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यात्री उमड़े, बुधवार को भी रोडवेज की व्यवस्था ध्वस्त
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बस में बैठने को चलती बस के पीछे दौड़ते यात्री। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। रोडवेज बस अड्डे पर बुधवार को भी यात्रियों की भीड़ रही। इससे रोडवेज की व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। लखनऊ, सीतापुर, गोला, शाहजहांपुर से लेकर ऐरा खमरिया तक जाने के लिए यात्री बस अड्डे पर घंटों परेशान रहे। आलम यह रहा कि बस के आते ही उसमें सीट पाने के लिए लोगों में मारामारी मच जाती। गेट से अंदर जाने की जगह न मिलने पर यात्रियों को खिड़की के रास्ते बस में घुसने को मजबूर होना पड़ा।
रविवार को रक्षाबंधन था और सोमवार को सार्वजनिक अवकाश हो गया। मंगलवार को पीईटी का पेपर होने के कारण त्योहार पर घर आए लोग वापसी नहीं कर सके। इसलिए लोगों ने बुधवार को गंतव्य की ओर रवानगी शुरू की। इससे बस अड्डे पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ लग गई। रोडवेज प्रशासन ने अपनी सभी 55 बसों को लगाया, बावजूद इसके भीड़ कम नहीं हुई। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत धौरहरा रूट पर जाने वाले यात्रियों खासकर महिलाओं को हुई, क्योंकि इस रूट की बसों का सबसे ज्यादा अकाल रहा।
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मुसीबत बन रही बसों की कम संख्या
लखीमपुर डिपो में पहले 84 बसें थी, लेकिन अब निगम द्वारा अनुबंध न किए जाने से इनकी संख्या घटकर 55 रह गई है। जबकि यात्रियों की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है। ऐसे में डिपो प्रशासन के परेशानी हो रही है।
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पीईटी पेपर से लखीमपुर डिपो की बल्ले बल्ले
मंगलवार को पीईटी का पेपर हुआ। इससे लखीमपुर डिपो की बल्ले बल्ले हो गई। लखीमपुर डिपो की बसों से मंगलवार को 11263 यात्रियों ने सफर किया। इससे नौ लाख से अधिक आय हुई। जबकि आम दिनों में यात्रियों की संख्या आठ हजार तक रहती थी। वहीं बुधवार को उमड़ी भीड़ भी लखीमपुर डिपो के लिए वरदान साबित हुई।
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डिपो में 55 बसें है। जो रूट पर भेजी गईं। यात्रियों की भीड़ देखतेे हुए जो बसें वापस आईं उन्हें फिर से लखनऊ और धौरहरा रूट पर भेजा गया। फिर भी भीड़ कम न होने पर गोला और सीतापुर डिपो से भी बसें मंगवाकर यात्रियों को गंतव्य तक भेजवाया गया।
-नफासत अली, केंद्र प्रभारी रोडवेज बस अड्डा लखीमपुर
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रविवार को रक्षाबंधन था और सोमवार को सार्वजनिक अवकाश हो गया। मंगलवार को पीईटी का पेपर होने के कारण त्योहार पर घर आए लोग वापसी नहीं कर सके। इसलिए लोगों ने बुधवार को गंतव्य की ओर रवानगी शुरू की। इससे बस अड्डे पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ लग गई। रोडवेज प्रशासन ने अपनी सभी 55 बसों को लगाया, बावजूद इसके भीड़ कम नहीं हुई। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत धौरहरा रूट पर जाने वाले यात्रियों खासकर महिलाओं को हुई, क्योंकि इस रूट की बसों का सबसे ज्यादा अकाल रहा।
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मुसीबत बन रही बसों की कम संख्या
लखीमपुर डिपो में पहले 84 बसें थी, लेकिन अब निगम द्वारा अनुबंध न किए जाने से इनकी संख्या घटकर 55 रह गई है। जबकि यात्रियों की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है। ऐसे में डिपो प्रशासन के परेशानी हो रही है।
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पीईटी पेपर से लखीमपुर डिपो की बल्ले बल्ले
मंगलवार को पीईटी का पेपर हुआ। इससे लखीमपुर डिपो की बल्ले बल्ले हो गई। लखीमपुर डिपो की बसों से मंगलवार को 11263 यात्रियों ने सफर किया। इससे नौ लाख से अधिक आय हुई। जबकि आम दिनों में यात्रियों की संख्या आठ हजार तक रहती थी। वहीं बुधवार को उमड़ी भीड़ भी लखीमपुर डिपो के लिए वरदान साबित हुई।
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डिपो में 55 बसें है। जो रूट पर भेजी गईं। यात्रियों की भीड़ देखतेे हुए जो बसें वापस आईं उन्हें फिर से लखनऊ और धौरहरा रूट पर भेजा गया। फिर भी भीड़ कम न होने पर गोला और सीतापुर डिपो से भी बसें मंगवाकर यात्रियों को गंतव्य तक भेजवाया गया।
-नफासत अली, केंद्र प्रभारी रोडवेज बस अड्डा लखीमपुर