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आज से खुल रहे हैं प्राइमरी स्कूल, अभिभावक असमंजस में
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दूसरे साल चौपट शिक्षा व्यवस्था को वापस पटरी पर लाने की कवायद तेज
कई स्कूलों में की गई है पहले दिन आने वाले बच्चों के स्वागत की तैयारी
लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमण के चलते 2020 से चौपट हुई शिक्षा व्यवस्था को 2021 में फिर से पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है। कई चरणों में कक्षावार स्कूल-कॉलेज खोले जा रहे हैं। इसी क्रम में कक्षा एक से पांच तक के स्कूल बुधवार (एक सितंबर 2021) से कोविड गाइडलाइन के तहत खुल जाएंगे। कई स्कूलों में पहले दिन स्कूल आने पर बच्चों का स्वागत किए जाने की भी तैयारी है। वहीं सितंबर-अक्तूबर में संभावित कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए अभिभावक असमंजस में हैं कि वह बच्चों को स्कूल भेजे या नहीं।
मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद से सभी विद्यालय बंद चल रहे थे। अगस्त 2021 में कोरोना संक्रमण कम होने और टीकाकरण की रफ्तार तेज होने के बाद सरकार ने स्कूल-कॉलेज खोलने का फैसला किया। कक्षा एक से पांच तक के छात्रों के अभिभावकों से सहमति पत्र भरवाने का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। हालांकि विभागीय अधिकारियों की कहना है कि स्कूल खुलने के साथ ही अभिभावकों से सहमति पत्र भरवाने का काम प्रारंभ हो जाएगा। यहां बता दें कि पूर्व में खोले गए बेसिक के स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 10 से 30 फीसदी दर्ज की जा रही है, जो अधिकारियों की चिंता का विषय है।
ऑनलाइन पढ़ाई का भी रहेगा विकल्प
कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका के मद्देनजर शासन द्वारा जारी गाइड लाइन में कहा गया है कि जो अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजना नहीं चाहते वो अपने बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प चुन सकते हैं।
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प्राइवेट स्कूलों में फीस के साथ ही वाहन शुल्क जमा करने का दबाव
परिषदीय स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क होने से इनके छात्रों व अभिभावकों को भारी-भरकम फीस जमा करने का तनाव नहीं है। वहीं प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधन ने अभिभावकों से सहमति पत्र भरवाने से पहले फीस और वाहन शुल्क जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद रहने का भी शुल्क वसूला जा रहा है, तो वहीं वाहन शुल्क के लिए तीन महीने की रकम एकसाथ जमा कराई जा रही है।
कक्षा एक से पांच तक के सभी परिषदीय व मान्यता प्राप्त स्कूल बुधवार से खुलने जा रहे हैं। बच्चों को छह फुट की दूरी पर बैठाने के निर्देश हैं। बच्चे और शिक्षक कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करेंगे। सभी बीईओ को सुबह आठ बजे से विद्यालयों का निरीक्षण अनिवार्य रूप से करने के निर्देश हैं, जिसकी फोटा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करेंगे।
- डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए
स्कूल तो आज से खुल रहे हैं। मगर, बच्चों को विद्यालय भेजने का अभी निर्णय नहीं लिया है, क्योंकि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए किसी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहती।
- सरिता वर्मा, लखीमपुर
स्कूल भले ही बुधवार से खुल जाएं, लेकिन बेटी को अभी स्कूल कदापि नहीं भेजेंगे, क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए बेटी को स्कूल भेजने का औचत्य ही नहीं।
- दीपिका सोनी, मिश्राना, लखीमपुर
स्कूल प्रबंधन कोरोना से बचाव के पर्याप्त इंतजाम होने का दावे कर रहा है। मगर घर से स्कूल और स्कूल से घर के बीच की जिम्मेदारी कौन लेगा। इसलिए कुछ दिन देखने के बाद ही स्कूल भेजूंगी।
- सरिता गुप्ता, नई बस्ती, लखीमपुर
फिलहाल अभी कुछ दिन तो स्कूल नहीं भेजेंगें, क्योंकि बच्चों के मामले में रिस्क बिल्क़ुल नहीं लेंगे। सुरक्षा पहले है और पढ़ाई बाद में।
- आरती गौड़, काशीनगर, लखीमपुर
बेटी अविका राजपूत कक्षा एक में पढ़ रही है। शासन की गाइड लाइन के अनुरूप बेटी को स्कूल भेजने के पक्ष में हूं। स्कूल की तरफ से कोरोना से बचाव की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
- पिंकी राजपूत, गोला
बेटी देविका गुप्ता क्लास केजी में पढ़ती है। स्कूल में बच्चों के बीच में पर्याप्त रूप से दूरी, क्लास रूम में सैनिटाइजेशन और टीचिंग से साथ सहयोगी स्टाफ का वैक्सीनेशन जरूरी है।
