप फैला तो सेहत महकमे के अधिकारी और डॉक्टर हलकान नजर आ रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ वीके साहू ने बताया कि तेज बुखार और डायरिया का प्रकोप फैला है। इसके लिए जिला अस्पताल में सभी सुविधाएं मौजूद हैं। सभी मरीजों का इलाज हो रहा है। टीकाकरण में भी हम आगे हैं। कहीं कोई लापरवाही नहीं है।