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दुधवा में खंगाला जा रहा रिकॉर्ड, कई रेंजरों पर गिर सकती है गाज

Fri, 06 Aug 2021 12:59 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 12:59 AM IST
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Records being searched in Dudhwa, many rangers may be blamed
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में शिकार और अवैध कटान की आपराधिक घटनाओं में वनाधिकारियों की संलिप्तता की बात उजागर होने के बाद दुधवा में भी लंबे समय से जमे रेंजरों और डिप्टी रेंजरों के रिकॉर्ड खंगाले जाने लगे हैं। इस दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पता चला है कि दुधवा में कई रेंज का कार्यभार ऐसे डिप्टी रेंजर संभाल रहे हैं, जिन्होंने अपनी पूरी नौकरी दुधवा में काट दी।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल तीन प्रभाग दुधवा नेशनल पार्क, कर्तनिया घाट और बफर जोन हैं। दुधवा नेशनल पार्क में कुल 10 रेंज हैं, जिनमें मौजूदा समय में सिर्फ चार रेंजर तैनात हैं। छह रेंजों का कार्यभार प्रभारी रेंजर के रूप में अरसे से दुधवा में जमे डिप्टी रेंजर संभाल रहे हैं।
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बफर जोन की नौ रेंज में पांच रेंज का कार्यभार डिप्टी रेंजर संभाल रहे हैं। कर्तनिया घाट प्रभाग के सात रेंजों में सिर्फ पांच रेंज में ही रेंजर हैं, लेकिन दो रेंजों की कमान डिप्टी रेंजरों के हाथों में है। इनमें अधिकांश डिप्टी रेंजर ऐसे हैं जिनका दुधवा के बाहर कभी तबादला हुआ ही नहीं।
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किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी रेंज में रेंजर की तैनाती तो है, लेकिन बीमारी के कारण रेंजर के लंबी छुट्टी पर होने की वजह से डिप्टी रेंजर कार्यभार संभाल रहे हैं। इस डिप्टी रेंजर की पूरी नौकरी दुधवा में ही बीती। किशनपुर में डिप्टी रेंजर का कार्यभार देख रहे डिप्टी रेंजर दुधवा नेशनल पार्क में ही फॉरेस्टर रहे। कुछ दिन कर्तनियाघाट में रहने के बाद अब डिप्टी रेंजर के रूप में किशनपुर रेंज का काम संभाल रहे हैं।
सठियाना, दक्षिण सोनारीपुर, गौरीफंटा, दुधवा और पर्यटन रेंज में लंबे अरसे से कोई रेंजर नहीं है। इनकी जगह डिप्टी रेंजर तैनात हैं। इनमें से अधिकांश ने अपनी पूरी नौकरी दुधवा टाइगर रिजर्व में ही काट डाली। यहीं फॉरेस्टगार्ड, फिर फॉरेस्टर रहे और अब डिप्टी रेंजर बनकर प्रभारी रेंजर बने बैठे हैं। लंबे समय तक एक ही जगह में तैनात रहते हुए इन्होंने जिले में अच्छे संपर्क भी बना लिए हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की मैलानी, भीरा, संपूर्णानगर और धौरहरा में रेंजर की तैनाती है। बाकी पलिया, मझगईं, उत्तर निघासन, दक्षिण निघासन और आरएसपी जैसी महत्वपूर्ण रेंजों में रेंजरों की तैनाती न होने से डिप्टी रेंजर ही काम देख रहे हैं। यह सभी डिप्टी रेंजर काफी लंबे अरसे से दुधवा टाइगर रिजर्व में ही तैनात रहे हैं। अब अरसे से दुधवा टाइगर रिजर्व में जमे रेजरों और डिप्टी रेंजरों के रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में इनके तबादले नहीं किए गए। साथ ही उनके संपर्कों की भी छानबीन हो रही है।
पीटीआर में एक रेंजर को फील्ड से हटाकर दफ्तर में लगाया
पिछले माह दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में अवैध कटान और शिकार के गोपनीय इनपुट के आधार पर इन गड़बड़ियों के लिए एक ही जगह जमे रेंजर और डिप्टी रेंजर को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसके तहत पिछले दिनों पीटीआर की एक रेंज में 20 साल से जमे रेंजर को फील्ड से हटाकर पीटीआर दफ्तर में भेजा गया है। वहीं, अब दुधवा टाइगर रिजर्व को लेकर भी यहां बरसों से जमे रेंजरों व अन्य कर्मियों का वन मुख्यालय रिकॉर्ड खंगाल रहा है।

दुधवा टाइगर रिजर्व में रेंजरों की कमी होने के कारण डिप्टी रेंजरों को चार्ज दिया गया है। समय-समय पर दुधवा टाइगर रिजर्व के अंदर आंतरिक तबादले किए जाते हैं। जोन के बाहर तबादले का अधिकार दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन को नहीं है। लंबे अरसे से दुधवा में तैनात फील्ड अधिकारियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
- मनोज सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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