- पूजा गुप्ता, गोला
नर्सरी केजी के बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में हम नहीं हैं। कोरोना काल में गाइडलाइन के हिसाब से स्कूल वाले बच्चों का कितना ध्यान रख पाएंगे। यह भी विचारणीय है।
- शिवानी गुप्ता, गोला
बेटा कुश कक्षा 5 में पढ़ता है। बच्चों को स्कूल भेजना किसी भी अभिभावक के लिए एक दुख स्वप्न जैसा ही है। जब तक सरकार बच्चों के लिए वैक्सीन की व्यवस्था और उचित मानक निर्देशित नही कर देती है तब तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहिए।
- ज्योत्सना अग्निहोत्री, गोला
बेटा जीयूस फर्स्ट में पढ़ता है। कोरोना बीमारी के चलते बच्चे दो साल से स्कूल में पढ़ने नहीं जा सके, जिसके चलते उनके भविष्य में पढ़ाई को लेकर एक अव्यवस्था पनप गई है। सरकार को सुरक्षा की उचित व्यवस्था बनानी चाहिये।
- शबा अग्निहोत्री, गोला
विद्यालय खोलने का निर्णय सही समय पर लिया गया है। बच्चों को पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। विद्यालय में कोविड प्रोटोकॉल का पालन हो
- शीनू सिंह, मितौली
काफी दिनों से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। सहमति पत्र भरा लिया गया है। विद्यालय प्रशासन भी बच्चों की पढ़ाई में कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराए।
- अंजलि सिंह, मितौली
सरकार ने स्कूल खोलने का निर्णय लिया है, वह स्वागत योग्य है। तीसरी लहर में बच्चे सुरक्षित रहें, इसका स्कूल प्रबंधन पूरा ध्यान रखे।
- प्रीति सिंह, मितौली
स्कूल खुलने से बच्चों को बेहतर शिक्षा तो मिलेगी ही लेकिन स्कूल प्रबंधन भी स्कूल में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए बच्चों को शिक्षा दें तो आने वाली तीसरी लहर से डर ज्यादा नहीं रहेगा।
- आरती बाथम, पलियाकलां
स्कूल न खुलने से बच्चे पढ़ाई में काफी पिछड़ रहे हैं, ऑनलाइन पढ़ाई में भी ज्यादा ध्यान नहीं लगता है। इस वजह से स्कूल खुलना तो जरूरी है लेकिन कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए स्कूल प्रबंधन को बेहतर इंतजाम करने चाहिए।
- किरन नाग, पलियाकलां
कक्षा एक से पांच तक के स्कूल खुलने जरूरी भी हो गए थे। बच्चों का भविष्य देखते हुए उनकी पढ़ाई जरूरी है। उम्मीद यह है कि स्कूल प्रबंधन पहले से ही कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए बच्चों को पढ़ाएगा।
- रजनी, पलियाकलां
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कई स्कूलों में की गई है पहले दिन आने वाले बच्चों के स्वागत की तैयारी
लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमण के चलते 2020 से चौपट हुई शिक्षा व्यवस्था को 2021 में फिर से पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है। कई चरणों में कक्षावार स्कूल-कॉलेज खोले जा रहे हैं। इसी क्रम में कक्षा एक से पांच तक के स्कूल बुधवार (एक सितंबर 2021) से कोविड गाइडलाइन के तहत खुल जाएंगे। कई स्कूलों में पहले दिन स्कूल आने पर बच्चों का स्वागत किए जाने की भी तैयारी है। वहीं सितंबर-अक्तूबर में संभावित कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए अभिभावक असमंजस में हैं कि वह बच्चों को स्कूल भेजे या नहीं।
मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद से सभी विद्यालय बंद चल रहे थे। अगस्त 2021 में कोरोना संक्रमण कम होने और टीकाकरण की रफ्तार तेज होने के बाद सरकार ने स्कूल-कॉलेज खोलने का फैसला किया। कक्षा एक से पांच तक के छात्रों के अभिभावकों से सहमति पत्र भरवाने का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। हालांकि विभागीय अधिकारियों की कहना है कि स्कूल खुलने के साथ ही अभिभावकों से सहमति पत्र भरवाने का काम प्रारंभ हो जाएगा। यहां बता दें कि पूर्व में खोले गए बेसिक के स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 10 से 30 फीसदी दर्ज की जा रही है, जो अधिकारियों की चिंता का विषय है।
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ऑनलाइन पढ़ाई का भी रहेगा विकल्प
कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका के मद्देनजर शासन द्वारा जारी गाइड लाइन में कहा गया है कि जो अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजना नहीं चाहते वो अपने बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प चुन सकते हैं।
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प्राइवेट स्कूलों में फीस के साथ ही वाहन शुल्क जमा करने का दबाव
