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झिझक दूर करने का सबसे बेहतर इलाज अभ्यास : डीएम
Thu, 27 Aug 2026 11:26 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 27 Aug 2026 11:26 PM IST
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संवाद कार्यक्रम में मौजूद छात्राएं। स्रोत: सूचना विभाग
लखीमपुर खीरी। राजकीय इंटर कॉलेज में बृहस्पतिवार को छात्र-छात्राओं का संवाद कार्यक्रम हुआ। इसमें डीएम अंजनी कुमार सिंह ने बच्चों को पढ़ाई के साथ जीवन में आगे बढ़ने के गुर बताए।
उन्होंने कहा कि संवाद कभी एकतरफा नहीं हो सकता। बच्चे जब तक सवाल नहीं पूछेंगे, तब तक संवाद और शिक्षा दोनों अधूरे रहेंगे। मन में चल रहे सवाल, समस्याएं और भविष्य के सपने बिना झिझक साझा करें।
डीएम ने कहा कि झिझक की स्थिति केवल बच्चों के साथ नहीं होती। बड़े लोगों को भी कभी-कभी इसका सामना करना पड़ता है। जब हम सामने वाले को खुद से बहुत बड़ा मान लेते हैं तो झिझक पैदा होती है। इसका सबसे बेहतर इलाज अभ्यास है। लगातार बोलने और प्रयास करने से डर अपने आप खत्म हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि मन में कई विकल्प चलने से एकाग्रता टूट जाती है। कभी लगता है पढ़कर क्या होगा, कभी दोस्त खेलते नजर आते हैं तो कभी किसी दूसरे काम का ख्याल आने लगता है। ऐसे में सबसे पहले लक्ष्य तय करना जरूरी है।
डीएम ने कहा कि गलत उत्तर पर तनाव नहीं, गलती पकड़ने की जिद होनी चाहिए। उत्तर गलत आने पर यह सोचें कि गलती कहां हुई। जब तक सही उत्तर न मिल जाए, सवाल को दोबारा हल करते रहें। जरूरत पड़े तो एक ही सवाल 10 बार हल करें, लेकिन यह पता लगाए बिना आगे न बढ़ें कि गलती क्यों हुई।
उन्होंने कहा कि सवाल को अच्छी तरह समझ लेना ही आधा हल कर लेना है। परीक्षा में प्रश्न पहली बार में समझ न आए तो उसे दो-तीन बार पढ़ें।
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उन्होंने कहा कि संवाद कभी एकतरफा नहीं हो सकता। बच्चे जब तक सवाल नहीं पूछेंगे, तब तक संवाद और शिक्षा दोनों अधूरे रहेंगे। मन में चल रहे सवाल, समस्याएं और भविष्य के सपने बिना झिझक साझा करें।
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डीएम ने कहा कि झिझक की स्थिति केवल बच्चों के साथ नहीं होती। बड़े लोगों को भी कभी-कभी इसका सामना करना पड़ता है। जब हम सामने वाले को खुद से बहुत बड़ा मान लेते हैं तो झिझक पैदा होती है। इसका सबसे बेहतर इलाज अभ्यास है। लगातार बोलने और प्रयास करने से डर अपने आप खत्म हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि मन में कई विकल्प चलने से एकाग्रता टूट जाती है। कभी लगता है पढ़कर क्या होगा, कभी दोस्त खेलते नजर आते हैं तो कभी किसी दूसरे काम का ख्याल आने लगता है। ऐसे में सबसे पहले लक्ष्य तय करना जरूरी है।
डीएम ने कहा कि गलत उत्तर पर तनाव नहीं, गलती पकड़ने की जिद होनी चाहिए। उत्तर गलत आने पर यह सोचें कि गलती कहां हुई। जब तक सही उत्तर न मिल जाए, सवाल को दोबारा हल करते रहें। जरूरत पड़े तो एक ही सवाल 10 बार हल करें, लेकिन यह पता लगाए बिना आगे न बढ़ें कि गलती क्यों हुई।
उन्होंने कहा कि सवाल को अच्छी तरह समझ लेना ही आधा हल कर लेना है। परीक्षा में प्रश्न पहली बार में समझ न आए तो उसे दो-तीन बार पढ़ें।