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सारस के घोंसले बचाने पर किसानों को मानदेय
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 24 Apr 2015 07:05 PM IST
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अब किसान सारस के घाेंसले और अंडों को बचाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। इसके एवज में उन्हें मानदेय मिलेगा। सारस संरक्षण समिति ने राज्य पक्षी सारस के संरक्षण और संबर्द्धन में जनसहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम शुरू किया है। पिछले साल इस कार्यक्रम में वन विभाग को अच्छी सफलता मिली थी।
डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि किसी खेत या बाग में सारस के घोंसले होने की सूचना जो किसान देगा, वन विभाग उसी को इसके संरक्षण की जिम्मेदारी देगा। इससे पहले वनकर्मी घोंसले का स्थलीय निरीक्षण कर उसकी स्थिति देखेंगे। जो किसान सारस के घोंसले और अंडे का संरक्षण करेंगे उस किसान को 1500 रुपया प्रतिमाह की दर से तीन माह तक मानदेय दिया जाएगा।
डीएफओ ने बताया कि इस समय सारस के नेस्टिंग का सीजन है। सारस अपने घोंसले बना रहे हैं। जागरूकता की कमी और अनजाने में अक्सर लोग इन घोंसलों को नष्ट कर देते हैं। कभी-कभी जानवर इनके अंडों को खा जाते हैं या फोड़ देते हैं। किसान जब इनकी रखवाली करेंगे तो उनकी आय बढ़ने के साथ उनमें सारस पक्षी के प्रति लगाव बढ़ेगा और दूसरे लोग भी जागरूक होंगे।
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पिछले साल दो किसानों ने बढ़ाया था कदम
पिछले साल मोहम्मदी रेंज के मेंहदी निवासी किसान चंद्रहास और विशाखापुर के जसदेव सिंह ने सारस संरक्षण की दिशा में अपने कदम बढ़ाए थे। इन किसानों ने डीएफओ साउथ नीरज कुमार को सारस के घोंसले की सूचना दी। स्थलीय निरीक्षण के बाद इन्हें घोसलों और अंडों के संरक्षण की जिम्मेदारी दी गई। सारस संरक्षण समिति की ओर से दोनों किसानों को नौ हजार रुपये का मानदेय प्रदान किया गया।
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डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि किसी खेत या बाग में सारस के घोंसले होने की सूचना जो किसान देगा, वन विभाग उसी को इसके संरक्षण की जिम्मेदारी देगा। इससे पहले वनकर्मी घोंसले का स्थलीय निरीक्षण कर उसकी स्थिति देखेंगे। जो किसान सारस के घोंसले और अंडे का संरक्षण करेंगे उस किसान को 1500 रुपया प्रतिमाह की दर से तीन माह तक मानदेय दिया जाएगा।
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डीएफओ ने बताया कि इस समय सारस के नेस्टिंग का सीजन है। सारस अपने घोंसले बना रहे हैं। जागरूकता की कमी और अनजाने में अक्सर लोग इन घोंसलों को नष्ट कर देते हैं। कभी-कभी जानवर इनके अंडों को खा जाते हैं या फोड़ देते हैं। किसान जब इनकी रखवाली करेंगे तो उनकी आय बढ़ने के साथ उनमें सारस पक्षी के प्रति लगाव बढ़ेगा और दूसरे लोग भी जागरूक होंगे।
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पिछले साल दो किसानों ने बढ़ाया था कदम
पिछले साल मोहम्मदी रेंज के मेंहदी निवासी किसान चंद्रहास और विशाखापुर के जसदेव सिंह ने सारस संरक्षण की दिशा में अपने कदम बढ़ाए थे। इन किसानों ने डीएफओ साउथ नीरज कुमार को सारस के घोंसले की सूचना दी। स्थलीय निरीक्षण के बाद इन्हें घोसलों और अंडों के संरक्षण की जिम्मेदारी दी गई। सारस संरक्षण समिति की ओर से दोनों किसानों को नौ हजार रुपये का मानदेय प्रदान किया गया।