परिषदीय स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क होने से इनके छात्रों व अभिभावकों को भारी-भरकम फीस जमा करने का तनाव नहीं है। वहीं प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधन ने अभिभावकों से सहमति पत्र भरवाने से पहले फीस और वाहन शुल्क जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद रहने का भी शुल्क वसूला जा रहा है, तो वहीं वाहन शुल्क के लिए तीन महीने की रकम एकसाथ जमा कराई जा रही है।
कक्षा एक से पांच तक के सभी परिषदीय व मान्यता प्राप्त स्कूल बुधवार से खुलने जा रहे हैं। बच्चों को छह फुट की दूरी पर बैठाने के निर्देश हैं। बच्चे और शिक्षक कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करेंगे। सभी बीईओ को सुबह आठ बजे से विद्यालयों का निरीक्षण अनिवार्य रूप से करने के निर्देश हैं, जिसकी फोटा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करेंगे।
- डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए
स्कूल तो आज से खुल रहे हैं। मगर, बच्चों को विद्यालय भेजने का अभी निर्णय नहीं लिया है, क्योंकि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए किसी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहती।
- सरिता वर्मा, लखीमपुर
स्कूल भले ही बुधवार से खुल जाएं, लेकिन बेटी को अभी स्कूल कदापि नहीं भेजेंगे, क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए बेटी को स्कूल भेजने का औचत्य ही नहीं।
- दीपिका सोनी, मिश्राना, लखीमपुर
स्कूल प्रबंधन कोरोना से बचाव के पर्याप्त इंतजाम होने का दावे कर रहा है। मगर घर से स्कूल और स्कूल से घर के बीच की जिम्मेदारी कौन लेगा। इसलिए कुछ दिन देखने के बाद ही स्कूल भेजूंगी।
- सरिता गुप्ता, नई बस्ती, लखीमपुर
फिलहाल अभी कुछ दिन तो स्कूल नहीं भेजेंगें, क्योंकि बच्चों के मामले में रिस्क बिल्क़ुल नहीं लेंगे। सुरक्षा पहले है और पढ़ाई बाद में।
- आरती गौड़, काशीनगर, लखीमपुर
बेटी अविका राजपूत कक्षा एक में पढ़ रही है। शासन की गाइड लाइन के अनुरूप बेटी को स्कूल भेजने के पक्ष में हूं। स्कूल की तरफ से कोरोना से बचाव की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
- पिंकी राजपूत, गोला
बेटी देविका गुप्ता क्लास केजी में पढ़ती है। स्कूल में बच्चों के बीच में पर्याप्त रूप से दूरी, क्लास रूम में सैनिटाइजेशन और टीचिंग से साथ सहयोगी स्टाफ का वैक्सीनेशन जरूरी है।
- पूजा गुप्ता, गोला
नर्सरी केजी के बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में हम नहीं हैं। कोरोना काल में गाइडलाइन के हिसाब से स्कूल वाले बच्चों का कितना ध्यान रख पाएंगे। यह भी विचारणीय है।
- शिवानी गुप्ता, गोला
बेटा कुश कक्षा 5 में पढ़ता है। बच्चों को स्कूल भेजना किसी भी अभिभावक के लिए एक दुख स्वप्न जैसा ही है। जब तक सरकार बच्चों के लिए वैक्सीन की व्यवस्था और उचित मानक निर्देशित नही कर देती है तब तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहिए।
- ज्योत्सना अग्निहोत्री, गोला
बेटा जीयूस फर्स्ट में पढ़ता है। कोरोना बीमारी के चलते बच्चे दो साल से स्कूल में पढ़ने नहीं जा सके, जिसके चलते उनके भविष्य में पढ़ाई को लेकर एक अव्यवस्था पनप गई है। सरकार को सुरक्षा की उचित व्यवस्था बनानी चाहिये।
- शबा अग्निहोत्री, गोला
विद्यालय खोलने का निर्णय सही समय पर लिया गया है। बच्चों को पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। विद्यालय में कोविड प्रोटोकॉल का पालन हो
- शीनू सिंह, मितौली
काफी दिनों से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। सहमति पत्र भरा लिया गया है। विद्यालय प्रशासन भी बच्चों की पढ़ाई में कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराए।
- अंजलि सिंह, मितौली
सरकार ने स्कूल खोलने का निर्णय लिया है, वह स्वागत योग्य है। तीसरी लहर में बच्चे सुरक्षित रहें, इसका स्कूल प्रबंधन पूरा ध्यान रखे।
- प्रीति सिंह, मितौली
स्कूल खुलने से बच्चों को बेहतर शिक्षा तो मिलेगी ही लेकिन स्कूल प्रबंधन भी स्कूल में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए बच्चों को शिक्षा दें तो आने वाली तीसरी लहर से डर ज्यादा नहीं रहेगा।
- आरती बाथम, पलियाकलां
स्कूल न खुलने से बच्चे पढ़ाई में काफी पिछड़ रहे हैं, ऑनलाइन पढ़ाई में भी ज्यादा ध्यान नहीं लगता है। इस वजह से स्कूल खुलना तो जरूरी है लेकिन कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए स्कूल प्रबंधन को बेहतर इंतजाम करने चाहिए।
- किरन नाग, पलियाकलां
कक्षा एक से पांच तक के स्कूल खुलने जरूरी भी हो गए थे। बच्चों का भविष्य देखते हुए उनकी पढ़ाई जरूरी है। उम्मीद यह है कि स्कूल प्रबंधन पहले से ही कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए बच्चों को पढ़ाएगा।
- रजनी, पलियाकलां