लखीमपुर खीरी: दोमुंहे सांप की तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई, निलंबित पुलिसकर्मियों पर समेत नौ पर रिपोर्ट
लखीमपुर खीरी में दोमुंहे सांप की तस्करी मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के बाद एसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने बड़ी कार्रवाई की है। मैगलगंज के तत्कालीन इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। इन पुलिसकर्मियों पर युवकों के परिजनों से क्यूआर कोड के जरिये दो लाख रुपये मंगाने का आरोप है।
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लखीमपुर खीरी के मैगलगंज में दोमुंहे सांप की तस्करी के मामले में तीन युवकों की गिरफ्तारी और तीन को छोड़ने के प्रकरण में पुलिसकर्मियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के बाद एसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने बड़ी कार्रवाई की है। निलंबित किए गए मैगलगंज के तत्कालीन इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। मामले में युवकों के परिजनों से क्यूआर कोड के जरिये दो लाख रुपये मंगाने के आरोप में संबंधित खाते के धारक को भी आरोपी बनाया गया है।
रिपोर्ट में मैगलगंज के तत्कालीन इंस्पेक्टर संजीव कुमार सिंह, दरोगा शुभम कुमार, मुख्य आरक्षी देवेंद्र सिंह यादव और आरक्षी देवेंद्र सिसोदिया, राहुल कुमार, रोहित, विश्वास सिंह और अमित कुमार यादव को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पुलिसकर्मियों को मामले में पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
तीन गिरफ्तार, तीन को छोड़ने के आरोप की जांच
मैगलगंज पुलिस ने दोमुंहे सांप की तस्करी के मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से दो जीवित रेड सैंड बोआ सांप, मोबाइल फोन और वाहन बरामद किए जाने का दावा किया गया था। पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों के फरार होने की बात कही थी। इसके बाद गिरफ्तार युवकों के परिजनों ने पुलिस पर उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखने और रुपये मंगाने के आरोप लगाए थे।
क्यूआर कोड से मंगाई गई रकम भी जांच के दायरे में
परिजनों ने आरोप लगाया था कि युवकों को एक निजी मकान में रखकर उनके घर पर कॉल कराया गया और करीब दो लाख रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए। रकम जिस क्यूआर कोड के माध्यम से मंगाई गई, उस खाते के धारक को भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज रिपोर्ट में आरोपी बनाया गया है। इससे प्रकरण में कथित रकम के लेनदेन की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।
एसपी डॉ. ख्याति गर्ग की कार्रवाई के बाद अब दर्ज रिपोर्ट में नामजद पुलिसकर्मियों और क्यूआर कोड धारक की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों, रुपये के लेनदेन तथा गिरफ्तार और छोड़े गए लोगों से जुड़े तथ्यों को जांच में शामिल किया गया है।