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दुधवा में धधक रहीं भट्ठियां: जंगल में बन रही कच्ची शराब, बेखबर रहा वन विभाग; बाघों की मौत के बाद हुआ खुलासा

Tue, 27 Jun 2023 02:59 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 27 Jun 2023 02:59 PM IST
सार

दुधवा टाइगर रिजर्व में चार बाघों की मौत के बाद अफसर बदले और फील्ड स्टाफ बदला। इसके बाद पेट्रोलिंग तेज हुई तो कच्ची शराब बनाए जाने के अवैध धंधे का खुलासा हुआ। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने अब अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

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Raw liquor being made in the forest of Dudhwa Tiger Reserve
जंगल में बनाई जा रही कच्ची शराब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व के कोरजोन, बफरजोन और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के जंगल में कच्ची शराब बनाने का अवैध धंधा लंबे अरसे से चल रहा है, लेकिन वन विभाग और पुलिस को भनक नहीं हुई। जब दुधवा टाइगर रिजर्व में 40 दिन में चार बाघों की मौत के बाद अफसर बदले और फील्ड स्टाफ बदला। इसके बाद पेट्रोलिंग तेज हुई तो इस काले कारनामे का खुलासा हुआ। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने अब अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

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दुधवा टाइगर रिजर्व के दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर सेंक्चुरी, बफरजोन और दक्षिण खीरी वन प्रभाग से सटे गांव के लोग जंगल से घास-फूस, कटरुआ, धरती के फूल आदि निकालने की अवांछित गतिविधियों में लिप्त हैं। साथ ही जंगल से होकर गुजरी शारदा, सुहेली, कठिना, उल्ल नदियों समेत नालों और तालाबों के किनारे कच्ची शराब बनाने का भी धंधा कर रहे हैं। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज की कठिना नदी, दुधवा नेशनल पार्क की सुहेली नदी समेत भारत-नेपाल सीमा से सटी गौरीफंटा रेंज की मोहाना नदी किनारे कच्ची शराब की कई भट्ठियां धधक रही हैं।
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नदी-नालों में छिपा देते हैं अवैध शराब 

अवैध धंधा करने वाले जंगल के अंदर जल स्त्रोतों के पास शराब बनाने के बाद वहीं झाड़ियों में या बोरियों में बोतलें भरकर नदी नालों में छिपा देते हैं। बाद में धीरे-धीरे उन्हें बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से कच्ची शराब का धंधा फल-फूल रहा है। इसके भी इनपुट अधिकारियों को मिले हैं।

ग्रामीणों ने इस बाबत कई बार वन विभाग के अधिकारियों और आबकारी विभाग से शिकायत की थी। इस पर पिछले साल वन विभाग और आबकारी विभाग ने जंगल में संयुक्त रूप से कच्ची के कारोबार का भंडाफोड़ करने के लिए अभियान भी चलाया था। इससे पहले कि टीमें धंधेबाजों तक पहुंचती, वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों ने उन्हें सूचित कर दिया। इसके चलते इस अभियान में कुछ हाथ नहीं लगा। 

जंगल में शिकार और कटान भी

वन विभाग के अधिकारियों को इस बात के भी इनपुट मिले हैं कि कच्ची शराब का धंधा करने वाले मौका पाकर मांस के लिए जंगली सुअर और हिरनों का शिकार भी कर रहे हैं। इसके अलावा शराब बनाने के लिए कीमती पेड़ों का कटान भी चोरी छिपे कर रहे हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व में नेपाल से सटे जंगल इस तरह की अवांक्षित गतिविधियों का केंद्र बन गया है।

दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित वर्मा ने बताया कि जंगल के अंदर नदी नालों के किनारे अवैध रूप से कच्ची शराब बनने के इनपुट मिले हैं। 28 जून से पूरे जंगल में अवैध रूप से बनने वाली कच्ची शराब के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य में वनकर्मियों की किसी तरह संलिप्तता पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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जिला आबकारी अधिकारी राजवीर सिंह ने बताया कि जंगलों में कच्ची शराब की जानकारी मिली है। सभी इंस्पेक्टरों से फीडबैक लिया जा रहा है, जो भी जानकारी मिल रही है, उसके आधार पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जल्द ही पुलिस और आबकारी विभाग के साथ मिलकर कच्ची शराब के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा।

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