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सत्संग से मनुष्य के जीवन में आती है शांति : असंग देव
Tue, 24 Jun 2025 12:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 24 Jun 2025 12:08 AM IST
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कबीरधाम में प्रवचन करते संत असंग देव जी महराज। आश्रम
अलीगंज। कबीरधाम मुस्तफाबाद में राष्ट्रीय संत असंग देव के सानिध्य में हो रहे प्रवचन के अंतिम दिन संतों ने जीवन में सत्संग का महत्व बताया। कार्यक्रम की शुरूआत महामंगल आरती से हुई।
राष्ट्रीय संत असंग देव जी ने कहा कि सबके जीवन कल्याण के लिए शाकाहारी जीवन जीना चाहिए। बुराइयों को छोड़कर अपना सुधार करना चाहिए। सत्संग से जो सुख मिलता है, उससे जीवन का कण-कण खिल उठता है। सत्संग से मनुष्य के जीवन में सुख और शांति आती है। दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं।
बोले, मनुष्य जब सभी बुराइयों को छोड़कर सद्मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है तो अपने आप ही जीवन में शांति आ जाती है। मानव जीवन केवल खाने-पीने भोगने के लिए नहीं अपितु समाज तथा लोक कल्याण की भावनाओं से ओत प्रेत होकर अपना तथा समाज का कल्याण करने के लिए है।
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उन्होंने सामाजिक जीवन का संदेश देते हुए कहा कि जो मानव गृहस्थ आश्रम का अनुपालन करते हुए प्रभु से प्राप्त जीवन को सामाजिक क्रियाओं में व्यतीत करता है, उसका जीवन साधु संतों के ही समान होता है। इस दौरान संत बाबा हरीश दास, पवीनदास, चंद्रहास दास, विशालदास आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय संत असंग देव जी ने कहा कि सबके जीवन कल्याण के लिए शाकाहारी जीवन जीना चाहिए। बुराइयों को छोड़कर अपना सुधार करना चाहिए। सत्संग से जो सुख मिलता है, उससे जीवन का कण-कण खिल उठता है। सत्संग से मनुष्य के जीवन में सुख और शांति आती है। दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं।
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बोले, मनुष्य जब सभी बुराइयों को छोड़कर सद्मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है तो अपने आप ही जीवन में शांति आ जाती है। मानव जीवन केवल खाने-पीने भोगने के लिए नहीं अपितु समाज तथा लोक कल्याण की भावनाओं से ओत प्रेत होकर अपना तथा समाज का कल्याण करने के लिए है।
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उन्होंने सामाजिक जीवन का संदेश देते हुए कहा कि जो मानव गृहस्थ आश्रम का अनुपालन करते हुए प्रभु से प्राप्त जीवन को सामाजिक क्रियाओं में व्यतीत करता है, उसका जीवन साधु संतों के ही समान होता है। इस दौरान संत बाबा हरीश दास, पवीनदास, चंद्रहास दास, विशालदास आदि मौजूद रहे।