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Lakhimpur Kheri News: स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों को देखा और समझा
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लखीमपुर खीरी। 1857 की क्रांति से शुरू हुए स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष की पूरी गाथा उससे जुड़े दस्तावेजों के जरिये मंगलवार को विद्यार्थियों और अन्य लोगों ने देखी और समझी।
राजकीय अभिलेखागार, संस्कृति विभाग लखनऊ की ओर से युवराज दत्त महाविद्यालय में उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों की लगाई गई प्रदर्शनी को इतिहास में रुचि रखने वाले विद्यार्थी व अन्य लोग भी देखने पहुंचे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की गाथाओं को अभिलेखों के जरिये देखा और समझा।
इस दौरान मुख्य वक्ता राजनीति विज्ञान के असिस्टेंट प्रो. विजय प्रताप सिंह ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रकृति व इतिहास लेखन की प्रवृत्तियों पर चर्चा की। उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार लखनऊ से आए हुए आर्काइव व कंजर्वेटर शैलेंद्र कुमार, संतोष व शिव कुमार ने इतिहास लेखन में अभिलेखों के उपयोग, रखरखाव, आर्काइव में इतिहास विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसरों की जानकारी दी।
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वाईडी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. हेमंत पाल ने इतिहास लेखन में आर्काइव का समुचित उपयोग करने की जानकारी दी और इस बात पर जोर दिया कि अभिलेखागार व महाविद्यालय के बीच करार किया जाएगा कि भविष्य में भी इस तरह के प्रदर्शनी लगाई जाती रहे। छात्रा जैनब तथा शोध छात्र यशवंत ने भी विचार रखे।
इससे पहले मुख्य अतिथि आर्य कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. गीता शुक्ला ने फीता काटकर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उनके साथ वाईडी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. हेमंत पाल, डॉ. नूतन सिंह, डॉ. सुभाष चंद्रा, डॉ. जेएन सिंह समेत कई शिक्षक मौजूद रहे।
यह प्रदर्शनी कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नूतन सिंह के नेतृत्व में लगाई गई। बाद में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। संचालन इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रो. रचित कुमार ने किया।
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राजकीय अभिलेखागार, संस्कृति विभाग लखनऊ की ओर से युवराज दत्त महाविद्यालय में उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों की लगाई गई प्रदर्शनी को इतिहास में रुचि रखने वाले विद्यार्थी व अन्य लोग भी देखने पहुंचे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की गाथाओं को अभिलेखों के जरिये देखा और समझा।
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इस दौरान मुख्य वक्ता राजनीति विज्ञान के असिस्टेंट प्रो. विजय प्रताप सिंह ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रकृति व इतिहास लेखन की प्रवृत्तियों पर चर्चा की। उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार लखनऊ से आए हुए आर्काइव व कंजर्वेटर शैलेंद्र कुमार, संतोष व शिव कुमार ने इतिहास लेखन में अभिलेखों के उपयोग, रखरखाव, आर्काइव में इतिहास विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसरों की जानकारी दी।
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वाईडी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. हेमंत पाल ने इतिहास लेखन में आर्काइव का समुचित उपयोग करने की जानकारी दी और इस बात पर जोर दिया कि अभिलेखागार व महाविद्यालय के बीच करार किया जाएगा कि भविष्य में भी इस तरह के प्रदर्शनी लगाई जाती रहे। छात्रा जैनब तथा शोध छात्र यशवंत ने भी विचार रखे।
इससे पहले मुख्य अतिथि आर्य कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. गीता शुक्ला ने फीता काटकर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उनके साथ वाईडी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. हेमंत पाल, डॉ. नूतन सिंह, डॉ. सुभाष चंद्रा, डॉ. जेएन सिंह समेत कई शिक्षक मौजूद रहे।
यह प्रदर्शनी कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नूतन सिंह के नेतृत्व में लगाई गई। बाद में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। संचालन इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रो. रचित कुमार ने किया।